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टंडवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 90 लाख रुपये के अवैध लॉटरी टिकट जब्त, एक गिरफ्तार

News Pratyaksh | Updated : Wed 09th Sep 2026, 12:28 pm
टंडवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 90 लाख रुपये के अवैध लॉटरी टिकट जब्त, एक गिरफ्तार चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र में अवैध लॉटरी कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 90 लाख रुपये मूल्य के अवैध लॉटरी टिकट बरामद किए हैं। इस मामले में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है, जबकि टिकटों की तस्करी में प्रयुक्त एक चारपहिया वाहन भी जब्त किया गया है। यह कार्रवाई टंडवा थाना पुलिस की छापेमारी टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर की। क्या है पूरा मामला? पुलिस को सूचना मिली थी कि एक पिकअप वाहन से अवैध लॉटरी टिकटों की खेप हजारीबाग से टंडवा लाई जा रही है। सूचना के सत्यापन के बाद थाना प्रभारी के नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम गठित की गई और वाहन की तलाश शुरू की गई। टंडवा चौक के पास पुलिस ने संदिग्ध वाहन को रोकने का प्रयास किया। चालक पहले वाहन लेकर भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन पुलिस ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। बरामदगी पुलिस की तलाशी में वाहन से बड़ी मात्रा में अवैध लॉटरी टिकट बरामद हुए। 30 बंडल अवैध लॉटरी टिकट प्रत्येक बंडल में 2 पैकेट कुल 60 पैकेट बरामद प्रत्येक पैकेट में 1,500 टिकट कुल 90,000 लॉटरी टिकट जब्त जब्त टिकटों की अनुमानित कीमत 90 लाख रुपये लॉटरी टिकट ले जा रहा एक पिकअप वाहन भी जब्त गिरफ्तार आरोपी पुलिस ने इस मामले में विकास कुमार प्रजापति (27 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। आरोपी हजारीबाग जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के सिलवार गांव का निवासी बताया गया है। पुलिस ने क्या कहा? टंडवा थाना पुलिस के अनुसार आरोपी अवैध लॉटरी टिकटों को हजारीबाग से टंडवा लाकर बेचने की तैयारी में था। आरोपी के खिलाफ टंडवा थाना कांड संख्या 48/26 दर्ज कर लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की आगे जांच जारी है।

मधुबनी में फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क का भंडाफोड़, 62 मूल पासपोर्ट के साथ चार आरोपी गिरफ्तार

News Pratyaksh | Updated : Tue 08th Sep 2026, 12:47 pm
मधुबनी में फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क का भंडाफोड़, 62 मूल पासपोर्ट के साथ चार आरोपी गिरफ्तार मधुबनी: बिहार के मधुबनी जिले में पुलिस ने फर्जी पासपोर्ट और अवैध विदेशी वीजा से जुड़े नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। घोघरडीहा थाना क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में पुलिस ने 62 मूल पासपोर्ट जब्त किए हैं। मामले में गिरोह के चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। रात्रि गश्ती के दौरान पुलिस को हुआ शक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार के अनुसार, अपराध नियंत्रण को लेकर जिले में लगातार वाहन जांच और रात्रि गश्ती अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में घोघरडीहा थाना की पुलिस टीम हनुमान चौक के पास विशेष वाहन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान शत्रुपट्टी की ओर से आ रही एक मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों की नजर पुलिस पर पड़ी। पुलिस को देखते ही दोनों अचानक बाइक घुमाकर भागने लगे। संदेह होने पर पुलिस टीम ने तत्परता से घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोहम्मद इरशाद और रफी अहमद के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद काले रंग के बैग से भारत के अलग-अलग राज्यों और जिलों से जारी 62 मूल पासपोर्ट, पांच खाली रजिस्ट्री लिफाफे और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। विदेश में नौकरी के नाम पर मंगवाते थे पासपोर्ट एसएसपी योगेंद्र कुमार के मुताबिक, पूछताछ के दौरान मोहम्मद इरशाद ने पुलिस को बताया कि उसके पिता मोहम्मद आरजू विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों से पासपोर्ट मंगवाते थे। बताया गया कि ये पासपोर्ट घोघरडीहा क्षेत्र में ग्रामीण डाक सेवक मोहम्मद अदनान हुसैन के पते पर मंगवाए जाते थे। इसके बाद पासपोर्ट को पटना और कानपुर में सक्रिय एजेंटों मयंक और श्रवण तक पहुंचाया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद पासपोर्ट किन लोगों के हैं, इन्हें किस उद्देश्य से एकत्र किया जा रहा था और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या है। मामले में आगे की जांच जारी है।

असम में साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन, करीब 330 आरोपी गिरफ्तार; हैदराबाद-बेंगलुरु तक पहुंची पुलिस की जांच

