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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपनी दो जजों वाली पीठ द्वारा 11 सितंबर को दिए गए उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें 2023 के अकोला दंगों की जांच करने वाले विशेष जांच दल (SIT) में हिंदू

News Pratyaksh | Updated : Tue 11th Nov 2025, 11:27 am

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपनी दो जजों वाली पीठ द्वारा 11 सितंबर को दिए गए उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें 2023 के अकोला दंगों की जांच करने वाले विशेष जांच दल (SIT) में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल करने का निर्देश दिया गया था.1 सितंबर को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की इसी दो जजों वाली पीठ ने कहा था कि जब पुलिस बल के सदस्य अपनी वर्दी पहनते हैं, तो उन्हें अपने व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों को त्याग देना चाहिए, चाहे वे धार्मिक, नस्लीय, जातिवादी या अन्य हों और उन्हें अपने पद और अपनी वर्दी से जुड़े कर्तव्य के प्रति सच्चे रहना चाहिए.7 नवंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ ने 11 सितंबर के फैसले पर रोक लगाने का फैसला किया. खंडित फैसले में जस्टिस कुमार ने कहा था, "गुण-दोष के आधार पर इस न्यायालय द्वारा पारित 11 सितंबर 2025 के आदेश की समीक्षा करने का कोई आधार नहीं बनता...."दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने 7 नवंबर को महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर विभाजित फैसला सुनाया, जिसमें 11 सितंबर के अपने उस आदेश की समीक्षा की मांग की गई थी. इसमें 2023 के अकोला दंगों की जांच करने वाले एसआईटी में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल करने का निर्देश दिया गया था.