Politics


अनंत सिंह के सरेंडर के बाद DGP आलोक राज का ऐलान :

News Pratyaksh | Updated : Sat 25th Jan 2025, 11:16 am
अनंत सिंह के सरेंडर के बाद DGP आलोक राज का ऐलान :बिहार पुलिस के डीजीपी आलोक राज ने प्रदेश में कानून व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए बिहार पुलिस की रणनीतियों के बारे में मीडिया से जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि बिहार में कानून का राज कायम करने के लिए पुलिस पूरी तरह से सक्रिय है और कानून के उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। कानून का राज स्थापित करने के लिए जो भी कार्रवाइयां हैं, उन सभी को हम प्रभावी ढंग से लागू कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कानून का पालन हो और जो कानून का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी और व्यापक कार्रवाई की जाएगी। हम लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि कोई भी कानून से ऊपर न हो, चाहे वह पुलिस अधिकारी हो या कोई सरकारी कर्मचारी। हाल में आपने देखा होगा कि जब पुलिस अधिकारियों द्वारा कोई गलती या अपराध हुआ, तो उन्हें उसी तरह से सजा दी गई, जैसे किसी आम अपराधी को दी जाती है।उन्होंने कहा कि जैसे कि मक्केर थाना अध्यक्ष, बग्घा में डीएसपी या उत्पाद थाने के इंस्पेक्टर के मामले में कार्रवाई की गई है और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। ऐसे मामलों में हम कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे अनुसंधान में जो लंबित मामले हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से हल किया जा रहा है। हमारे सभी वरिष्ठ अधिकारी, जैसे कि डीआईजी, एसपी, सिटी एसपी, डीएसपी सभी अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।उन्होंने आगे कहा कि अपराधियों द्वारा अर्जित संपत्तियों को जब्त करने के लिए हमने विशेष एसओपी तैयार किया है। सभी थाना क्षेत्रों को निर्देशित किया है कि वे अपराध से अर्जित संपत्तियों को चिन्हित करें और जब्त करें। इसके साथ ही, ट्रिपल 'सी' क्राइम, कम्युनलिज्म और करप्शन जैसे मुद्दों पर सरकार का स्पष्ट रुख है और हम भ्रष्टाचार के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करेंगे। आपने देखा कि कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है और हम इसी तरह से भ्रष्टाचार पर प्रहार करेंगे। अपराधियों द्वारा अर्जित संपत्तियों को अटैच करने का भी प्रयास किया जाएगा।

झारखंड के मंत्री ने आंदोलनकारियों को किया सम्मानित, बोले- आपके बलिदान और संघर्ष का परिणाम है राज्य का गठन :

News Pratyaksh | Updated : Sat 25th Jan 2025, 11:15 am
झारखंड के मंत्री ने आंदोलनकारियों को किया सम्मानित, बोले- आपके बलिदान और संघर्ष का परिणाम है राज्य का गठन :पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में कोल्हान विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया. इस समारोह में झारखंड आंदोलन में अपना अमूल्य योगदान देने वाले 181 आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखंड सरकार के राजस्व मंत्री दीपक बिरुवा ने की. इस समारोह में सिंहभूम प्रमंडल के आयुक्त हरि कुमार केसरी, कोल्हान पुलिस उपमहानिरीक्षक मनोज रतन चौथे, जिला दंडाधिकारी कुलदीप चौधरी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. सभी अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया.मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा कि आज झारखंड आंदोलन में अपना बलिदान देने वाले आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया. उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण आप सभी के बलिदान और संघर्ष का परिणाम है. राज्य सरकार आंदोलनकारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्री दीकर बिरुआ ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव प्रयास करेगी.वहीं, उपायुक्त कुलदीप चौधरी ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों ने राज्य के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है. उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा. समारोह में उपस्थित सभी आंदोलनकारियों को अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. साथ ही राष्ट्रीय मतदाता दिवस के मौके पर सभी ने मतदान करने की शपथ ली.

45,000 किसानों की जमीन हिंद महासागर में दिख रही :

