SAARC को फिर से जिंदा करने की मांग तेज: बांग्लादेश और मालदीव की पहल पर भारत ने दिया स्पष्ट संदेश
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन सार्क (SAARC) को दोबारा सक्रिय करने की बांग्लादेश और मालदीव की मांग ने एक बार फिर इस क्षेत्रीय संगठन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में सार्क के पुनर्जीवित होने की राह अब भी आसान नहीं मानी जा रही है।
नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत हमेशा मजबूत क्षेत्रीय सहयोग का समर्थक रहा है। हालांकि, उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि दक्षिण एशिया में सभी जानते हैं कि कौन-सा देश और उसकी कौन-सी गतिविधियां सार्क की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि "सहयोग के लिए सद्भावना आवश्यक होती है।"
2016 के बाद नहीं हुई कोई SAARC शिखर बैठक
साल 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद इस्लामाबाद में प्रस्तावित सार्क शिखर सम्मेलन रद्द कर दिया गया था। भारत के साथ कई सदस्य देशों ने भी सम्मेलन का बहिष्कार किया था। इसके बाद से अब तक सार्क की कोई शिखर बैठक आयोजित नहीं हुई है।
मालदीव और बांग्लादेश की नई पहल
हाल के दिनों में मालदीव और बांग्लादेश दोनों ने अलग-अलग मंचों से सार्क को फिर से सक्रिय करने की वकालत की है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अपने देश के स्वतंत्रता दिवस समारोह में सार्क को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए सभी सदस्य देशों से मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मालदीव इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
वहीं, बांग्लादेश ने भी इस वर्ष फरवरी में सार्क प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। इसके अलावा, नई दिल्ली में आयोजित बिम्सटेक (BIMSTEC) की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक के दौरान भी ढाका ने एक बार फिर सार्क को सक्रिय करने की मांग उठाई।
सार्क की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को ढाका में हुई थी और इसका सचिवालय काठमांडू में स्थित है। वर्तमान में इसके सदस्य भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान हैं।
संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार, आर्थिक सहयोग, कृषि, ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा, विज्ञान, पर्यटन, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि, भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण सार्क की गतिविधियां लगभग ठप पड़ी हुई हैं।