News Pratyaksh


'मां' बनकर पहुंचीं माया देवी! आरा से रांची तक तय किया सफर, आंदोलनकारी छात्रों को अपने हाथों से पिलाई कॉफी

News Pratyaksh | Updated : Fri 07th Aug 2026, 12:42 pm
'मां' बनकर पहुंचीं माया देवी! आरा से रांची तक तय किया सफर, आंदोलनकारी छात्रों को अपने हाथों से पिलाई कॉफी
64 वर्षीय माया देवी ने सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर छात्रों का बढ़ाया हौसला, बोलीं— "ये बच्चे अपने भविष्य और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।"
रांची: आंदोलन के बीच दिखी ममता की मिसाल
कहते हैं, जब कोई बेटा या बेटी खुद को सबसे अकेला महसूस करता है, तब सबसे पहले मां उसका सहारा बनती है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे आंदोलन के दौरान ऐसा ही एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच बिहार के आरा की 64 वर्षीय माया देवी अचानक पहुंचीं। उनके हाथों में न कोई राजनीतिक झंडा था, न कोई नारा... बल्कि कॉफी से भरे फ्लास्क और कप थे। वह एक-एक छात्र के पास गईं, अपने हाथों से उन्हें कॉफी पिलाई और मां की तरह उनका हौसला बढ़ाया।
टीवी पर देखा संघर्ष, बेचैन हो उठा दिल
माया देवी ने बताया कि जब उन्होंने टीवी और सोशल मीडिया पर छात्रों के संघर्ष की खबरें देखीं, तो उनका मन बेचैन हो गया।
उन्होंने कहा,
"ये बच्चे अपने भविष्य और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। मैं इनके साथ धरने पर तो नहीं बैठ सकती, लेकिन एक मां होने के नाते इनकी सेवा जरूर कर सकती हूं।"
इसी भावना के साथ उन्होंने आरा से रांची तक का सफर तय किया।
"इन बच्चों में अपने बेटे-बेटियां दिखे"
माया देवी ने कहा कि कई दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों को देखकर उन्हें अपने बेटे-बेटियों की याद आ गई।
उन्होंने कहा,
"मां होने के नाते लगा कि मेरा भी कुछ फर्ज है। इसलिए मैं इनके लिए कॉफी लेकर आई हूं, ताकि इन्हें थोड़ी ऊर्जा और हिम्मत मिल सके।"
उन्होंने यह भी बताया कि उनके इस फैसले में परिवार ने पूरा साथ दिया और सेवा के इस कार्य के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया।
सरकार से की न्याय की अपील
माया देवी ने सरकार से मांग की कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा,
"ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए।"
छात्र बोले— "आज मां का प्यार मिल गया"
माया देवी के इस स्नेह से आंदोलनकारी छात्र भी भावुक हो गए। छात्रों ने कहा कि जब दूसरे राज्य से कोई मां केवल उनका हौसला बढ़ाने के लिए पहुंच सकती है, तो यह उनकी लड़ाई के प्रति समाज के भरोसे और समर्थन का सबसे बड़ा प्रमाण है।
आंदोलन के बीच माया देवी की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि हर जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत आम लोगों का विश्वास, संवेदना और अपनापन होता है। आरा से रांची तक का उनका सफर केवल दूरी तय करने का नहीं, बल्कि ममता, उम्मीद और न्याय के प्रति विश्वास का प्रतीक बन गया।