पटना में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ा? 5 दिन में दो महिलाओं की रिपोर्ट पॉजिटिव
पटना: नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी NMCH के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की जांच में एक और महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है।
सोमवार को टॉक्सोप्लाज्मा लैब में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण के चार संदिग्ध मरीजों के नमूनों की जांच की गई। इनमें खुशरूपुर की 31 वर्षीय महिला की रिपोर्ट लेप्टोस्पायरोसिस IgM के लिए पॉजिटिव आई है।
विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार के मुताबिक, महिला फिलहाल NMCH के औषधि विभाग में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है।
खास बात यह है कि पांच दिनों के भीतर लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण का यह दूसरा पॉजिटिव मामला सामने आया है।
इससे पहले 13 अगस्त को अगमकुआं निवासी 48 वर्षीय महिला की जांच रिपोर्ट भी लेप्टोस्पायरोसिस IgM के लिए पॉजिटिव मिली थी। वह भी अस्पताल के औषधि विभाग में भर्ती थी।
बिहार में NMCH में जांच की सुविधा
डॉ. संजय कुमार ने बताया कि बिहार के सरकारी अस्पतालों में फिलहाल NMCH में लेप्टोस्पायरोसिस की जांच की सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल को इस संक्रमण के लिए निगरानी केंद्र भी बनाया गया है।
सरकारी अस्पताल में भर्ती किसी मरीज में लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण पाए जाने पर NMCH में उसकी निःशुल्क जांच कराई जा सकती है।
चूहे और दूषित पानी से संक्रमण का खतरा
लेप्टोस्पायरोसिस एक ऐसा संक्रमण है जो संक्रमित चूहों और अन्य पशुओं के मल-मूत्र, दूषित पानी या संक्रमित मिट्टी के संपर्क में आने से इंसानों तक पहुंच सकता है।
बारिश और बाढ़ के दौरान इसका खतरा बढ़ सकता है। बाढ़ का पानी आबादी वाले इलाकों में पहुंचने पर जंगली चूहे सुरक्षित जगह की तलाश में घरों और शहरों की तरफ आ सकते हैं।
ऐसे में लोगों को दूषित पानी और गंदे पानी के संपर्क से बचने और किसी भी संदिग्ध लक्षण की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।