News Pratyaksh | Updated : Mon 07th Sep 2026, 12:37 pm
असम में साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन, करीब 330 आरोपी गिरफ्तार; हैदराबाद-बेंगलुरु तक पहुंची पुलिस की जांच असम: राज्य में साइबर ठगी और धोखाधड़ी के खिलाफ शनिवार सुबह से चलाए जा रहे विशेष अभियान में पुलिस ने करीब 330 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) हरमीत सिंह ने खुद इस बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन अभी जारी है और गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है। पुलिस बनकर लोगों को धमकाने का आरोप पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए संदिग्धों पर पुलिसकर्मी बनकर लोगों से धोखाधड़ी करने समेत कई तरह के साइबर फ्रॉड में शामिल होने का आरोप है। डीजीपी हरमीत सिंह ने बताया कि आरोपी लोगों को फोन कर खुद को पुलिस अधिकारी बताते थे। इसके बाद उन्हें किसी पुलिस केस को सुलझाने या कार्रवाई से बचाने का झांसा देकर डराया-धमकाया जाता था और उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश की जाती थी। हैदराबाद और बेंगलुरु तक पहुंची जांच डीजीपी ने बताया कि जांच के दौरान कुछ संदिग्धों का सुराग असम के बाहर हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी मिला है। ऐसे संदिग्धों को भी जल्द पुलिस की गिरफ्त में लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि शनिवार सुबह से शुरू हुई कार्रवाई में अब तक करीब 330 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी रहने वाली है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चल रहा विशेष अभियान डीजीपी हरमीत सिंह के अनुसार, साइबर ठगी और धोखाधड़ी के मामलों पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अभियान के दौरान सामने आने वाले अन्य संदिग्धों और गिरोह से जुड़े लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

20 महीने बाद चंचला हत्याकांड में बड़ा खुलासा, भाई ने किया सरेंडर; परिवार के तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में:

News Pratyaksh | Updated : Mon 07th Sep 2026, 12:36 pm
0 महीने बाद चंचला हत्याकांड में बड़ा खुलासा, भाई ने किया सरेंडर; परिवार के तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में: शेखपुरा: चर्चित डाककर्मी चंचला कुमारी हत्याकांड में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मामले में आरोपित मृतका के सगे भाई शुभम कुमार ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। भाई के सरेंडर के साथ ही इस मामले में आरोपित परिवार के तीनों सदस्य पुलिस की कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। इससे एक दिन पहले रविवार को मृतका के पिता बचनदेव चौहान ने पुलिस के सामने सरेंडर किया था। वहीं, चंचला की मां अनीता कुमारी को पुलिस करीब एक सप्ताह पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। आत्महत्या का मामला नहीं, हत्या की जांच में बदली कहानी चंचला कमासी गांव की रहने वाली थी और गया जिले में डाक विभाग में कार्यरत थी। पुलिस के अनुसार, उसने कारे गांव निवासी युवक राहुल से अपनी इच्छा से शादी की थी। बताया जा रहा है कि परिवार इस शादी से नाराज था। करीब 20 महीने पुराने इस मामले की जांच के दौरान पुलिस के सामने ऐसे तथ्य आए, जिनके आधार पर घटना को आत्महत्या के बजाय हत्या का मामला माना गया। शादी से नाराज परिवार ने घर बुलाया, हत्या का आरोप पुलिस के अनुसार, चंचला की शादी परिवार को मंजूर नहीं थी। आरोप है कि शादी को सामाजिक रूप से स्वीकार करने का भरोसा देकर उसे घर बुलाया गया। पुलिस जांच के मुताबिक, 25 नवंबर 2024 को चंचला की हत्या कर दी गई और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। खास बात यह है कि उस समय मृतका के पिता की ओर से ही थाने में आत्महत्या को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। अब जांच आगे बढ़ने के साथ मामले की पूरी तस्वीर बदलती नजर आ रही है। पुलिस परिवार के तीनों आरोपित सदस्यों से पूछताछ कर घटना के पीछे की पूरी सच्चाई और हत्या की वजह का पता लगाने में जुटी है।

