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₹10 और ₹20 के आएंगे प्लास्टिक नोट! सरकार ने दी 200 करोड़ नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी

News Pratyaksh | Updated : Tue 11th Aug 2026, 12:21 pm
₹10 और ₹20 के आएंगे प्लास्टिक नोट! सरकार ने दी 200 करोड़ नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी नई दिल्ली: भारत में नकली नोटों पर लगाम लगाने और करेंसी की उम्र बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने ₹10 और ₹20 के पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुल 200 करोड़ प्लास्टिक नोट छापे जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में इसकी जानकारी दी। प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश के आधार पर भेजा गया था, जिसे RBI Act, 1934 की धारा 25 के तहत मंजूरी दी गई है। ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ नोट होंगे तैयार इस योजना के तहत: ₹10 के 100 करोड़ पॉलीमर नोट ₹20 के 100 करोड़ पॉलीमर नोट छापे जाएंगे। शुरुआत में इन नोटों को फील्ड ट्रायल के तौर पर चुनिंदा शहरों या क्षेत्रों में जारी किए जाने की संभावना है। क्या कागज के नोट बंद हो जाएंगे? नहीं। प्लास्टिक नोटों के आने से मौजूदा कागज के नोट तुरंत बंद नहीं होंगे। सरकार के मुताबिक, पायलट प्रोजेक्ट के दौरान पॉलीमर और मौजूदा कागज के नोट साथ-साथ चलेंगे। क्यों लाए जा रहे हैं प्लास्टिक नोट? पॉलीमर नोटों को लाने का मुख्य उद्देश्य नकली नोटों की समस्या पर लगाम लगाना और नोटों की टिकाऊ उम्र बढ़ाना है। प्लास्टिक आधारित करेंसी सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ मानी जाती है और इसमें सुरक्षा फीचर्स शामिल करना भी आसान हो सकता है। FY27 में शुरू हो सकता है ट्रायल RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू करने का लक्ष्य रख रहा है। अगर ट्रायल सफल रहता है तो FY28 यानी 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को देशभर में बड़े स्तर पर जारी करने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल नोटों की छपाई के लिए जरूरी सामग्री की खरीद प्रक्रि नई दिल्ली: भारत में नकली नोटों पर लगाम लगाने और करेंसी की उम्र बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने ₹10 और ₹20 के पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुल 200 करोड़ प्लास्टिक नोट छापे जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में इसकी जानकारी दी। प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश के आधार पर भेजा गया था, जिसे RBI Act, 1934 की धारा 25 के तहत मंजूरी दी गई है। ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ नोट होंगे तैयार इस योजना के तहत: ₹10 के 100 करोड़ पॉलीमर नोट ₹20 के 100 करोड़ पॉलीमर नोट छापे जाएंगे। शुरुआत में इन नोटों को फील्ड ट्रायल के तौर पर चुनिंदा शहरों या क्षेत्रों में जारी किए जाने की संभावना है। क्या कागज के नोट बंद हो जाएंगे? नहीं। प्लास्टिक नोटों के आने से मौजूदा कागज के नोट तुरंत बंद नहीं होंगे। सरकार के मुताबिक, पायलट प्रोजेक्ट के दौरान पॉलीमर और मौजूदा कागज के नोट साथ-साथ चलेंगे। क्यों लाए जा रहे हैं प्लास्टिक नोट? पॉलीमर नोटों को लाने का मुख्य उद्देश्य नकली नोटों की समस्या पर लगाम लगाना और नोटों की टिकाऊ उम्र बढ़ाना है। प्लास्टिक आधारित करेंसी सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ मानी जाती है और इसमें सुरक्षा फीचर्स शामिल करना भी आसान हो सकता है। FY27 में शुरू हो सकता है ट्रायल RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू करने का लक्ष्य रख रहा है। अगर ट्रायल सफल रहता है तो FY28 यानी 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को देशभर में बड़े स्तर पर जारी करने पर विचार किया जा सकता है।

नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के विरोध में सोमवार को देशभर से 100 से अधिक संत-महंत और महामंडलेश्वर दिल्ली में एकत्रित हुए। संतों ने बाराखंबा रोड स्थित नेपाली दूतावास के पास प्रदर्शन करते हुए मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्र

News Pratyaksh | Updated : Mon 10th Aug 2026, 12:35 pm
नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के विरोध में सोमवार को देशभर से 100 से अधिक संत-महंत और महामंडलेश्वर दिल्ली में एकत्रित हुए। संतों ने बाराखंबा रोड स्थित नेपाली दूतावास के पास प्रदर्शन करते हुए मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन में शामिल संतों ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने के लिए जुटे हैं। इंद्रप्रस्थ पीठ के संत जगद्गुरु स्वामी रामानुजाचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री से मांग है कि ट्रस्ट से जुड़े जो भी लोग इस मामले में संलिप्त पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और दोषियों को जेल भेजा जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना से संत समाज की छवि प्रभावित हो रही है और सनातन धर्म को नुकसान पहुंच रहा है। संतों ने मांग की कि मामले में किसी भी दोषी को बख्शा न जाए और किसी को बचाने का प्रयास भी न किया जाए।

