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झारखंड कांग्रेस को बड़ा झटका: पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक का निधन,

News Pratyaksh | Updated : Tue 14th Jul 2026, 12:07 pm
झारखंड कांग्रेस को बड़ा झटका: पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक का निधन, 83 साल की उम्र में ली अंतिम सांस : झारखंड की राजनीति और कोयलांचल के श्रमिक आंदोलन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मन्नान मल्लिक का मंगलवार सुबह रांची के पल्स अस्पताल में निधन हो गया। उन्होंने 83 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही धनबाद समेत पूरे झारखंड में शोक की लहर फैल गई। कांग्रेस नेताओं, श्रमिक संगठनों और उनके समर्थकों ने इसे सार्वजनिक जीवन के लिए बड़ी क्षति बताया है। मन्नान मल्लिक का राजनीतिक सफर संगठन से शुरू होकर विधानसभा और मंत्री पद तक पहुंचा। वर्ष 2009 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर धनबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। इसके बाद हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें मंत्री बनने का मौका मिला। मंत्री रहते हुए उन्होंने जनहित और विकास से जुड़े कई मुद्दों पर काम किया। राजनीति में आने से पहले मन्नान मल्लिक लंबे समय तक धनबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने में सक्रिय रहे। उन्होंने कोयलांचल क्षेत्र में श्रमिक हितों और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी आवाज बुलंद की। इससे पहले वे तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के निजी सचिव के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके थे। उनके निधन से झारखंड कांग्रेस और धनबाद की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है। #MannanMallik #JharkhandCongress #JharkhandNews #Dhanbad #Congress #BreakingNews #PoliticalNews #HemantSoren #Ranchi #Tribute #IndiaNews #LatestNews #HindiNews #NewsUpdate #NewsPratyaksh

जंतर-मंतर पर आंदोलन का 22वां दिन, सोनम वांगचुक का अनशन 14वें दिन में पहुंचा

News Pratyaksh | Updated : Sat 11th Jul 2026, 06:52 am
जंतर-मंतर पर आंदोलन का 22वां दिन, सोनम वांगचुक का अनशन 14वें दिन में पहुंचा परीक्षा सुधार और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन जारी, देशवासियों से सांकेतिक अनशन में शामिल होने की अपील राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना शनिवार को 22वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk का अनिश्चितकालीन अनशन भी 14वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस दौरान उन्होंने देशवासियों से आंदोलन को केवल सोशल मीडिया तक सीमित न रखने और लोकतांत्रिक तरीके से इसमें भागीदारी निभाने की अपील की। वहीं, पंजाबी गायक Kaka भी जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन के समर्थन में शामिल हुए। सोनम वांगचुक ने देशभर के लोगों से रविवार को एक दिन का सांकेतिक अनशन रखने की अपील की है।

रांची: तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में अमोनिया गैस रिसाव की घटना के बाद प्रभावित झारखंड के 42 प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित कर दी गई है।

News Pratyaksh | Updated : Wed 01st Jul 2026, 12:54 pm
रांची: तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में अमोनिया गैस रिसाव की घटना के बाद प्रभावित झारखंड के 42 प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित कर दी गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर श्रम विभाग और राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष की तत्पर कार्रवाई के बाद सभी श्रमिकों को ट्रेन के जरिए झारखंड रवाना कर दिया गया है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अनुसार, सभी श्रमिक जल्द ही अपने गृह जिलों तक सुरक्षित पहुंच जाएंगे। दरअसल, 21 जून 2026 को तिरुवल्लूर स्थित सेंट पीटर्स एंड पॉल्स सीफूड्स एक्सपोर्ट्स फैसिलिटी में अमोनिया गैस रिसाव की गंभीर घटना हुई थी। इस औद्योगिक हादसे में वहां कार्यरत कई श्रमिक प्रभावित हुए थे, जिनमें झारखंड के श्रमिक भी शामिल थे। घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तत्काल अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए। उन्होंने राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष और संबंधित विभागों को प्रभावित श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखने और सुरक्षित वापसी के लिए हरसंभव व्यवस्था करने का आदेश दिया। राज्य सरकार की त्वरित पहल और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के चलते सभी 42 प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षित वापसी की व्यवस्था पूरी कर ली गई। सरकार ने दोहराया कि राज्य के प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं और किसी भी संकट की स्थिति में सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

पीएम मोदी ने इस दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिखा :

News Pratyaksh | Updated : Sat 27th Jun 2026, 11:59 am
पीएम मोदी ने इस दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिखा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार को दो दिवसीया विक्टोरिया और सेशेल्स के विदेशी दौरे पर रवाना हुए. जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी वहां देश के नेशनल डे के गोल्डन जुबली समारोह में गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर हिस्सा लेंगे. बता दें, प्रधानमंत्री का 27 जून से 29 जून तक की यह विदेश यात्रा सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर हो रहा है और इसका मकसद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही पार्टनरशिप को और मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि यह दौरा दोनों देशों को अपनी पुरानी पार्टनरशिप को और गहरा करने और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और खुशहाली को बढ़ावा देते हुए अपने लोगों की तरक्की को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का मौका देगा.इससे पहले पीएम मोदी ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि सेशेल्स के लिए निकल रहा हूं, जहां मैं उनके नेशनल डे समारोह में हिस्सा लूंगा. इस साल, यह और भी खास है क्योंकि यह गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन है. उन्होंने आगे लिखा कि सेशेल्स एक कीमती समुद्री पड़ोसी है और हमारे विजन महासागर (MAHASAGAR) में एक अहम पार्टनर है. इसके साथ ही ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने में भी सहायक है. मैं अपने दोस्त, सेशेल्स रिपब्लिक के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ बातचीत का इंतजार कर रहा हूं. मुझे इस विजिट के दौरान सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने का सम्मान मिला है. मैं वहां भारतीय समुदाय से मिलने को भी उत्सुक हूं.