क्रेडिट कार्ड बंद होने का झांसा देकर साइबर ठगी, जामताड़ा में एक आरोपी गिरफ्तार

News Pratyaksh | Updated : Sat 05th Sep 2026, 12:37 pm
क्रेडिट कार्ड बंद होने का झांसा देकर साइबर ठगी, जामताड़ा में एक आरोपी गिरफ्तार जामताड़ा: क्रेडिट कार्ड बंद होने और नया कार्ड जारी कराने का झांसा देकर लोगों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को जामताड़ा साइबर थाना की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से चार मोबाइल फोन और पांच सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक शंभु कुमार सिंह को मिली गुप्त सूचना के आधार पर साइबर थाना की टीम ने करमाटांड़ थाना क्षेत्र के भेलवाटांड़ गांव स्थित पोखर के पास छापेमारी की। यहां से पुलिस ने साइबर अपराध के आरोपी महताब अंसारी (27) को गिरफ्तार किया। बांस की झाड़ियों में छिपा था आरोपी पुलिस के मुताबिक, सकलपुर से बरमुण्डी जाने वाले रास्ते में भेलवाटांड़ स्थित पोखर के पास ट्रांसफार्मर पोल के नजदीक बांस की झाड़ियों में एक साइबर अपराधी के छिपे होने की सूचना मिली थी। सूचना के बाद साइबर अपराध थाना प्रभारी राजेश मंडल के नेतृत्व में छापेमारी दल का गठन किया गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और महताब अंसारी को पकड़ लिया। आरोपी करमाटांड़ थाना क्षेत्र के बरमुण्डी गांव निवासी स्वर्गीय मुख्तार अंसारी का पुत्र बताया गया है। APK फाइल डाउनलोड करवाकर हासिल करते थे जानकारी पुलिस की प्रारंभिक जांच में साइबर ठगी के तरीके का भी खुलासा हुआ है। आरोपियों द्वारा लोगों को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का क्रेडिट कार्ड बंद होने और नया कार्ड जारी कराने की बात कहकर फोन किया जाता था। इसके बाद उन्हें झांसे में लेकर मोबाइल में APK फाइल डाउनलोड करवाई जाती थी। पुलिस के अनुसार, इस फाइल के जरिए आरोपियों द्वारा क्रेडिट कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती थी। साइबर ठगी से बचने के लिए रहें सतर्क पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बैंक या क्रेडिट कार्ड बंद होने अथवा नया कार्ड जारी कराने के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल और मैसेज से सावधान रहें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में APK या कोई संदिग्ध एप्लीकेशन डाउनलोड न करें और अपनी बैंकिंग या कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। जामताड़ा साइबर थाना पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

गढ़वा में गलत इंजेक्शन से 17 वर्षीय किशोर की मौत, अवैध दवा दुकान सील

News Pratyaksh | Updated : Thu 27th Aug 2026, 12:28 pm
गढ़वा में गलत इंजेक्शन से 17 वर्षीय किशोर की मौत, अवैध दवा दुकान सील गढ़वा। बरडीहा थाना क्षेत्र के बरडीहा बाजार में एक 17 वर्षीय किशोर की इलाज के दौरान मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। आरोप है कि बिना लाइसेंस संचालित प्रज्ञा ड्रग स्टोर में गलत तरीके से इंजेक्शन लगाए जाने के बाद किशोर की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। मामले की रिपोर्ट रांची मुख्यालय को भी भेजी गई है। घटना के बाद अधिकारियों ने दुकान पर छापेमारी की। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं बरामद होने के साथ मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाला बेड और ग्लूकोज चढ़ाने का स्टैंड भी मिला। प्रशासन ने दुकान को तत्काल सील कर दिया है। ननिहाल आया था किशोर विशुनपुरा गांव निवासी गणेश पाल का 17 वर्षीय पुत्र अनोज कुमार पाल सोमवार को अपनी मां के साथ जीका गांव स्थित ननिहाल आया था। इसी दौरान उसकी तबीयत खराब हुई और उसे बुखार हो गया। इसके बाद उसका मामा दिनेश पाल उसे इलाज के लिए बरडीहा बाजार स्थित प्रज्ञा ड्रग स्टोर ले गया। परिजनों के अनुसार, दुकान संचालक नरेश प्रसाद के पुत्र शशि प्रसाद ने किशोर का इलाज किया। इंजेक्शन लगाने के बाद बिगड़ी हालत मृतक के मामा दिनेश पाल ने आरोप लगाया कि शशि प्रसाद ने अनोज को सीधे नस में इंजेक्शन लगा दिया। परिजनों ने कथित तौर पर इसका विरोध करते हुए इंजेक्शन दूसरी जगह लगाने की बात कही, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद अनोज बेहोश हो गया और उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई। बाद में उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य अधिकारियों की प्रारंभिक आशंका है कि गलत तरीके से इंजेक्शन दिए जाने से उसकी स्थिति गंभीर हुई। हालांकि, मौत की सटीक चिकित्सीय वजह पोस्टमार्टम और आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। छापेमारी में मिली एक्सपायरी दवाएं घटना की जानकारी मिलने के बाद मझिआंव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. गोविंद प्रसाद सेठ और बरडीहा प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। दुकान की तलाशी के दौरान अधिकारियों को बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं मिलीं। इसके अलावा दुकान के अंदर मरीजों के लिए बेड और ग्लूकोज चढ़ाने का स्टैंड भी पाया गया। आरोप है कि दुकान में दवा बिक्री के अलावा मरीजों का इलाज भी किया जा रहा था। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पूरे स्टोर को सील कर दिया है। जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी रिपोर्ट रांची मुख्यालय भेजी गई है। अब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की जांच के आधार पर यह तय होगा कि दुकान का संचालन किन नियमों के उल्लंघन में किया जा रहा था और किशोर की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है। प्रशासन की इस कार्रवाई ने ग्रामीण इलाकों में बिना लाइसेंस दवा दुकान चलाकर इलाज करने वाले लोगों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि बिना प्रशिक्षित चिकित्सकीय निगरानी के इंजेक्शन और दवाओं का इस्तेमाल लोगों की जान के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है