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जापान के Hayabusa-2 ने एस्टेरॉयड के पास से भरी उड़ान, पृथ्वी की रक्षा तकनीक के परीक्षण में मिली सफलता

News Pratyaksh | Updated : Mon 06th Jul 2026, 01:09 pm
जापान के Hayabusa-2 ने एस्टेरॉयड के पास से भरी उड़ान, पृथ्वी की रक्षा तकनीक के परीक्षण में मिली सफलता
जापान की अंतरिक्ष एजेंसी Japan Aerospace Exploration Agency (JAXA) ने पृथ्वी को संभावित खतरनाक क्षुद्रग्रहों से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एजेंसी का स्पेस प्रोब Hayabusa-2 रविवार को पृथ्वी के निकट मौजूद एस्टेरॉयड Torifune के बेहद करीब से सफलतापूर्वक गुजरा।
फ्रिज के आकार वाले Hayabusa-2 को एस्टेरॉयड के लगभग 800 मीटर के दायरे से गुजारने की योजना बनाई गई थी। इस मिशन का उद्देश्य एस्टेरॉयड से टकराना नहीं था, बल्कि यह जांचना था कि भविष्य में यदि किसी खतरनाक अंतरिक्ष चट्टान का रास्ता बदलने की जरूरत पड़े तो स्पेसक्राफ्ट को कितनी सटीकता से नियंत्रित किया जा सकता है।
यह परीक्षण मिशन NASA के 2022 के ऐतिहासिक DART मिशन के बाद आया है, जिसमें एक अंतरिक्ष यान को जानबूझकर Dimorphos से टकराया गया था। उस मिशन ने सफलतापूर्वक एस्टेरॉयड की कक्षा में बदलाव कर ग्रह रक्षा तकनीक की संभावनाओं को साबित किया था।
करीब 18,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा कर रहे Hayabusa-2 ने टोरिफ्यून के पास से सुरक्षित उड़ान भरी। JAXA के अनुसार स्पेसक्राफ्ट पूरी तरह सामान्य रूप से काम कर रहा है और मिशन के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं। कंट्रोल रूम में वैज्ञानिकों ने मिशन की सफलता पर तालियां बजाकर खुशी जताई।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि पुष्टि हो जाती है कि प्रोब वास्तव में एस्टेरॉयड के 800 मीटर के भीतर से गुजरा, तो यह पृथ्वी के निकट किसी क्षुद्रग्रह के सबसे नजदीकी फ्लाईबाय मिशनों में से एक माना जाएगा। विशेषज्ञों ने इसकी सटीकता की तुलना जापान के दक्षिणी द्वीप ओकिनावा से उत्तरी द्वीप होक्काइडो तक फैले क्षेत्र में एक छोटे सिक्के पर निशाना लगाने जैसी चुनौती से की है।
यह मिशन भविष्य में पृथ्वी को संभावित एस्टेरॉयड टक्कर से बचाने के लिए विकसित की जा रही "प्लैनेटरी डिफेंस" तकनीकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।