Fri, 31st Jul 2026संसद में झारखंड भाजपा सांसदों का मौन प्रदर्शन: JPSC और JSSC-CGL भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार पर CBI जांच की मांग   Fri, 31st Jul 20262.20 करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा समेत तीन नक्सली 14 दिन की पुलिस रिमांड पर, NIA-IB करेंगी संयुक्त पूछताछ   Fri, 31st Jul 2026मिर्जापुर: द मूवी' का ट्रेलर 11 अगस्त को होगा रिलीज, 8 शहरों में प्रमोशनल रोड ट्रिप से बनेगा 'भौकाल'   Fri, 31st Jul 2026शादी के दबाव में युवती की हत्या का आरोप: शव ट्रॉली बैग में भरकर ओडिशा में फेंका, आरोपी ऑटो चालक गिरफ्तार   Thu, 30th Jul 2026तमिलनाडु में दल-बदल विवाद: AIADMK की याचिका पर सुनवाई 4 अगस्त तक टली, स्पीकर ने एडप्पादी पलानीस्वामी को किया तलब

Politics


झारखंड राज्यसभा चुनाव: क्या कांग्रेस राजद और वाम दलों को बना रही है बलि का बकरा?

News Pratyaksh | Updated : Fri 19th Jun 2026, 01:21 pm
झारखंड राज्यसभा चुनाव: क्या कांग्रेस राजद और वाम दलों को बना रही है बलि का बकरा? झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद महागठबंधन के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार और निर्दलीय समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्रॉस वोटिंग किसने की और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के प्रणव झा और परिमल नाथवानी के बीच 8 वोटों का अंतर रहा। साथ ही खबरें यह भी हैं कि नाथवानी के पक्ष में पड़े दो वोट निरस्त हो गए, जबकि प्रणव झा के खाते का एक वोट रद्द हुआ। यदि इन आंकड़ों को आधार माना जाए तो कम से कम 9 विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग या अपेक्षित समर्थन न मिलने की संभावना बनती है। कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने सार्वजनिक रूप से राजद और वाम दलों पर सवाल उठाए हैं। लेकिन यदि महागठबंधन के अंकगणित को देखें तो राजद के 4 और वाम दलों के 2 विधायक मिलाकर कुल 6 वोट ही होते हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस का दावा सही भी मान लिया जाए, तब भी 3 वोटों का रहस्य बरकरार रहता है। सवाल उठता है कि वे अतिरिक्त वोट आखिर कहां से आए? यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग कांग्रेस की रणनीति पर भी सवाल उठा रहा है। क्या वास्तव में राजद और वाम दलों ने धोखा दिया, या फिर कांग्रेस अपनी आंतरिक कमजोरी और संभावित क्रॉस वोटिंग की जिम्मेदारी सहयोगी दलों पर डाल रही है? इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक और राजनीतिक समीकरण की चर्चा जोरों पर है। झारखंड में लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो, कांग्रेस के बिना भी सत्ता का गणित साध सकती है। झामुमो के 34 विधायक, राजद के 4, वाम दलों के 2, सरयू राय और जयराम महतो जैसे निर्दलीय समर्थन को जोड़ दिया जाए तो संख्या 42 तक पहुंचती दिखाई देती है, जो बहुमत के आंकड़े के करीब या उससे ऊपर का राजनीतिक प्रभाव पैदा करती है। इसी संदर्भ में कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व को भविष्य की संभावनाओं का अंदेशा है। उन्हें डर हो सकता है कि यदि कभी झामुमो कांग्रेस से दूरी बनाने का फैसला करे, तो कांग्रेस के कुछ विधायक भी अलग राह चुन सकते हैं। ऐसे में राजद और वाम दलों पर सार्वजनिक दबाव बनाकर झामुमो और उसके सहयोगियों के बीच अविश्वास पैदा करना कांग्रेस की एक राजनीतिक रणनीति हो सकती है। हालांकि इस सिद्धांत के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण अभी तक सामने नहीं आया है। यह पूरी तरह राजनीतिक विश्लेषण और चर्चाओं पर आधारित दृष्टिकोण है। दूसरी ओर यह भी संभव है कि कांग्रेस वास्तव में सहयोगी दलों से अपेक्षित समर्थन न मिलने से नाराज हो और उसी का इजहार कर रही हो। फिलहाल राज्यसभा चुनाव का परिणाम महागठबंधन के भीतर भरोसे की कमी को उजागर करता है। असली सवाल यह नहीं है कि दोषी कौन है, बल्कि यह है कि क्या इस चुनाव ने झारखंड की सत्ता में मौजूद गठबंधन के भीतर दरारों को सार्वजनिक कर दिया है? आने वाले दिनों में यदि कांग्रेस, झामुमो, राजद और वाम दलों के बीच बयानबाजी तेज होती है, तो यह केवल राज्यसभा चुनाव की हार-जीत का मामला नहीं रहेगा, बल्कि झारखंड की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला मुद्दा बन सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सालों तक लंबित रहने के बाद अपीलों को वापस हाई कोर्ट भेजा :