तेज प्रताप यादव के घर चोरी की घटना हुई है.

News Pratyaksh | Updated : Tue 23rd Jun 2026, 12:41 pm
तेज प्रताप यादव के घर चोरी की घटना हुई है. पीए मोतीलाल पर 20 लाख कैश, 2 तोला सोना, लैपटॉप, आईफोन गायब : बिहार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव के सरकारी आवास पर लाखों रुपये की चोरी का मामला प्रकाश में आया है. घटना सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल काफी तेज हो गई है.राजधानी पटना के 42 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास से नकदी, सोने के जेवरात और कई महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई गई है. मामले को लेकर तेज प्रताप यादव ने अपने ही करीबी सहयोगी मोतीलाल राय पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उसको लेकर नेता ने सचिवालय थाना में आवेदन दिया.

झारखंड राज्यसभा चुनाव: क्या कांग्रेस राजद और वाम दलों को बना रही है बलि का बकरा?

News Pratyaksh | Updated : Fri 19th Jun 2026, 01:21 pm
झारखंड राज्यसभा चुनाव: क्या कांग्रेस राजद और वाम दलों को बना रही है बलि का बकरा? झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद महागठबंधन के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार और निर्दलीय समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्रॉस वोटिंग किसने की और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के प्रणव झा और परिमल नाथवानी के बीच 8 वोटों का अंतर रहा। साथ ही खबरें यह भी हैं कि नाथवानी के पक्ष में पड़े दो वोट निरस्त हो गए, जबकि प्रणव झा के खाते का एक वोट रद्द हुआ। यदि इन आंकड़ों को आधार माना जाए तो कम से कम 9 विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग या अपेक्षित समर्थन न मिलने की संभावना बनती है। कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने सार्वजनिक रूप से राजद और वाम दलों पर सवाल उठाए हैं। लेकिन यदि महागठबंधन के अंकगणित को देखें तो राजद के 4 और वाम दलों के 2 विधायक मिलाकर कुल 6 वोट ही होते हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस का दावा सही भी मान लिया जाए, तब भी 3 वोटों का रहस्य बरकरार रहता है। सवाल उठता है कि वे अतिरिक्त वोट आखिर कहां से आए? यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग कांग्रेस की रणनीति पर भी सवाल उठा रहा है। क्या वास्तव में राजद और वाम दलों ने धोखा दिया, या फिर कांग्रेस अपनी आंतरिक कमजोरी और संभावित क्रॉस वोटिंग की जिम्मेदारी सहयोगी दलों पर डाल रही है? इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक और राजनीतिक समीकरण की चर्चा जोरों पर है। झारखंड में लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो, कांग्रेस के बिना भी सत्ता का गणित साध सकती है। झामुमो के 34 विधायक, राजद के 4, वाम दलों के 2, सरयू राय और जयराम महतो जैसे निर्दलीय समर्थन को जोड़ दिया जाए तो संख्या 42 तक पहुंचती दिखाई देती है, जो बहुमत के आंकड़े के करीब या उससे ऊपर का राजनीतिक प्रभाव पैदा करती है। इसी संदर्भ में कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व को भविष्य की संभावनाओं का अंदेशा है। उन्हें डर हो सकता है कि यदि कभी झामुमो कांग्रेस से दूरी बनाने का फैसला करे, तो कांग्रेस के कुछ विधायक भी अलग राह चुन सकते हैं। ऐसे में राजद और वाम दलों पर सार्वजनिक दबाव बनाकर झामुमो और उसके सहयोगियों के बीच अविश्वास पैदा करना कांग्रेस की एक राजनीतिक रणनीति हो सकती है। हालांकि इस सिद्धांत के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण अभी तक सामने नहीं आया है। यह पूरी तरह राजनीतिक विश्लेषण और चर्चाओं पर आधारित दृष्टिकोण है। दूसरी ओर यह भी संभव है कि कांग्रेस वास्तव में सहयोगी दलों से अपेक्षित समर्थन न मिलने से नाराज हो और उसी का इजहार कर रही हो। फिलहाल राज्यसभा चुनाव का परिणाम महागठबंधन के भीतर भरोसे की कमी को उजागर करता है। असली सवाल यह नहीं है कि दोषी कौन है, बल्कि यह है कि क्या इस चुनाव ने झारखंड की सत्ता में मौजूद गठबंधन के भीतर दरारों को सार्वजनिक कर दिया है? आने वाले दिनों में यदि कांग्रेस, झामुमो, राजद और वाम दलों के बीच बयानबाजी तेज होती है, तो यह केवल राज्यसभा चुनाव की हार-जीत का मामला नहीं रहेगा, बल्कि झारखंड की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला मुद्दा बन सकता है।