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सोमवार का दिन भारतीय करेंसी मार्केट के लिए भारी रहा. डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 89.76 के ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया

News Pratyaksh | Updated : Mon 01st Dec 2025, 11:48 am

सोमवार का दिन भारतीय करेंसी मार्केट के लिए भारी रहा. डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 89.76 के ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया, जो दो हफ्ते पहले बने 89.49 के पिछले रिकॉर्ड लो को भी पार कर गया. यह गिरावट इस समय आई है, जबकि भारत ने Q2 FY26 में 8.2% की शानदार GDP ग्रोथ दर्ज की है. यानी देश की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है, लेकिन करेंसी लगातार कमजोरी दिखा रही है.इस गिरावट के पीछे कई बड़े फैक्टर्स हैं. सबसे पहले, विदेशी निवेश (FPI) आउटफ्लो. साल 2025 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी मार्केट से 16 बिलियन डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं. इतना बड़ा फंड आउटफ्लो सीधे करेंसी पर दबाव डालता है.दूसरा बड़ा कारण U.S.-India ट्रेड एग्रीमेंट का अभाव है. दोनों देशों के बीच कोई बड़ा ट्रेड डील नहीं होने के कारण अमेरिका ने भारतीय एक्सपोर्ट पर 50% तक के टैरिफ बनाए रखे हैं. इसका असर भारत के ट्रेड बैलेंस पर पड़ रहा है.रुपया कमजोर होने से इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ती है, खासकर कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना, मशीनरी और फर्टिलाइजर्स जैसी वस्तुओं में. इससे महंगाई (inflation) बढ़ने का खतरा रहता है, जो सीधे आम लोगों की जेब पर असर डालता है. साथ ही, करेंसी गिरने से मार्केट सेंटिमेंट नेगेटिव होता है और विदेशी निवेशक सतर्क हो जाते हैं, जिससे इक्विटी मार्केट पर दबाव बढ़ सकता है.अक्टूबर में भारत का मर्चेंडाइज़ ट्रेड डेफिसिट रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया. जब देश ज्यादा इंपोर्ट करता है और एक्सपोर्ट कम होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिससे रुपया और नीचे फिसल जाता है.