लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को पनाह देने के आरोपी जमालुद्दीन को हजारीबाग कोर्ट ने किया बरी
News Pratyaksh | Updated : Fri 28th Mar 2025, 11:30 am
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को पनाह देने के आरोपी जमालुद्दीन को हजारीबाग कोर्ट ने किया बरी : वर्ष 2002 में आतंकियों को पनाह देने वाले जमालुद्दीन उर्फ नासिर को साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया है. यह आदेश हजारीबाग के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार की अदालत ने दिया है. कोर्ट ने 23 साल चली सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है. बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजीत कुमार ने पैरवी करते हुए अदालत के फैसले की जानकारी दी.नासिर पर सदर थाना क्षेत्र के खिरगांव इलाके में छिपे लस्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों को पनाह देने का आरोप था. पुलिस की चार्जशीट में नासिर पर शहर के खिरगांव इलाके में आतंकियों को किराए का कमरा मुहैया कराने का आरोप था. नासिर फिलहाल 10.08.2015 से कोलकाता के एक जेल में बंद है.कोर्ट के आदेश के बाद परिजनों ने खुशी जाहिर की है. दिल्ली पुलिस और हजारीबाग पुलिस की संयुक्त टीम गठित कर इलाके को घेरने के लिए गुप्त अभियान चलाया गया. पुलिस को देखते ही दोनों आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने लश्कर के दोनों आतंकियों को मार गिराया. मारे गए आतंकियों के नाम मो. इदरीस उर्फ वाजिद उर्फ जाहिद, पुत्र अब्दुल मजीद और सलीम थे.दोनों आतंकियों ने 22 जनवरी 2002 को कोलकाता स्थित अमेरिकन इंफॉर्मेशन सेंटर पर आतंकी हमला किया था. घटना को अंजाम देने के बाद वे हजारीबाग आकर छिप गए थे. इस घटना के बाद तत्कालीन सदर थाना प्रभारी कौशल्यानंद चौधरी के बयान पर सदर थाना कांड संख्या 39/2002 में आईपीसी की धारा 121, 121ए, 186, 353, 307, 120बी और आर्म्स एक्ट की धारा 25बी, 26 और 27 तथा विदेशी अधिनियम की धारा 13 और 14 के तहत मामला दर्ज किया गया था.विवेचना के दौरान आरोपी जमालुद्दीन नासिर उर्फ नासिर का नाम सामने आया. मुकदमे के दौरान विवेचक थाना प्रभारी समेत अभियोजन पक्ष के 12 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज हुए. इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अजीत कुमार पैरवी कर रहे थे. कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया.