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लाल आतंक से मुक्त हुई यह सड़क

News Pratyaksh | Updated : Sat 18th Jan 2025, 10:30 am

लाल आतंक से मुक्त हुई यह सड़क, कभी यहां से गुजरने में खौफ खाते थे नेता और अधिकारी ,पलामू: रेड कॉरिडोर का एक ऐसा रोड जो कई दशकों तक माओवादियों के कब्जे में रहा. इस सड़क से कोई भी अधिकारी या नेता नहीं गुजरते थे. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. इस रोड पर अब लोग बेखौफ लोग गुजर रहे हैं. यह सड़क है झारखंड को बिहार से जोड़ने वाली मनातू चक-सलैया इमामगंज रोड.2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पहली बार इस रोड से पुलिंग पार्टी और सुरक्षाबल गुजरे. 38 किलोमीटर के मनातू चक सलैया इमामगंज रोड कभी माओवादियों के निशाने पर रहता था. इस सड़क पर दर्जनों नक्सल हमले हुए हैं.माओवादियों का रेड कॉरिडोर बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा से लेकर आंध्रप्रदेश तक फैला हुआ है. इस कॉरिडोर में मनातू चक सलैया रोड की बड़ी भूमिका है. माओवादियों का दस्ता बिहार से छत्तीसगढ़ या आंध्रप्रदेश जाने के लिए इसी रोड से गुजरता था. यह माओवादियों के यूनिफाइड कमांड छकरबंधा, ट्रेनिंग सेंटर बूढापहाड़ और इस्टर्न रीजनल ब्यूरो का मुख्यालय सारंडा को जोड़ता भी है. 2000 के बाद माओवादियों ने इस रोड पर कब्जा जमा लिया लिया था. यह कब्जा 2018-19 तक रहा. लेकिन माओवादियों की गतिविधि 2022-23 तक रही. 2024 में चुनाव के दौरान जब पहली बार सुरक्षा बल और पोलिंग पार्टी गुजरी तो यह रोड नक्सलियों के कब्जे से मुक्त हुआ.मनातू रोड बनाने के लिए झारखंड की सरकार ने आठ बार टेंडर निकाला था. लेकिन माओवादियों के खौफ के कारण कोई भी ठेकेदार टेंडर नहीं डालता था. 2016-17 में पहली बार केंद्रीय सुरक्षा बल की मौजूदगी में रोड का निर्माण कार्य शुरू हुआ था और 2024 में निर्माण कार्य पूरा हुआ. इस रोड पर तीन पुल बनाए गए हैं. रोड निर्माण के दौरान माओवादी कई बार हमला भी कर चुके हैं. सीआरपीएफ की दो कंपनी रोड बनाने के दौरान तैनात रही.अब स्थिति बदल गई है रोड पर नक्सल खौफ खत्म हो गया है. 2023 के बाद कोई भी नक्सल हमला नहीं हुआ है. 2024 में पहली बार इस रोड पर पोलिंग पार्टी गुजारी थी जिसके बाद खत्म हो गया है. इस रोड पर लोग अभी खौफ यात्रा कर रहे हैं. मनातू के रहने वाले उदेश यादव ने बताया कि अब रोड पर खौफ नहीं है, रोड अच्छा बन गया है. मनातू के उरूर के रहने वाले इमामुद्दीन ने बताया कई बार रोड पर विस्फोट हुए हैं रोड पर चलने में डर लगता था लेकिन अब माहौल बदल गया है.