News Pratyaksh | Updated : Sat 25th Jan 2025, 07:20 am
45,000 किसानों की जमीन हिंद महासागर में दिख रही : बिहार के भोजपुर जिले में चल रहे डिजिटल क्रॉप सर्वे में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इस सर्वे में हजारों किसानों की जमीन हिंद महासागर में दिख रही है। यह सुनकर किसान हैरान और परेशान हैं। बता दें कि भोजपुर बिहार में स्थित है, हिंद महासागर से लगभग 1200 किलोमीटर दूर है। फिर भी सर्वे में जिले के 14 प्रखंडों के 45,000 प्लॉट हिंद महासागर में दिखाई दे रहे हैं।बताया जा रहा है कि यह गड़बड़ी अक्षांश और देशांतर में हुई तकनीकी खराबी के कारण हुई है। जिला भूमि संरक्षण विभाग प्लॉट के डिजिटल सर्वे के डेटा को विभागीय साइट पर अपलोड कर रहा है। लेकिन जिन प्लॉटों के अक्षांश और देशांतर में गड़बड़ी है, उन्हें अपलोड नहीं किया जा सका। जिस स्थान पर, जिस मौजा और खेसरा का कागजों में उल्लेख है, वह उस जगह पर नहीं दिख रहा है। बल्कि वह सीधे हिंद महासागर में दिख रहा है।बता दें कि यह डिजिटल क्रॉप सर्वे 20 दिसंबर से चल रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की जमीन के बारे में वैज्ञानिक डेटा इकट्ठा करना है। इसके जरिए जरूरतमंद किसानों को सरकारी योजनाओं का सही लाभ दिया जा सकेगा। कृषि विभाग को 31 जनवरी तक 10 लाख प्लॉट का डिजिटल सर्वे पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। एक प्लॉट के सर्वे के लिए पांच रुपये का बोनस दिया जा रहा है।बता दें कि 24 जनवरी तक 95000 प्लॉट का डिजिटल सर्वे हो चुका है। इनमें से 45,000 प्लॉट में अक्षांश और देशांतर की गड़बड़ी पाई गई है। ये वो प्लॉट हैं जिन्हें राजस्व विभाग ने सर्वे के बाद ऑनलाइन किया है। कृषि विभाग यह सर्वे कर रहा है कि किस प्लॉट में रबी या खरीफ की फसल हो रही है। यह जानकारी अक्षांश और देशांतर के अनुसार इकट्ठी की जा रही है।

कौन थे JDU के पूर्व विधायक डॉ प्रमोद सिंह, निधन से राजनीतिक गलियारे में छाई शोक की लहर -       

News Pratyaksh | Updated : Wed 22nd Jan 2025, 11:26 am
                                                    कैमूर: जेडीयू के भभुआ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक डॉ प्रमोद सिंह का निधन हो गया है. हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया है. इस बात से जिले के लोगों और जनप्रतिनिधियों में शोक की लहर है. बता दें कि प्रमोद सिंह भभुआ थाना क्षेत्र के अखलासपुर गांव के निवासी थे, जिन्होंने अपने समय के विधायक कार्यकाल में कम समय में बहुत काम करके दिखाया था. उनके कामों को लोग कभी भूल नहीं पाएंगे.इन्हीं का कार्यकाल में भभुआ शहर को ग्रीन सिटी का नाम मिला था. बताया जाता है कि जनता दल यूनाइटेड के पूर्व भभुआ विधायक डॉ प्रमोद सिंह का कुछ दिनों से तबीयत खराब चल रही थी. इसी बीच आज उनकी असमय मृत्यु हो गयी, जिसकी सूचना मिलते ही महागठबंधन के कार्यकर्ताओं की उनके अंतिम दर्शन के लिए भीड़ उमड़ पड़ी. सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर ईश्वर से उनके आत्मा की शांति के लिए कामना की. वहीं सूचना पर पहुंचे जिला परिषद सदस्य विकास सिंह उर्फ लल्लू पटेल ने दुख व्यक्त करते हुए बताया कि डॉ प्रमोद सिंह बहुत ही संघर्षशील और जुझारू नेता थे. ये तीन बार के पूर्व विधायक रह चुके थे. प्रमोद सिंह का ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत बड़ा योगदान रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर शोक संवेदना प्रकट की है. जेडीयू ने ऑफिशियल सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि भभुआ के पूर्व विधायक प्रमोद कुमार सिंह जी के आकस्मिक निधन पर माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने अपनी संवेदना व्यक्त की है. उन्होंने शोकाकुल परिजनों से दूरभाष पर बात कर सांत्वना दी है. निश्चित रूप से उनका जाना राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति है. जद (यू) परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि.डॉ. प्रमोद सिंह लगभग 64 वर्ष के थे. भभुआ विधानसभा क्षेत्र से 3 बार चुनाव जीतकर विधायक बने. जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के जिलाध्यक्ष भी रहे. इसके अलावा वे दो बार राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर और एक बार लोक जनशक्ति पार्टी ( एलजेपी ) के टिकट पर विधायक बने.डॉ. प्रमोद सिंह लगभग 64 वर्ष के थे. भभुआ विधानसभा क्षेत्र से 3 बार चुनाव जीतकर विधायक बने. जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के जिलाध्यक्ष भी रहे. इसके अलावा वे दो बार राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर और एक बार लोक जनशक्ति पार्टी ( एलजेपी ) के टिकट पर विधायक बने.

