अमेरिका द्वारा 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर वेनेजुएला के तेल सेक्टर पर वैश्विक नजरें टिक गई हैं.
News Pratyaksh | Updated : Mon 05th Jan 2026, 12:20 pm
अमेरिका द्वारा 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर वेनेजुएला के तेल सेक्टर पर वैश्विक नजरें टिक गई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला के जर्जर तेल ढांचे में निवेश कर सकती हैं, ताकि उत्पादन बढ़ाकर अमेरिका और अन्य देशों को तेल की आपूर्ति की जा सके. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह काम आसान नहीं होगा और इसके लिए भारी निवेश व समय दोनों की जरूरत पड़ेगी .चॉइस ब्रोकिंग की रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जो करीब 303 अरब बैरल का है. इसके बावजूद नवंबर 2025 में देश का तेल उत्पादन महज 9 लाख बैरल प्रतिदिन रहा. यह आंकड़ा 2010 के शुरुआती वर्षों में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन था. उत्पादन में यह भारी गिरावट सालों से निवेश की कमी, तकनीकी खराबी और राजनीतिक अस्थिरता का नतीजा मानी जा रही है .रिपोर्ट में कहा गया है कि वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA में लंबे समय से पर्याप्त निवेश नहीं हुआ है. खराब मशीनरी और सीमित संसाधनों के चलते उत्पादन बढ़ाना बड़ी चुनौती बना हुआ है. अनुमान है कि 2026 में सबसे अच्छे हालात में भी उत्पादन में केवल 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे ज्यादा उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश जरूरी होगा, जिसका असर 2027 से पहले दिखना मुश्किल है.