बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ शिकंजा कसा जा रहा है. इसी क्रम में उनके मतदान के अधिकार पर रोक लगा दी गई है. इससे पहले जुलाई में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने अदालत की अवमानना के एक मामले में उनके खिलाफ छह महीने जेल की सजा सुनाई थी.बांग्लादेश के चुनाव आयोग (ईसी) ने बुधवार को कहा कि उसने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के राष्ट्रीय पहचान पत्र को 'लॉक' कर दिया है. इससे वह अगले साल फरवरी में होने वाले आम चुनावों में मतदान करने से प्रभावी रूप से प्रतिबंधित हो गई हैं.चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने यहां निर्वाचन भवन स्थित अपने कार्यालय में संवाददाताओं से कहा, 'जिस किसी का राष्ट्रीय पहचान पत्र (एनआईडी) लॉक हो गया है, वह विदेश से वोट नहीं दे सकता.' उन्होंने कहा, 'उनकी (हसीना की) एनआईडी बंद है.'हालांकि अहमद ने किसी अन्य नाम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन यूएनबी समाचार एजेंसी और ढाका ट्रिब्यून अखबार ने अनाम चुनाव आयोग के अधिकारियों के हवाले से बताया कि हसीना की छोटी बहन शेख रेहाना, बेटे सजीब वाजेद जॉय और बेटी साइमा वाजेद पुतुल के एनआईडी को भी 'लॉक' या 'ब्लॉक' कर दिया गया है.रेहाना के बच्चे ट्यूलिप रिजवाना सिद्दीक, अजमीना सिद्दीक और भतीजे रदवान मुजीब सिद्दीक बॉबी, उनके बहनोई और हसीना के पूर्व सुरक्षा सलाहकार सेवानिवृत्त मेजर जनरल तारिक अहमद सिद्दीकी, उनकी पत्नी शाहीन सिद्दीकी और उनकी बेटी बुशरा सिद्दीकी को भी कथित तौर पर मतदान करने से रोक दिया गया है.हालांकि, अहमद ने कहा कि जो लोग न्याय से बचने के लिए या अन्य कारणों से विदेश भाग गए हैं, वे अभी भी मतदान कर सकते हैं, बशर्ते कि उनके एनआईडी कार्ड सक्रिय रहें. 5 अगस्त 2024 को हसीना की अवामी लीग सरकार को तब गिरा दिया गया जब एक हिंसक छात्र आंदोलन के कारण उन्हें भारत भागने पर मजबूर होना पड़ा.इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाला और हसीना तथा अन्य वरिष्ठ अवामी नेताओं पर मानवता के विरुद्ध अपराध सहित अन्य आरोपों में मुकदमा चलने तक अवामी लीग की गतिविधियों को निलंबित कर दिया.हसीना पर वर्तमान में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया जा रहा है, जहां अभियोजकों ने जुलाई 2024 के विद्रोह के दौरान कथित अत्याचारों के लिए मृत्युदंड की मांग की है.अवामी लीग के अधिकांश वरिष्ठ नेता भूमिगत या निर्वासन में हैं, क्योंकि भीड़ ने उनकी संपत्तियों को आग लगा दी और तोड़फोड़ की, जिसमें बांग्लादेश के संस्थापक और हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान का 32 धानमंडी आवास भी शामिल है.

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