जापान की F-2 फाइटर जेट की तैनाती की योजना :

News Pratyaksh | Updated : Sat 08th Aug 2026, 12:41 pm
जापान की F-2 फाइटर जेट की तैनाती की योजना : नई दिल्ली: भारत और जापान के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी के बीच जापान की एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (ASDF) के F-2 लड़ाकू विमानों को पहली बार भारत में तैनात किए जाने की योजना की खबर सामने आई है। जापानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देश भारत में एक संयुक्त सैन्य अभ्यास के दौरान F-2 फाइटर जेट्स की तैनाती पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट में जापानी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इस प्रस्तावित तैनाती का एक उद्देश्य चीन की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना भी है। हालांकि, यह फिलहाल एक प्रस्तावित योजना है और इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। अगस्त में हो सकती है अहम चर्चा रिपोर्ट के अनुसार, जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी की अगस्त के मध्य में प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। भारत और जापान इससे पहले 2023 में जापान में लड़ाकू विमानों से जुड़ा अपना पहला संयुक्त अभ्यास कर चुके हैं। भारत में जापानी कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की संभावित तैनाती को दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का अहम संकेत माना जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच ऑपरेशनल सहयोग, रक्षा औद्योगिक साझेदारी और सैन्य तालमेल को और मजबूती मिल सकती है। चीन ने दी तीखी प्रतिक्रिया जापानी F-2 फाइटर जेट्स को भारत भेजे जाने की खबर पर चीन की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। चीनी सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में शंघाई इंस्टीट्यूट्स फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के विशेषज्ञ लियू जोंगयी के हवाले से कहा गया कि जापान अपनी रक्षा क्षमता और हथियार निर्यात को बढ़ाना चाहता है, जबकि भारत अपनी सैन्य क्षमता के आधुनिकीकरण और वैश्विक रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने के लिए जापानी तकनीक में रुचि रखता है। भारत-जापान रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत पिछले एक दशक में भारत और जापान के रिश्ते रणनीतिक स्तर पर काफी मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने 2014 में अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी तक बढ़ाया था। इसके बाद 2020 में दोनों देशों के बीच Acquisition and Cross-Servicing Agreement (ACSA) हुआ। दोनों देश 2+2 विदेश और रक्षा मंत्रिस्तरीय वार्ता भी करते हैं। ऐसे में भारत में जापानी लड़ाकू विमानों की संभावित तैनाती को दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास और सैन्य सहयोग के एक नए चरण के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, F-2 विमानों की भारत में तैनाती को लेकर अभी अंतिम आधिकारिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है। यदि योजना आगे बढ़ती है, तो यह भारत-जापान रक्षा संबंधों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो सकता है

Bajaj ने लॉन्च की नई Pulsar N160 S और N160 SS, दमदार 165cc इंजन के साथ 4.5 सेकंड में 60 km/h की रफ्तार

News Pratyaksh | Updated : Fri 07th Aug 2026, 12:44 pm
Bajaj ने लॉन्च की नई Pulsar N160 S और N160 SS, दमदार 165cc इंजन के साथ 4.5 सेकंड में 60 km/h की रफ्तार नई Pulsar N160 रेंज में मिलेगा इलेक्ट्रॉनिक थ्रॉटल, मल्टीपल राइड मोड्स और क्रॉल टेक्नोलॉजी; शुरुआती कीमत ₹1.33 लाख। ऑटो डेस्क: स्वदेशी दोपहिया वाहन निर्माता Bajaj Auto ने भारतीय बाजार में अपनी नई Pulsar N160 S और Pulsar N160 SS को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इनकी एक्स-शोरूम कीमत क्रमशः ₹1,33,511 और ₹1,42,585 तय की है। इसके साथ ही मौजूदा Pulsar N160 मॉडल भी नए वेरिएंट्स के साथ बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा। नई Pulsar N160 रेंज में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक थ्रॉटल (ETB), मल्टीपल राइड मोड्स, क्रॉल टेक्नोलॉजी और नया 165cc, फोर-वॉल्व इंजन दिया गया है, जिससे बाइक का प्रदर्शन पहले से अधिक बेहतर हो गया है। कंपनी के मुताबिक, नया 165cc इंजन 18.2 bhp की पावर जनरेट करता है, जो मौजूदा मॉडल की तुलना में ज्यादा दमदार है। Bajaj का दावा है कि नई Pulsar N160 S और N160 SS महज 4.5 सेकंड में 0 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकती हैं। इसी के साथ कंपनी ने इन्हें अपने सेगमेंट की सबसे तेज और सबसे पावरफुल मोटरसाइकिलों में शामिल होने का दावा किया है। नई Pulsar N160 रेंज उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर पेश की गई है, जो स्पोर्टी लुक के साथ बेहतर परफॉर्मेंस और आधुनिक टेक्नोलॉजी वाली बाइक की तलाश में हैं।

