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कानूनी शिक्षा पर सीजेआई ने कहा युवा मस्तिष्कों को असमानता और लोकतांत्रिक कमजोरी की वास्तविकताओं का सामना करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए :

News Pratyaksh | Updated : Thu 18th Sep 2025, 10:18 am
 
भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने बुधवार को कहा कि विधि शिक्षा को केवल तकनीकी रूप से कुशल वकील तैयार करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे युवा मस्तिष्कों को हमारे समय के ज्वलंत मुद्दों से जुड़ने, असमानता, संघर्ष और लोकतांत्रिक कमजोरियों की वास्तविकताओं का सामना करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि एक विधि पेशेवर की असली शक्ति केवल कानून को जानने में नहीं, बल्कि उस ज्ञान का उपयोग न्याय को बनाए रखने, लोकतंत्र की रक्षा करने और कठिन समय में संवैधानिक मूल्यों के लिए अडिग रहने में निहित है.व्याख्यान में, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शिक्षाविदों को स्थानीय या राष्ट्रीय चिंताओं की सीमाओं से ऊपर उठकर व्यापक मानवता के समक्ष उपस्थित ज्वलंत मुद्दों पर सक्रिय रूप से विचार-विमर्श करना चाहिए.उन्होंने आगे कहा कि ऐसा करते हुए, उन्हें कानून और न्याय पर विकसित हो रही विश्व व्यवस्था में वैश्विक दक्षिण के मुखर प्रतिनिधि के रूप में कार्य करना चाहिए.मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से कानूनी शिक्षा की पहुंच का विस्तार करके, क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देकर, कानूनी सहायता को सुदृढ़ करके और पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों के लिए मार्ग प्रशस्त करके कानूनी शिक्षा की पुनर्कल्पना करना आवश्यक है.मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा करके ही हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि कानून और न्याय तक पहुंच केवल कुछ लोगों के लिए विशेषाधिकार न बने, बल्कि इस गणराज्य के प्रत्येक नागरिक के लिए एक जीवंत वास्तविकता बने.मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उपनिवेशवाद, आर्थिक असमानता और समानता के लिए गहरे संघर्षों के इतिहास से आकार लेने वाले हमारे क्षेत्र की आवाजें और दृष्टिकोण वैश्विक कानूनी विमर्श में हाशिये पर नहीं रह सकते.उन्होंने कहा, "इसके बजाय, उन्हें इस बात को प्रभावित करना चाहिए कि दुनिया मानवाधिकारों, पर्यावरणीय स्थिरता, प्रौद्योगिकी विनियमन, प्रवासन और शांति के सवालों को कैसे समझती है और उन पर कैसे प्रतिक्रिया देती है."