#newspratyaksh #AkshayTritiya
सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का पर्व धन, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, इस बा
News Pratyaksh | Updated : Sat 11th Apr 2026, 11:11 am
#newspratyaksh #AkshayTritiya
सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का पर्व धन, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, इस बार की अक्षय तृतीया बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रही है क्योंकि इस दिन ग्रहों की एक ऐसी दुर्लभ स्थिति बन रही है जो लगभग 100 साल बाद देखने को मिल रही है. इस महासंयोग के कारण ब्रह्मांड में 'अक्षय योग', 'मालव्य राजयोग' और 'गजकेसरी योग' का निर्माण हो रहा है.
आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य से इस दुर्लभ योग के बनने से किन भाग्यशाली राशियों पर धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की असीम कृपा बरसने वाली है इस बार अक्षय तृतीया पर ग्रहों के राजा सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और मन के कारक चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेंगे. सूर्य और चंद्र का एक साथ अपनी-अपनी उच्च राशि में होना एक अत्यंत दुर्लभ घटना है, जिसे ज्योतिष में 'सिद्धिदायक' और 'अक्षय योग' कहा जाता है. इसके साथ ही वृषभ राशि में शुक्र और चंद्रमा की युति से मालव्य और गजकेसरी योग का शुभ प्रभाव भी देखने को मिलेगा