सेंट लुइस में प्रज्ञानानंदा का जलवा: रैपिड वर्ग में टॉप पर, GCT फाइनल की उम्मीदें बरकरार

News Pratyaksh | Updated : Wed 05th Aug 2026, 11:49 am
सेंट लुइस में प्रज्ञानानंदा का जलवा: रैपिड वर्ग में टॉप पर, GCT फाइनल की उम्मीदें बरकरार सेंट लुइस: भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने सेंट लुइस रैपिड एवं ब्लिट्ज शतरंज प्रतियोगिता के रैपिड वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए 18 में से 12 अंक हासिल कर शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया है। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने वर्ष के अंत में होने वाले ग्रैंड शतरंज टूर (GCT) फाइनल में जगह बनाने की अपनी उम्मीदों को भी मजबूत किया है। विश्व चैम्पियनशिप 2026 की दौड़ से बाहर हो चुके प्रज्ञानानंदा ने नौ दौर के रैपिड मुकाबलों में बेहतरीन रणनीति, सटीक चालों और शानदार खेल का प्रदर्शन किया। हालांकि, उन्हें नौवें और अंतिम दौर में नीदरलैंड के ग्रैंडमास्टर जॉर्डन वान फोरेस्ट के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद वह एक अंक की बढ़त के साथ शीर्ष पर बने रहे। प्रज्ञानानंदा ने उजबेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव को पीछे छोड़ा, जिन्होंने रैपिड वर्ग में 11 अंक हासिल किए। सिंदारोव इस वर्ष विश्व चैम्पियनशिप मुकाबले में डी. गुकेश को चुनौती देने वाले हैं। प्रतियोगिता का अंतिम परिणाम केवल रैपिड वर्ग से तय नहीं होगा। अब खिलाड़ियों को 18 ब्लिट्ज मुकाबले खेलने हैं, जिसके बाद कुल अंकों के आधार पर विजेता का फैसला होगा। प्रतियोगिता की कुल पुरस्कार राशि 2 लाख अमेरिकी डॉलर है, जिसमें विजेता को 50 हजार अमेरिकी डॉलर दिए जाएंगे। रैपिड वर्ग में प्रज्ञानानंदा ने चार जीत, चार ड्रॉ और एक हार के साथ कुल 12 अंक जुटाए। अब उनकी नजर ब्लिट्ज मुकाबलों में भी शानदार प्रदर्शन कर खिताब अपने नाम करने पर होगी।

SAARC को फिर से जिंदा करने की मांग तेज: बांग्लादेश और मालदीव की पहल पर भारत ने दिया स्पष्ट संदेश

News Pratyaksh | Updated : Thu 30th Jul 2026, 12:07 pm
SAARC को फिर से जिंदा करने की मांग तेज: बांग्लादेश और मालदीव की पहल पर भारत ने दिया स्पष्ट संदेश दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन सार्क (SAARC) को दोबारा सक्रिय करने की बांग्लादेश और मालदीव की मांग ने एक बार फिर इस क्षेत्रीय संगठन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में सार्क के पुनर्जीवित होने की राह अब भी आसान नहीं मानी जा रही है। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत हमेशा मजबूत क्षेत्रीय सहयोग का समर्थक रहा है। हालांकि, उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि दक्षिण एशिया में सभी जानते हैं कि कौन-सा देश और उसकी कौन-सी गतिविधियां सार्क की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि "सहयोग के लिए सद्भावना आवश्यक होती है।" 2016 के बाद नहीं हुई कोई SAARC शिखर बैठक साल 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद इस्लामाबाद में प्रस्तावित सार्क शिखर सम्मेलन रद्द कर दिया गया था। भारत के साथ कई सदस्य देशों ने भी सम्मेलन का बहिष्कार किया था। इसके बाद से अब तक सार्क की कोई शिखर बैठक आयोजित नहीं हुई है। मालदीव और बांग्लादेश की नई पहल हाल के दिनों में मालदीव और बांग्लादेश दोनों ने अलग-अलग मंचों से सार्क को फिर से सक्रिय करने की वकालत की है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अपने देश के स्वतंत्रता दिवस समारोह में सार्क को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए सभी सदस्य देशों से मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मालदीव इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। वहीं, बांग्लादेश ने भी इस वर्ष फरवरी में सार्क प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। इसके अलावा, नई दिल्ली में आयोजित बिम्सटेक (BIMSTEC) की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक के दौरान भी ढाका ने एक बार फिर सार्क को सक्रिय करने की मांग उठाई। क्यों अहम है SAARC? सार्क की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को ढाका में हुई थी और इसका सचिवालय काठमांडू में स्थित है। वर्तमान में इसके सदस्य भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान हैं। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार, आर्थिक सहयोग, कृषि, ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा, विज्ञान, पर्यटन, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि, भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण सार्क की गतिविधियां लगभग ठप पड़ी हुई हैं।