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दलबदल कानून पर फिर होगी बहस? सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल की याचिका पर जारी किया नोटिस

News Pratyaksh | Updated : Mon 27th Jul 2026, 12:00 pm
दलबदल कानून पर फिर होगी बहस? सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल की याचिका पर जारी किया नोटिस
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वतंत्र राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की उस याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) की संवैधानिक व्याख्या पर पुनर्विचार की मांग की गई है। मामले की सुनवाई जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने की।
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी कि दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ-4 का वर्तमान स्वरूप लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करता है, क्योंकि इसके जरिए राजनीतिक दलों के विलय (Merger) के नाम पर विधायक और सांसद दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बच जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे अल्पमत दल बहुमत में और बहुमत दल अल्पमत में बदल सकता है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआत में इस मामले पर सुनवाई को लेकर हिचकिचाहट दिखाई और कहा कि यह ऐसा विषय है, जिस पर संसद और राजनीतिक दलों को भी विचार करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी पूछा कि इस मुद्दे को अनुच्छेद 32 के तहत क्यों उठाया गया है।
दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी कर दिया। यह याचिका हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में हुए राजनीतिक दलबदल और विधायकों के विलय की घटनाओं की पृष्ठभूमि में दाखिल की गई है।
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