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बिहार में नशे के सौदागरों ने तस्करी का अजब-गजब तरीका अपनाया हुआ है. अब ट्रेन या सड़क मार्ग से स्मगलिंग न करके ये अंतराष्ट्रीय स्मगलर हवाई जहाजों के जरिए तस्करी की खेप एक जगह से दूसरी जगह भेज रहे हैं. गया इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इसका खुलासा हुआ है.गया के इंट

News Pratyaksh | Updated : Thu 19th Mar 2026, 11:31 am
बिहार में नशे के सौदागरों ने तस्करी का अजब-गजब तरीका अपनाया हुआ है. अब ट्रेन या सड़क मार्ग से स्मगलिंग न करके ये अंतराष्ट्रीय स्मगलर हवाई जहाजों के जरिए तस्करी की खेप एक जगह से दूसरी जगह भेज रहे हैं. गया इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इसका खुलासा हुआ है.गया के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चार दिनों के भीतर दूसरी बार गांजा की खेप बरामद की गई है जिसमें महिला समेत चार को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करोड़ों रुपए की आंकी जा रही है. फिलहाल जानकारी के अनुसार अनुसंधान में यह भी सामने आया है, कि जिन थैलों से हाइड्रोपोनिक वीड बरामद किया गया है. उन बैगों में विशेष कंपार्टमेंट बनाए गए थे. एक्स-रे स्कैनिंग के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है. जानकारी के अनुसार 16 मार्च को 10 किलो हाइड्रोपोनिक वीड (कीमती मादक पदार्थ गांजा) बरामद किया गया था. अब 18 मार्च को एक बार फिर से 8.5 किलो हाइड्रोपोनिक वीड (गांजा) बरामद किया गया है. इस बार चार को हिरासत में लिया गया है, जिसमें एक महिला भी शामिल है, जो थाईलैंड की बताई जाती है. कस्टम विभाग ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए चार को हिरासत में लिया है.गया एयरपोर्ट से एक बार फिर हाइड्रोपोनिक वीड बरामद किया गया है. बुधवार को हुई कार्रवाई में पटना से पहुंची कस्टम की टीम के द्वारा मादक पदार्थ हाइड्रोपोनिक वीड की जहां बरामदगी की गई है. वहीं, चार को हिरासत में लिया गया है, इससे पहले बीते 16 मार्च को गया एयरपोर्ट से हाइड्रोपोनिक वीड (गांजा) की बरामदगी की गई थी, जो करीब 10 किलोग्राम बताया जाता है, जिसका अनुमानित मूल्य 10 करोड़ रुपए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में है.

10 जून 2022 में रोड दंगा डेली मार्केट कांड संख्या 16 22 में नवाब चिश्ती समेत 8 को रांची सिविल कोर्ट मान्या टंडन की अदालत ने किया आरोप मुक्त सभी बरी किए गए। रांची:10 जून 2022 मेन रोड गोली_कांड मुख्य केस दर्ज डेली मार्केट थाना कांड संख्या 16/22 धारा 120B,

News Pratyaksh | Updated : Fri 13th Mar 2026, 12:45 pm
10 जून 2022 में रोड दंगा डेली मार्केट कांड संख्या 16 22 में नवाब चिश्ती समेत 8 को रांची सिविल कोर्ट मान्या टंडन की अदालत ने किया आरोप मुक्त सभी बरी किए गए। रांची:10 जून 2022 मेन रोड गोली_कांड मुख्य केस दर्ज डेली मार्केट थाना कांड संख्या 16/22 धारा 120B,147,148,149,153A,341,353,259A,504 में आज जज श्रीमती मान्या टंडन की अदालत ने GR1720/2023 संबंधित मामले पर करीब 4 वर्ष तक चले इस मामले पर आज आदेश जारी किया गया जिसमें नवाब चिश्ती,शाहबाज, रमजान, अमजद खान, मो.माज, शकील, इरफ़ान,मो. अमन मंसूरी,एक अन्य जेल में बंद अरमान को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए दोषमुक्त (बरी) किया गया। जज श्रीमती मान्या टंडन की अदालत में सभी दोषमुक्त होने पर वकीलो ने अहम भूमिका निभाई थी जिसमें एडवोकेट प्रियंका, लक्ष्य कुमार संजय कुमार अनन्या शांभवी सीनियर एडवोकेट एस.के. उपाध्याय, सहित अन्य ने केस लड़ा था।

ईरान इस इलाके में पूरी तरह दबदबा बनाने की अमेरिकी-इजराइल और पश्चिमी देशों की चाहत में सबसे बड़ी रुकावट :

