गढ़वा में गलत इंजेक्शन से 17 वर्षीय किशोर की मौत, अवैध दवा दुकान सील
गढ़वा। बरडीहा थाना क्षेत्र के बरडीहा बाजार में एक 17 वर्षीय किशोर की इलाज के दौरान मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। आरोप है कि बिना लाइसेंस संचालित प्रज्ञा ड्रग स्टोर में गलत तरीके से इंजेक्शन लगाए जाने के बाद किशोर की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। मामले की रिपोर्ट रांची मुख्यालय को भी भेजी गई है।
घटना के बाद अधिकारियों ने दुकान पर छापेमारी की। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं बरामद होने के साथ मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाला बेड और ग्लूकोज चढ़ाने का स्टैंड भी मिला। प्रशासन ने दुकान को तत्काल सील कर दिया है।
विशुनपुरा गांव निवासी गणेश पाल का 17 वर्षीय पुत्र अनोज कुमार पाल सोमवार को अपनी मां के साथ जीका गांव स्थित ननिहाल आया था। इसी दौरान उसकी तबीयत खराब हुई और उसे बुखार हो गया। इसके बाद उसका मामा दिनेश पाल उसे इलाज के लिए बरडीहा बाजार स्थित प्रज्ञा ड्रग स्टोर ले गया।
परिजनों के अनुसार, दुकान संचालक नरेश प्रसाद के पुत्र शशि प्रसाद ने किशोर का इलाज किया।
इंजेक्शन लगाने के बाद बिगड़ी हालत
मृतक के मामा दिनेश पाल ने आरोप लगाया कि शशि प्रसाद ने अनोज को सीधे नस में इंजेक्शन लगा दिया। परिजनों ने कथित तौर पर इसका विरोध करते हुए इंजेक्शन दूसरी जगह लगाने की बात कही, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद अनोज बेहोश हो गया और उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई। बाद में उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य अधिकारियों की प्रारंभिक आशंका है कि गलत तरीके से इंजेक्शन दिए जाने से उसकी स्थिति गंभीर हुई। हालांकि, मौत की सटीक चिकित्सीय वजह पोस्टमार्टम और आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
छापेमारी में मिली एक्सपायरी दवाएं
घटना की जानकारी मिलने के बाद मझिआंव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. गोविंद प्रसाद सेठ और बरडीहा प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
दुकान की तलाशी के दौरान अधिकारियों को बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं मिलीं। इसके अलावा दुकान के अंदर मरीजों के लिए बेड और ग्लूकोज चढ़ाने का स्टैंड भी पाया गया।
आरोप है कि दुकान में दवा बिक्री के अलावा मरीजों का इलाज भी किया जा रहा था। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पूरे स्टोर को सील कर दिया है।
जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी रिपोर्ट रांची मुख्यालय भेजी गई है। अब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की जांच के आधार पर यह तय होगा कि दुकान का संचालन किन नियमों के उल्लंघन में किया जा रहा था और किशोर की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है।
प्रशासन की इस कार्रवाई ने ग्रामीण इलाकों में बिना लाइसेंस दवा दुकान चलाकर इलाज करने वाले लोगों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि बिना प्रशिक्षित चिकित्सकीय निगरानी के इंजेक्शन और दवाओं का इस्तेमाल लोगों की जान के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है