मिसिर बेसरा का नेटवर्क कमजोर! 25 लाख का इनामी अजय महतो गिरफ्तार, सारंडा से लौटने पर पुलिस ने दबोचा
सुरक्षाबलों के दबाव में बिखर रहा माओवादी संगठन, एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा की तलाश तेज
देश के कभी सबसे ताकतवर नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) का नेटवर्क लगातार कमजोर पड़ता दिख रहा है। सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई के बीच संगठन के शीर्ष नेता और एक करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा के दस्ते के सदस्य तेजी से गिरफ्तार हो रहे हैं। इसी कड़ी में बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के सदस्य और 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली अजय महतो उर्फ टाइगर को गिरिडीह के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के करमू मांझी गांव से गिरफ्तार किया गया है।
जानकारी के अनुसार, सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों के लगातार अभियान और रसद की कमी के चलते मिसिर बेसरा ने अपने साथियों को जंगल छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर लौट जाने की सलाह दी थी। अजय महतो भी इसी के बाद अपने गांव लौट आया था, लेकिन खुफिया एजेंसियां लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
इसी अभियान के दौरान लातेहार से रविंद्र गंझू को भी गिरफ्तार किया गया, जबकि सीसी मेंबर आकाश मंडल, सचिन मॉर्डी और रवि सरदार के दलमा क्षेत्र में छिपे होने की सूचना है। वहीं बेला सरदार को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया जा चुका है। टेक विश्वनाथ और उसकी पत्नी नीलिमा तेलंगाना लौटकर आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, फिलहाल एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा, असीम मंडल, 15 लाख के इनामी मोछु समेत कई नक्सलियों की तलाश जारी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर झारखंड-ओडिशा सीमा से लगे सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि मिसिर बेसरा के साथ अब केवल दो सक्रिय माओवादी—करमचंद हेंब्रम और रंजीत—ही बचे हैं।
पुलिस के अनुसार, अजय महतो पिछले दो दशकों से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। उसके खिलाफ झारखंड के विभिन्न जिलों में 240 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह सब-इंस्पेक्टर अमित तिवारी हत्याकांड, लांजी ब्लास्ट समेत कई बड़े नक्सली हमलों में वांछित था और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मामलों में भी उसकी तलाश थी।