News Pratyaksh | Updated : Wed 17th Jun 2026, 01:07 pm
सुप्रीम कोर्ट ने सालों तक लंबित रहने के बाद अपीलों को वापस हाई कोर्ट भेजा : मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में पूर्व स्पीकर अप्पावु को 2016-2021 के आम विधानसभा चुनावों के लिए तिरुनेलवेली जिले की राधापुरम विधानसभा सीट से जीतने वाला उम्मीदवार घोषित किया है. सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने की वजह से केस पर आदेश देने में 10 साल की देरी पर, जस्टिस जी जयचंद्रन ने कहा कि जब कोर्ट रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के तहत दिए गए तेजी से ट्रायल के आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो यह डेमोक्रेसी और एडल्ट वोटरशिप की असली भावना को कमजोर करता है."सुप्रीम कोर्ट ने, लगभग छह साल तक मामले को लंबित रखने के बाद, यह सही समझा कि समय बीत जाने और कार्यकाल खत्म हो जाने को देखते हुए इस सवाल को खुला रखना होगा और सिविल अपील में इस सवाल पर फैसला करने से कोई फायदा नहीं होगा. बहुत सम्मान के साथ, सुप्रीम कोर्ट को इस सवाल का जवाब देना चाहिए था क्योंकि इस कोर्ट ने पहले ही कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस/ट्रायल कोर्ट के तौर पर ऊपर दिए गए सवाल के बारे में एक नतीजा दे दिया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के सामने रिपोर्ट देखने पर, मद्रास हाई कोर्ट ने पाया कि 203 पोस्टल वोटों में से, अप्पावु को 153 वैलिड वोट मिले थे और इनबादुरई को अपने पक्ष में 1 वैध वोट मिला था. इस तरह, कोर्ट ने पाया कि अप्पावु ने 103 वोटों के अंतर से चुनाव जीता था.भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सालों तक लंबित रहने के बाद भी मामलों को सुलझाए बिना हाई कोर्ट को वापस भेजने के लिए आलोचना की. रिमांड कहे जाने वाले इस तरीके का मकसद प्रक्रियात्मक निष्पक्षता पक्का करना है, लेकिन असल में यह मुकदमेबाजी को दशकों तक खींच सकता है. 2024–2026 के बीच, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों को कम करने की अपनी कोशिशों के बावजूद, कुछ लंबे समय से लंबित मामलों को हाई कोर्ट में वापस भेजना जारी रखा है. ये रिमांड अक्सर तब होते हैं जब निचली अदालतों ने असल मामलों को ठीक से नहीं देखा होता, लेकिन दशकों बाद केस फिर से शुरू करने के लिए इनकी आलोचना हुई है.

सम्राट चौधरी ने अपराधियों को सुधरने या बिहार छोड़ने की चेतावनी दी है : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'बिहार में सुशासन' के संकल्प को फिर से दोहराया है. उन्होंने साफ कर दिया कि अपराधियों के लिए यहां कोई जगह नहीं है. सीएम ने कहा कि अब तो अपराधियों को नेपाल ही