ओम बिरला ने सदन के अंदर घट रही बैठकों की संख्या पर चिंता जताते हुए इस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता जतायी :

News Pratyaksh | Updated : Tue 21st Jan 2025, 10:46 am
ओम बिरला ने सदन के अंदर घट रही बैठकों की संख्या पर चिंता जताते हुए इस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता जतायी :करीब 43 साल बाद बिहार एक बार फिर देशभर के पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का सोमवार को गवाह बना. लोकसभा के अध्यक्ष और राज्य सभा के उप सभापति साथ देश भर के विधानसभा अध्यक्षों की मौजूदगी में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के अंदर घट रही बैठकों की संख्या पर चिंता जताते हुए इस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता जतायी है. इसके साथ ही उन्होंने सदन के अंदर शब्दों की शुचिता व सदन की मर्यादा बनाये रखने के लिए राजनीतिक दलों को अपनी आदर्श आचार संहिता बनाने की सलाह दी है. लोकसभा अध्यक्ष सोमवार को बिहार विधानसभा के सेंट्रल हॉल में 85वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे. पीठासीन सम्मेलन के 104 साल के इतिहास में बिहार तीसरी बार इस दो दिवसीय आयोजन की मेजबानी कर रहा है.ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन पदाधिकारी के तौर पर सभी राजनीतिक दलों के लोग शामिल हैं. पिछली बैठकों में हमने सदन में व्यवधान कम करने, वेल में आने, गरिमा-शुचिता बढ़ाने, माननीयों के अभिभाषण के दौरान गरिमा बरकरार रखने सहित कई मुद्दों पर गंभीर चर्चा की थी. इसके समाधान को लेकर आवश्यक है कि सभी दलों के अंदर आचार संहिता बनायी जाये. जनप्रतिनिधि जितना मर्यादापूर्ण आचरण करेंगे, उतनी सदन की गरिमा भी बढ़ेगी. उम्मीद है कि बिहार के इस ज्ञान की धरती से हम लोग इसका समाधान लेकर जायेंगे.उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ने संसदीय समितियों की भूमिका बढ़ाये जाने की भी वकालत की. उन्होंने सभी विधानसभा अध्यक्षों से आग्रह किया कि वे अपने सदन की समितियों की भूमिका को और बेहतर करें. उनकी भूमिका जितनी बढ़ेगी, शासन में उतनी ही जवाबदेही आयेगी और जनता के धन का सदुपयोग और निगरानी हो सकेगी. उन्होंने कहा कि 1993-1994 की बैठक में भी इससे संबंधित विचार आया था. गंभीर प्रयास हुए तो इसके परिणाम भी दिखेंगे.समारोह में राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, उप सभापति डॉ रामवचन राय और विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव सहित देश के विभिन्न राज्यों से आये विधानसभा अध्यक्ष व सभापति उपस्थित रहे. इस मौके पर एमएन काॅल और एसएल शंकधर द्वारा लिखित पुस्तक ”संसदीय पद्धति और प्रक्रिया का पांचवां चरण” का लोकार्पण लोकसभा अध्यक्ष ने किया. दो दिवसीय 85वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी के पहले दिन उद्घाटन सत्र के बाद पुराने विधानसभा भवन में संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर ” संवैधानिक मूल्यों को सशक्त बनाये रखने में संसद एवं राज्य विधानमंडलों का योगदान ” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया. परिचर्चा में विभिन्न राज्यों की छह महिला समेत 54 पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया.

मंईयां सम्मान योजना के फर्जी लाभार्थियों के खिलाफ होगी कार्रवाई :

News Pratyaksh | Updated : Tue 21st Jan 2025, 10:44 am
मंईयां सम्मान योजना के फर्जी लाभार्थियों के खिलाफ होगी कार्रवाई :झारखंड की हेमंत सरकार मंईयां सम्मान योजना तहत राज्य की लाभुक महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये दिए जाते हैं. बता दें कि इस योजना की शुरूआत 2024 के अगस्त महीने में की गई थी. हालांकि तब इस योजना के तहत के पात्र महिलाओं को एक हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे, जबकि अब इस बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया गया है. कहा जाता है कि हेमंत सोरेन की सत्ता में वापसी के पीछे मंईयां सम्मान योजना का काफी योगदान रहा है. इस योजना को लेकर महिलाओं ने हेमंत सोरेन के पक्ष जबरदस्त वोटिंग की. नतीजा यह निकला की झारखंड में फिर से हेमंत सोरेन की सरकार बन गई. ऐसे में इस योजना को हेमंत सोरेन महत्वाकांक्षी योजना भी कहा जाता है.बता दें कि इस योजना के तहत सरकार काफी खर्च कर रही है. ऐसे में संबंधित विभाग फर्जीवाड़े पर नजर बनाए हुए है. अगर इस योजना का फर्जी तरीके से कोई लाभ उठाएगा, तो विभाग द्वारा उस पर एक्शन की तैयारी है. इसको लेकर सख्त निर्देश भी जारी किए गए हैं.बता दें कि फर्जी तरीके से मंईयां सम्मान योजना का लाभ लेने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन सख्त कार्रवाई की तैयारी में है. इसको लेकर बकायदा जिले के डीसी ने चेतावनी दी है. कहा गया है कि जो मानक के अंतर्गत नहीं आते है, उनके खिलाफ सख्त करवाई होगी. इसके साथ ही रांची के डीसी मंजूनाथ भजन्त्री ने आम लोगों से अनुरोध भी किया है कि अगर वो मानक के तहत नहीं आते हैं, तो खुद लाभ लेना छोड़ दें.