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खुर्रम परवेज और पत्रकार इरफान मेहराज को UAPA केस में जमानत, पटियाला हाउस कोर्ट का बड़ा आदेश

News Pratyaksh | Updated : Sat 18th Jul 2026, 12:44 pm
खुर्रम परवेज और पत्रकार इरफान मेहराज को UAPA केस में जमानत, पटियाला हाउस कोर्ट का बड़ा आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट से पहले टेरर फंडिंग मामले में भी मिली थी राहत, चार साल से अधिक समय से हिरासत में थे खुर्रम परवेज
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने यूएपीए (UAPA) मामले में कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और पत्रकार इरफान मेहराज को जमानत दे दी है। प्रिंसिपल एंड सेशंस जज पीतांबर दत्त ने दोनों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
इस फैसले के बाद खुर्रम परवेज की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी टेरर फंडिंग मामले में उन्हें जमानत दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि वह चार साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह भी माना था कि वर्ष 2004 में लैंडमाइन विस्फोट में खुर्रम परवेज अपना एक पैर गंवा चुके हैं और उनकी शारीरिक स्थिति को विशेष ध्यान की आवश्यकता है। अदालत ने उन्हें पासपोर्ट जमा कराने, बिना अनुमति दिल्ली से बाहर न जाने और मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी न करने की शर्तों के साथ जमानत दी थी।
एनआईए के अनुसार, खुर्रम परवेज को 22 नवंबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ता की आड़ में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक सदस्य के साथ ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) का नेटवर्क संचालित किया और आतंकी गतिविधियों में सहयोग किया।
एनआईए ने नवंबर 2021 में दर्ज अपनी एफआईआर में आरोप लगाया था कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने खुर्रम परवेज समेत अन्य आरोपियों के साथ मिलकर भारत में आतंकी नेटवर्क खड़ा करने की साजिश रची। एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने सुरक्षा बलों की गतिविधियों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों से जुड़ी सूचनाएं आतंकी संगठन तक पहुंचाईं तथा एक सरकारी अधिकारी ने भी कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग कर दस्तावेज उपलब्ध कराए।
दिल्ली हाईकोर्ट से पहले टेरर फंडिंग मामले में भी मिली थी राहत, चार साल से अधिक समय से हिरासत में थे खुर्रम परवेज
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने यूएपीए (UAPA) मामले में कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और पत्रकार इरफान मेहराज को जमानत दे दी है। प्रिंसिपल एंड सेशंस जज पीतांबर दत्त ने दोनों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
इस फैसले के बाद खुर्रम परवेज की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी टेरर फंडिंग मामले में उन्हें जमानत दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि वह चार साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह भी माना था कि वर्ष 2004 में लैंडमाइन विस्फोट में खुर्रम परवेज अपना एक पैर गंवा चुके हैं और उनकी शारीरिक स्थिति को विशेष ध्यान की आवश्यकता है। अदालत ने उन्हें पासपोर्ट जमा कराने, बिना अनुमति दिल्ली से बाहर न जाने और मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी न करने की शर्तों के साथ जमानत दी थी।
एनआईए के अनुसार, खुर्रम परवेज को 22 नवंबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ता की आड़ में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक सदस्य के साथ ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) का नेटवर्क संचालित किया और आतंकी गतिविधियों में सहयोग किया।
एनआईए ने नवंबर 2021 में दर्ज अपनी एफआईआर में आरोप लगाया था कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने खुर्रम परवेज समेत अन्य आरोपियों के साथ मिलकर भारत में आतंकी नेटवर्क खड़ा करने की साजिश रची। एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने सुरक्षा बलों की गतिविधियों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों से जुड़ी सूचनाएं आतंकी संगठन तक पहुंचाईं तथा एक सरकारी अधिकारी ने भी कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग कर दस्तावेज उपलब्ध कराए।