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23 जून यानी आज विश्व ओलंपिक दिवस है.

News Pratyaksh | Updated : Mon 23rd Jun 2025, 06:24 am

23 जून यानी आज विश्व ओलंपिक दिवस है. खेल प्रेमियों के लिए यह दिन विशेष होता है. युवा एथलीट के लिए यह दिन खास मायने रखता है. कोयलांचल की बात करें तो धनबाद खेल विभाग बच्चों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए कोशिश में जुटी हुई है.जी हां जिले के 8 लेन सड़क के मेमको मोड़ स्थित बिरसा मुंडा मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बच्चों के अदंर छिपी प्रतिभा को तराशने की मेहनत की जा रही है. जहां आर्चरी, बॉक्सिंग, कबड्डी, फुटबॉल, कराटे और स्केटिंग का प्रशिक्षण बच्चों को दी जा रही है, वहीं कला भवन में बैडमिंटन के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है. खेल पदाधिकारी उमेश लोहरा खुद कोच और बच्चों की निगरानी करते हैं.सबसे पहले हम बात करते हैं बॉक्सिंग की. बॉक्सिंग में करीब 20 बच्चे यहां प्रशिक्षण ले रहें हैं, जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल है. बॉक्सिंग सिख रही मन्नत झा ने कहा कि पंचेज के साथ-साथ स्ट्रेट ट्रेनिंग और वेट ट्रेनिंग कराई जाती है. जिन्हें भी बॉक्सिंग पसंद हैं, वह यहां आकर निःशुल्क प्रशिक्षण ले सकते हैं. यहां काफी अच्छा प्रशिक्षण दिया जा रहा है.इसके अलावा फुटबॉल में कुल 35 लड़के-लड़कियां प्रशिक्षण ले रहें हैं. कोच लक्ष्मण मुर्म ने कहा कि बच्चे इंडिया का प्रतिनिधित्व करें, हमारी यही कोशिश हैं. फुटबॉल खिलाड़ी सबा परवीन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम अपने देश का नाम रौशन करना चाहते हैं. अमित टुडू ने कहा कि हम फ़ुटबॉल में इंडिया टीम से खेलना चाहते हैं. साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रौशन करना चाहते हैं.आर्चरी में भी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं. बच्चों को आर्चरी का प्रशिक्षण दे रही लक्ष्मी ने बताया कि यहां वह सारी सुविधाएं हैं, जिससे बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं. आर्चरी में रुचि रखने वाले बच्चे ट्रेनिंग ले सकते हैं. बच्चों को ओलंपिक में ले जाने का लक्ष्य है. वहीं, खिलाड़ी अन्नू ने कहा कि मैं आगे चलकर देश के लिए गोल्ड मेडल लाना चाहती हूं.वहीं, खेल पदाधिकारी उमेश लोहरा ने कहा कि बच्चे जिस तरह का भी प्रशिक्षण लेना चाहते हैं, हमारी कोशिश रहती है कि हर तरह का प्रशिक्षण हम दे सकें. चार से पांच खेल का प्रशिक्षण शुरू किया है. आने वाले दिनों में इसमें वृद्धि देखने को मिलेंगे. झारखंड के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है सिर्फ उन्हें निखारने की. सरकार काम कर रही है. उम्दा कोच को लाने के लिए प्रयास किए जा रहें हैं. बच्चे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना जौहर दिखा सके, यही हमारी कोशिश है.