News Pratyaksh | Updated : Wed 17th Jun 2026, 12:59 pm
सम्राट चौधरी ने अपराधियों को सुधरने या बिहार छोड़ने की चेतावनी दी है : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'बिहार में सुशासन' के संकल्प को फिर से दोहराया है. उन्होंने साफ कर दिया कि अपराधियों के लिए यहां कोई जगह नहीं है. सीएम ने कहा कि अब तो अपराधियों को नेपाल ही भागना होगा, क्योंकि यूपी में योगी बाबा और बंगाल में शुभेंदु दादा बैठे हैं, जबकि बिहार में खुद सम्राट चौधरी हैं. फुलवारीशरीफ के ग्राम-नदियावां में प्रखण्ड सहयोग-सह-जन कल्याण शिविर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार पुलिस लगातार अपराधियों के खिलाफ अभियान चला रही है. आज अगर कोई अपराध करता है तो वह सलाखों के पीछे होता है.सीएम ने कहा कि मेरी सरकार में किसी माई के लाल में इतनी कूबत नहीं है कि वह कानून के साथ खिलवाड़ करे. सम्राट चौधरी ने कहा कि अब तो अपराधियों को नेपाल में ही जाकर शरण लेना होगा, क्योंकि बिहार के साथ-साथ पास के राज्यों में भी उनके लिए जगह नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी बाबा हैं, बंगाल में शुभेंदु दादा हैं और यहां सम्राट चौधरी बैठा है. सम्राट चौधरी ने भोजपुर एनकाउंटर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने एक वीडियो देखा, जिसमें एक युवक पुलिसकर्मियों पर पिस्टल ताने खड़ा था. हालांकि हमारी पुलिस ने उसको गोली मारकर पकड़ लिया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया है. उसके दोनों पैरों में गोली लगी है. पुलिस सूत्रों के अनुसार युवक मानसिक रूप से परेशान है.

रांची।* झारखंड में राज्यसभा चुनाव आते ही INDIA गठबंधन के भीतर ऐसा माहौल बन गया मानो कांग्रेस अपनी सीट के लिए चुनाव आयोग से नहीं, बल्कि अपने सहयोगी दलों से अनुमति मांग रही हो। जिस पार्टी ने कभी देश पर दशकों तक शासन किया, वह आज झारखंड में एक राज्यसभा सीट के

News Pratyaksh | Updated : Tue 16th Jun 2026, 11:42 am
रांची।* झारखंड में राज्यसभा चुनाव आते ही INDIA गठबंधन के भीतर ऐसा माहौल बन गया मानो कांग्रेस अपनी सीट के लिए चुनाव आयोग से नहीं, बल्कि अपने सहयोगी दलों से अनुमति मांग रही हो। जिस पार्टी ने कभी देश पर दशकों तक शासन किया, वह आज झारखंड में एक राज्यसभा सीट के लिए JMM और RJD के दरवाजे खटखटाती नजर आई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के नेताओं ने राज्यसभा सीट की दावेदारी तो पेश कर दी, लेकिन अंतिम फैसला उनके हाथ में कम और सहयोगी दलों की इच्छा पर ज्यादा निर्भर दिखा। झामुमो के कई नेताओं ने खुले तौर पर संकेत दिए कि राज्यसभा की दोनों सीटों पर उनका दावा बनता है। ऐसे में कांग्रेस की स्थिति उस छात्र जैसी हो गई जो परीक्षा देने से पहले ही पास होने की अनुमति मांगने लगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर बैठकों का दौर चला। तस्वीरों में नेता मुस्कुराते दिखाई दिए, लेकिन राजनीतिक संदेश साफ था—झारखंड में गठबंधन का बड़ा भाई कौन है, यह किसी को समझाने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस नेताओं की सक्रियता देखकर ऐसा लग रहा था कि सीट जीतने से पहले सहयोगियों को मनाना ज्यादा जरूरी है। RJD ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विधानसभा में संख्या कम होने के बावजूद पार्टी की राजनीतिक अहमियत इतनी रही कि कांग्रेस को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना पड़ा। आखिर गठबंधन की राजनीति में सीटें गणित से कम और रिश्तों से ज्यादा तय होती हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नाम ने सत्ता पक्ष की बेचैनी बढ़ा दी। परिणामस्वरूप, जो दल एक-दूसरे के साथ सरकार चला रहे हैं, उन्हें बार-बार एक-दूसरे को भरोसा दिलाना पड़ रहा है कि सब कुछ ठीक है। राजनीति के जानकार इसे "गठबंधन धर्म" कह रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे "सीट बचाओ अभियान" बता रहा है। कांग्रेस समर्थकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी को राज्यसभा सीट मिली या फिर गठबंधन सहयोगियों ने उसे सीट पर दावा करने की अनुमति दी? क्योंकि पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस कम और JMM ज्यादा निर्णायक भूमिका में दिखाई दी। हालांकि कांग्रेस नेता इसे गठबंधन की मजबूती और सामूहिक निर्णय बता रहे हैं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में तंज कसने वालों की कमी नहीं है। उनका कहना है कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव ने यह साबित कर दिया कि कांग्रेस उम्मीदवार तय कर सकती है, मगर उसकी किस्मत का फैसला अभी भी सहयोगी दलों की बैठक में ही होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार की अध्यक्षता में आज गुरुवार को यहां राष्ट्रपति

