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करीब तीन दशक पुराने बहुचर्चित अलकतरा घोटाला में आखिरकार न्यायिक मुहर लग गई है. वर्ष 1997 से जुड़े इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने चार अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई है. साथ ही सभी दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है. व

News Pratyaksh | Updated : Thu 24th Apr 2025, 12:00 am

करीब तीन दशक पुराने बहुचर्चित अलकतरा घोटाला में आखिरकार न्यायिक मुहर लग गई है. वर्ष 1997 से जुड़े इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने चार अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई है. साथ ही सभी दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है. वहीं साक्ष्य के अभाव में तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया.सिविल कोर्ट के अधिवक्ता संजय कुमार के अनुसार, यह मामला लंबे समय से अदालत में लंबित था और अब 29 साल बाद फैसला सामने आया है. यह निर्णय सीबीआई के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया. सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने पक्ष रखा. अभियोजन ने मामले को साबित करने के लिए 35 गवाहों की गवाही और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में पेश किए.अभियोजन के मुताबिक, अलकतरा सप्लाई के तीन ऑर्डरों में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया. हल्दिया से एनएच बरही तक अलकतरा की आपूर्ति बरौनी के रास्ते होनी थी, लेकिन फर्जी सप्लाई दिखाकर सरकारी राशि की निकासी कर ली गई. जांच में सामने आया कि तय मात्रा से कम आपूर्ति दिखाकर फर्जी बिल बनाए गए. ट्रांसपोर्टर द्वारा बरौनी में रिपोर्टिंग भी नहीं की गई और फर्जी भाड़ा बिल जमा किया गया. मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने केस नंबर 12/97 दर्ज कर जांच शुरू की थी.