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भैंस किसकी? गया में मालिकाना हक का विवाद IG तक पहुंचा, ईयर टैग से खुलेगा राज

News Pratyaksh | Updated : Thu 27th Aug 2026, 12:28 pm
भैंस किसकी? गया में मालिकाना हक का विवाद IG तक पहुंचा, ईयर टैग से खुलेगा राज
गया। अतरी प्रखंड में एक भैंस के मालिकाना हक को लेकर दो गांवों के बीच ऐसा विवाद खड़ा हो गया कि मामला मगध रेंज के आईजी विकास वैभव तक पहुंच गया। असढ़िया गांव के सूरज यादव और नौरंगा गांव के प्रकाश मांझी एक ही भैंस को अपना बता रहे हैं। अब पुलिस और पशुपालन विभाग की जांच के बाद ही तय होगा कि भैंस का असली मालिक कौन है।
एक भैंस, दो दावेदार और IG तक पहुंचा मामला
मंगलवार को प्रकाश मांझी समेत कई ग्रामीण मगध रेंज के आईजी विकास वैभव से मिलने पहुंचे। आईजी ने मामले की जानकारी लेते हुए जांच का जिम्मा ग्रामीण एसपी को सौंपा है।
विवाद की स्थिति को देखते हुए जरूरत पड़ने पर भैंस और उसके बच्चे की डीएनए जांच कराने की संभावना भी जताई गई है।
तीन महीने पहले चोरी होने का दावा
प्रकाश मांझी का कहना है कि करीब तीन महीने पहले उनकी भैंस चोरी हो गई थी। उनके अनुसार, उन्होंने भैंस को महाचक से खरीदा था। बाद में वही भैंस असढ़िया गांव में एक व्यक्ति के घर के खूंटे से बंधी मिली।
प्रकाश का दावा है कि असढ़िया गांव उनके गांव से करीब पांच गांव की दूरी पर है। भैंस को पहचानने के आधार पर उन्होंने उस पर अपना मालिकाना हक जताया है।
हालांकि, इस दावे के समर्थन में फिलहाल खरीद या चोरी से संबंधित कोई लिखित दस्तावेज सामने नहीं आया है।
डीएनए से मालिक नहीं, ईयर टैग से मिल सकता है सुराग
जिला पशुपालन पदाधिकारी सुनील राय के अनुसार, डीएनए जांच से किसी पशु का पंजीकृत मालिक सीधे साबित नहीं होता। डीएनए से पशु के जैविक संबंध, जैसे मां-बच्चे के संबंध की पुष्टि की जा सकती है।
वहीं, पशु के स्वामित्व की जानकारी के लिए भारत पशुधन पोर्टल और पशु के कान में लगे ईयर टैग का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि भैंस के कान में ईयर टैग लगा है, तो उसके नंबर के आधार पर पंजीकृत मालिक की जानकारी निकाली जा सकती है।
पशुओं का 'आधार' है ईयर टैग
पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ईयर टैग पशुओं की पहचान के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें दर्ज नंबर के जरिए पशु का रिकॉर्ड भारत पशुधन पोर्टल पर देखा जा सकता है।
ऐसे में इस अनोखे विवाद में भैंस का ईयर टैग सबसे अहम सुराग साबित हो सकता है। अगर टैग का रिकॉर्ड उपलब्ध हुआ, तो दोनों दावेदारों के दावे की जांच में पुलिस और प्रशासन को महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
न चोरी की शिकायत, न खरीद का दस्तावेज
थाना सूत्रों के अनुसार, प्रकाश मांझी की भैंस चोरी होने के संबंध में अतरी थाने में कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इससे कथित चोरी की तारीख और घटना की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो पा रही है।
वहीं, दोनों दावेदारों के पास भैंस की खरीद से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं बताए जा रहे हैं।
अब पुलिस जांच, पशुपालन विभाग के रिकॉर्ड और ईयर टैग की जानकारी के आधार पर यह तय किया जाएगा कि एक भैंस पर दावा करने वाले दोनों लोगों में से वास्तविक मालिक कौन है।