News Pratyaksh | Updated : Thu 11th Jun 2026, 01:26 pm
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार की अध्यक्षता में आज गुरुवार को यहां राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर में नीति (NITI) आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल मीटिंग शुरू हो गई है. एक ऑफिशियल बयान के मुताबिक इस साल की थीम 'विकासशील भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास' है, जो हर भारतीय की भलाई और विकास पर फोकस करती है, चाहे उसकी उम्र, क्षेत्र, जेंडर या सामाजिक-आर्थिक बैकग्राउंड कुछ भी हो. ये बुनियादी ह्यूमन कैपिटल और भविष्य के लिए तैयार स्किल्स, प्रोडक्टिव रोजगार, एंटरप्रेन्योरशिप और डीसेंट्रलाइज्ड ग्रोथ, हेल्थ, न्यूट्रिशन और वेलबीइंग, और सभी के लिए बराबरी और सम्मान के चार मुख्य पिलर पर आधारित है. मीटिंग में एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने, स्किलिंग बढ़ाने और देश भर में टिकाऊ रोजगार के मौके बनाने के उपायों पर भी चर्चा की जाएगी. चर्चा में मिलकर एक इम्प्लीमेंटेशन रोडमैप बनाने पर भी फोकस किया जाएगा, जिसमें गवर्नेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), कन्वर्जेंस, पार्टनरशिप और डेटा-ड्रिवन सिस्टम जैसे मुख्य इनेबलर्स का इस्तेमाल किया जाएगा. साथ ही शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग-टर्म नतीजों को ट्रैक करने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड मैकेनिज्म भी होगा, जिससे अकाउंटेबिलिटी और मेजरेबल असर पक्का होगा.बयान में कहा गया है कि गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में इस विजन को पूरा करने और इसे देश भर के हर नागरिक के लिए ठोस, मापने लायक नतीजों में बदलने के तरीके पर चर्चा की जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक इस मीटिंग में मुख्यमंत्रियों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों को इंक्लूसिव ह्यूमन डेवलपमेंट फ्रेमवर्क पर चर्चा करने के लिए एक साथ लाया जाएगा.

प्रसिद्ध तमिल सिनेमा निर्देशक और अभिनेता भारतीराजा का आज 10 जून को खराब स्वास्थ्य के कारण निधन हो गया. पांच बार के नेशनल अवार्ड निर्देशक भारतीराजा को उम्र संबंधी और फेफड़ों के गंभीर संक्रमण के कारण छह महीने पहले चेन्नई के एमजीएम अस्पताल के आईसीयू वार्ड मे

News Pratyaksh | Updated : Wed 10th Jun 2026, 11:36 am
प्रसिद्ध तमिल सिनेमा निर्देशक और अभिनेता भारतीराजा का आज 10 जून को खराब स्वास्थ्य के कारण निधन हो गया. पांच बार के नेशनल अवार्ड निर्देशक भारतीराजा को उम्र संबंधी और फेफड़ों के गंभीर संक्रमण के कारण छह महीने पहले चेन्नई के एमजीएम अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था. ठीक होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें घर पर आराम करने की सलाह दी थी. इसी दौरान भारतीराजा का चेन्नई के नीलंकराई स्थित उनके आवास पर निधन हो गया. वे 84 वर्ष के थे.निर्देशक भारतीराजा का जन्म 17 जुलाई 1941 को थेनी के अलिनागर में माया थेवर और करुतम्मा के घर हुआ था. उनका असली नाम चिन्नसामी था. स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने साहित्य, वाक्पटुता और नाटकों पर विशेष ध्यान दिया. इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक अपने होमटाउन में स्वास्थ्य निरीक्षक के रूप में काम किया. सिनेमा के प्रति अपने लगाव के कारण चेन्नई आए भारतीराजा को फिल्म उद्योग में प्रवेश करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.फिल्म इंडस्ट्री में हाथ आजमाने के साथ-साथ, उन्होंने चेन्नई में जीविका कमाने के लिए नाटकों में अभिनय करने और पेट्रोल पंप पर काम करने जैसे अन्य काम भी किए. उनकी इस लगन के फलस्वरूप, भारथिराजा को निर्देशक पुट्टन्ना कनकल्ल के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम करने का अवसर मिला.
Follow us
Categories
Latest News
Popular Categories