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रांची।* झारखंड में राज्यसभा चुनाव आते ही INDIA गठबंधन के भीतर ऐसा माहौल बन गया मानो कांग्रेस अपनी सीट के लिए चुनाव आयोग से नहीं, बल्कि अपने सहयोगी दलों से अनुमति मांग रही हो। जिस पार्टी ने कभी देश पर दशकों तक शासन किया, वह आज झारखंड में एक राज्यसभा सीट के

News Pratyaksh | Updated : Tue 16th Jun 2026, 11:42 am
रांची।* झारखंड में राज्यसभा चुनाव आते ही INDIA गठबंधन के भीतर ऐसा माहौल बन गया मानो कांग्रेस अपनी सीट के लिए चुनाव आयोग से नहीं, बल्कि अपने सहयोगी दलों से अनुमति मांग रही हो। जिस पार्टी ने कभी देश पर दशकों तक शासन किया, वह आज झारखंड में एक राज्यसभा सीट के लिए JMM और RJD के दरवाजे खटखटाती नजर आई।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के नेताओं ने राज्यसभा सीट की दावेदारी तो पेश कर दी, लेकिन अंतिम फैसला उनके हाथ में कम और सहयोगी दलों की इच्छा पर ज्यादा निर्भर दिखा। झामुमो के कई नेताओं ने खुले तौर पर संकेत दिए कि राज्यसभा की दोनों सीटों पर उनका दावा बनता है। ऐसे में कांग्रेस की स्थिति उस छात्र जैसी हो गई जो परीक्षा देने से पहले ही पास होने की अनुमति मांगने लगे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर बैठकों का दौर चला। तस्वीरों में नेता मुस्कुराते दिखाई दिए, लेकिन राजनीतिक संदेश साफ था—झारखंड में गठबंधन का बड़ा भाई कौन है, यह किसी को समझाने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस नेताओं की सक्रियता देखकर ऐसा लग रहा था कि सीट जीतने से पहले सहयोगियों को मनाना ज्यादा जरूरी है।
RJD ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विधानसभा में संख्या कम होने के बावजूद पार्टी की राजनीतिक अहमियत इतनी रही कि कांग्रेस को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना पड़ा। आखिर गठबंधन की राजनीति में सीटें गणित से कम और रिश्तों से ज्यादा तय होती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नाम ने सत्ता पक्ष की बेचैनी बढ़ा दी। परिणामस्वरूप, जो दल एक-दूसरे के साथ सरकार चला रहे हैं, उन्हें बार-बार एक-दूसरे को भरोसा दिलाना पड़ रहा है कि सब कुछ ठीक है। राजनीति के जानकार इसे "गठबंधन धर्म" कह रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे "सीट बचाओ अभियान" बता रहा है।
कांग्रेस समर्थकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी को राज्यसभा सीट मिली या फिर गठबंधन सहयोगियों ने उसे सीट पर दावा करने की अनुमति दी? क्योंकि पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस कम और JMM ज्यादा निर्णायक भूमिका में दिखाई दी।
हालांकि कांग्रेस नेता इसे गठबंधन की मजबूती और सामूहिक निर्णय बता रहे हैं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में तंज कसने वालों की कमी नहीं है। उनका कहना है कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव ने यह साबित कर दिया कि कांग्रेस उम्मीदवार तय कर सकती है, मगर उसकी किस्मत का फैसला अभी भी सहयोगी दलों की बैठक में ही होता है।