News Pratyaksh | Updated : Mon 02nd Mar 2026, 11:44 am
ईरान इस इलाके में पूरी तरह दबदबा बनाने की अमेरिकी-इजराइल और पश्चिमी देशों की चाहत में सबसे बड़ी रुकावट : अमेरिका और इजराइल दोनों ने मिलकर ईरान के खिलाफ बिना किसी उकसावे के जंग और हमला शुरू कर दिया है. इस जंग में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, रक्षा मंत्री और आर्मी चीफ मारे गए. ईरान के खिलाफ इस जंग की शुरूआत में ही यह सबकुछ हो गया. इस युद्ध के दौरान 150 से ज्यादा स्कूली लड़कियों समेत कई लोग मारे गए.अमेरिका और इजराइल का मिला-जुला ऑपरेशन, जिसमें लाखों डॉलर के खतरनाक हथियारों और कामिकेज ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है और ईरानी लीडरशिप को टारगेट कर रहा है, जिसका मकसद राज बदलना है. ईरान ने जवाब में तेल से भरपूर खाड़ी इलाके में अमेरिकी बेस और इजराइल पर बमबारी की है. यह जंग धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है.इसमें लोगों की जानें जा रही हैं. तबाही और बेवजह तबाही इस साम्राज्य के रणनीतिक मकसद और दुनिया पर कब्जा करने की उसकी चाहत को दिखाती है. दुनिया भर के देश सीजफायर और बढ़ते तनाव को खत्म करने की अपील कर रहे हैं.

अहमदाबाद प्लेन क्रैश की भयानक त्रासदी के आठ महीने हो गए और अब एक बार फिर रिश्तेदारों की आंखों में आंसू बहने लगे हैं. एयर इंडिया ने आठ महीने बाद मरने वालों का सामान उनके रिश्तेदारों को लौटा दिया है. यह सामान जब घर पहुंचा तो रिश्तेदार फिर से अपनों को याद कर

News Pratyaksh | Updated : Sat 14th Feb 2026, 12:47 pm
अहमदाबाद प्लेन क्रैश की भयानक त्रासदी के आठ महीने हो गए और अब एक बार फिर रिश्तेदारों की आंखों में आंसू बहने लगे हैं. एयर इंडिया ने आठ महीने बाद मरने वालों का सामान उनके रिश्तेदारों को लौटा दिया है. यह सामान जब घर पहुंचा तो रिश्तेदार फिर से अपनों को याद करके रो पड़े.एयर इंडिया ने धनेरा के थावर गांव के सवदानभाई चौधरी को उनके बेटे और बहू की आधी जली हुई शादी की एल्बम और आधार कार्ड जैसे डॉक्यूमेंट्स लौटा दिए हैं. शादी के बाद नई जिंदगी शुरू करने लंदन जा रहे इस जोड़े की प्लेन क्रैश में मौत हो गई थी. आज भी जब परिवार 12 जून, 2025 का वह डरावना दिन याद करता है तो आंसू बहते हैं और नींद उड़ जाती है.सवदानभाई आठ महीने बाद मिली आधी जली हुई शादी की एल्बम में अपने बेटे कमलेश और बहू धापूबेन की तस्वीरें देखकर उन्हें देखते रहे. उन्होंने कहा, 'उस दिन हम अपने बेटे और बहू को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर छोड़ने गए थे. मेरी बहू कभी विदेश नहीं गई थी, वह पहली बार लंदन जा रही थी. उनकी शादी को सिर्फ छह महीने हुए थे. लंदन में वीजा के नियम बदलने वाले थे, इसलिए मेरा बेटा कमलेश अपनी पत्नी धापू को पहले से ले जाना चाहता था. उसने 12 तारीख का टिकट बुक कर लिया था.'

बिहार के गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड का 71 माइल मोड़ विकास के दावों के बीच कड़वी सच्चाई बयां कर रहा है. इस प्रखंड के 10 से अधिक गांवों में लोगों ने कई पीढ़ियों से पक्की सड़क नहीं देखी है. गया जिला प्रशासन की फाइलों में भले ही ये गांव नक्शे पर हों, लेकिन

News Pratyaksh | Updated : Sat 07th Feb 2026, 01:15 pm
बिहार के गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड का 71 माइल मोड़ विकास के दावों के बीच कड़वी सच्चाई बयां कर रहा है. इस प्रखंड के 10 से अधिक गांवों में लोगों ने कई पीढ़ियों से पक्की सड़क नहीं देखी है. गया जिला प्रशासन की फाइलों में भले ही ये गांव नक्शे पर हों, लेकिन धरातल पर सफर शुरू होते ही राहगीर खुद को बेबस महसूस करता है.दरअसल गया जिला के बाराचट्टी प्रखंड से होकर गुजर रही नेशनल हाईवे 2 पर 71 माइल मोड़ है. यहां से प्रखंड मुख्यालय की लगभग 8 किलोमीटर दूरी है. 71 माइल से ही दुवाट, फुलगुनिया, खैरा, डांग, पिपराही, हरनाही, गुलक टांड़, शिष्या तरी जैसे 10 से अधिक गांवों को जाना होता है. 71 माइल से इन गांवों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है. कच्ची सड़क की स्थिति देख गाड़ी चलाने में भी डर लगता है. इन गांवों में आजादी के 7 दशकों बाद भी एक पक्की सड़क नहीं बन सकी है. 10 से अधिक बड़े गांवों की 20 से 25 हजार की आबादी का एक मात्र सहारा पैदल या घर में खुदकी व्यवस्था के रूप में मोटर साइकिल, ट्रैक्टर का होना ही है. पक्की सड़क नहीं होने के कारण इस सफर में लोग सिर्फ गिर कर घायल ही नहीं होते हैं बल्कि कई की जान भी चली गई है.
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