सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लद्दाखी शिक्षा सुधारक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि
News Pratyaksh | Updated : Tue 07th Oct 2025, 11:26 am
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लद्दाखी शिक्षा सुधारक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया. इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत उनकी हालिया नजरबंदी को चुनौती दी गई है. शीर्ष अदालत ने केंद्र, लद्दाख प्रशासन और जोधपुर जेल से जवाब मांगा है.यह मामला न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ के समक्ष आया. अंगमो ने जलवायु कार्यकर्ता की एनएसए के तहत हिरासत को चुनौती दी है और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है.वांगचुक को 26 सितंबर को कठोर एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था. बता दें कि इससे दो दिन पहले लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में केंद्र शासित प्रदेश में 5 लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे.वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व किया और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र का प्रतिनिधित्व किया. शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले मंगलवार के लिए निर्धारित की है.
मेहता ने कहा कि उनके निर्देश हैं कि यह उपलब्ध करा दिया गया है. पीठ ने कहा कि वह नोटिस जारी करेगी और मामले में एक छोटी तारीख तय करेगी.सिब्बल ने कहा कि उन्होंने बंदी (वांगचुक) को आधार बता दिए हैं और वे हमें भी हिरासत के आधार बता सकते हैं. मेहता ने कहा कि बंदी के वकील और भाई ने जेल में उससे मुलाकात की थी.सिब्बल ने कहा कि उन्होंने हमें इंटरकॉम पर उससे बात करने की अनुमति दी और कोई व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई. मेहता ने कहा कि कानून के अनुसार हिरासत के आधार बताए गए हैं.सब्ल ने कहा कि इस न्यायालय के दो फैसले हैं, जिनमें से एक फैसला न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला ने सुनाया था, और उन फैसलों के अनुसार परिवार के सदस्यों को हिरासत के आधार बताए जाने चाहिए.मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता ने मुलाकात के संबंध में पहले ही अनुरोध कर दिया है और इस पर विचार किया जा रहा है, और अब तक 12 नाम दिए गए हैं. और एक-एक करके सभी को अनुमति दी जा रही है. मेहता ने कहा कि हमें अनावश्यक रूप से प्रचार नहीं करना चाहिए, और इस बात पर जोर दिया कि किसी को भी उससे मिलने से नहीं रोका जा रहा है.सुनवाई के दौरान, सिब्बल ने तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल को उनके पति की हिरासत के आधार नहीं बताए गए हैं और हिरासत आदेश के अभाव में वह सरकार के समक्ष अभ्यावेदन दायर नहीं कर सकती हैं.