बिहार में चुनाव आयोग ने एक रिर्पोर्ट निकाली
News Pratyaksh | Updated : Tue 04th Nov 2025, 11:25 am
बिहार में चुनाव आयोग ने एक रिर्पोर्ट निकाली है. पहले कहा जा रहा था कि कुछ नेपाली और बांग्लादेशी बंगाल की सीमा और नेपाल की सीमा से नागरिक मतदाता सूची में शामिल होएंगे. इस पर चुनाव आयोग ने एक रिर्पोर्ट बनाई है, जिसमें यह खुलासा हुआ है कि बिहार के बार्डर पर स्थित अररिया और किशनगंज में SIR की मतदाता सूची में एक भी विदेशी मतदाता नहीं पाया गया हैं. अररिया के जिलाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि 1.4 लाख के करीब मतदाताओं के नामों को हटाया गया था. यह सभी या तो अनुपस्थित, कहीं और रह रहे थे या मृत पाए गए थे. इस सूची में किसी भी विदेशी का नाम नहीं मिला हैं. आपको बता दे कि कुछ संदिग्ध लोगों को नोटिस भेजा गया था. उन सभी लोगों को नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को शामिल करने के लिए बोला गया था, जिसके बाद जांच में पाया गया कि सभी ने वैध दस्तावेजों को जमा किया. SIR में एक भी विदेशी मतदाता नही पाया गया हैं. अररिया के जिलाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि 1.4 लाख के करीब मतदाताओं के नामों को हटाया गया था. यह सभी या तो अनुपस्थित, कहीं और रह रहे थे या मृत पाए गए थे. इस सूची में किसी भी विदेशी का नाम नहीं मिला हैं. आपको बता दे कि कुछ संदिग्ध लोगों को नोटिस भेजा गया था. उन सभी लोगों को नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को शामिल करने के लिए बोला गया था, जिसके बाद जांच में पाया गया कि सभी ने वैध दस्तावेजों को जमा किया. SIR में एक भी विदेशी मतदाता नही पाया गया हैं.
इसी में किशनगंज में रहने वाले एक नागरिक मोहम्मद हफीज ने कहा कि यहां कई लोग उत्तर बंगाल में चाय के बागानों में काम कर अपनी आजीविका को चलाते हैं. सीमा के खुले होने के कारण यह मुमकिन है लेकिन सीमा के बंद होते ही सब ठप पड़ जाता है. वहां के स्थानीय मुखिया अनुपमा ठाकुर ने कहा कि विदेशी मतदाता जैसे मुद्दे को बस बढ़ा-चढ़ाकर बोला गया है. तो इसी के साथ मोहम्मद इस्लामुद्दीन ने कहा कि जो लोग अलग- अलग जगह बिहार नेपाल और बंगाल तीनो जगह से जुड़े रहते है. उनके दस्तावेज अधूरे होते है. लेकिन इस बार किसी भी ऐसे बेगुनाह का नाम नहीं काटा गया है. इस के अलावा एक नागरिक मोहम्मद मिंतुल्लाह ने कहा कि लोगों की असली समस्या बाढ़ और रोजगार है. उनकी असली समस्या घुसपैठ नहीं है.