विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला का तीसरा और पितृ पक्ष का पहला श्राद्ध यानी प्रतिपदा श्राद्ध है.
News Pratyaksh | Updated : Mon 08th Sep 2025, 09:46 am
विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला का तीसरा और पितृ पक्ष का पहला श्राद्ध यानी प्रतिपदा श्राद्ध है. इस बार पितृ पक्ष मेला 7 सितंबर 2025 से शुरू होकर 21 सितंबर अमावस्या के दिन समाप्त हो रही है. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को खास माना जाता है. पितृ पक्ष में अपने पितरों की मुक्ति और आत्मा की शांति के लिए पूरे विधि-विधान से श्राद्ध किए जाते हैं. आज के दिन प्रेतशिला में पिंडदान करने का विधान है. प्रेतशिला स्थित ब्रह्मकुंड सरोवर में स्नान के बाद ही प्रेतशिला पिंडवेदी पर पिंडदान करना चाहिए. जो भी व्यक्ति अकाल मृत्यु का शिकार हुए हैं, या जिनकी मृत्यु जलने, आत्महत्या, सड़क हादसा, डूबने, हत्या या अन्य किसी घटना में हुई हो, ऐसे अकाल मृत्यु वाले पितर प्रेत योनि में चले जाते हैं.प्रेतशिला के अलावे इस दिन राम कुंड, रामशिला, काकबली में पिंडदान करने का विधान है. प्रेतशिला स्थित ब्रह्म कुंड पर स्नान करना चाहिए. प्रेतशिला में पिंडदान से पितरों को प्रेत योनी की बाधा से मुक्ति मिल जाती है और उन्हें ब्रह्मलोक की प्राप्ति हो जाती है. अकाल मृत्यु वाले प्रेत योनी को प्राप्त पितर को मोक्ष दिलाने के लिए इन वेदियो पर पिंडदान करना आवश्यक होता है. भगवान राम ने भी गयाजी पहुंचकर प्रेतशिला स्थित ब्रह्मकुंड में स्नान किया था.