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भारत और चीन के बीच व्यापार विवाद बढ़ा, बीजिंग ने WTO में नई दिल्ली की EV नीतियों को दी चुनौती :

News Pratyaksh | Updated : Tue 20th Jan 2026, 12:30 pm
भारत और चीन के बीच व्यापार विवाद बढ़ा, बीजिंग ने WTO में नई दिल्ली की EV नीतियों को दी चुनौती :
ऑटोमोबाइल, बैटरी और EVs की इंसेंटिव स्कीम को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद बना हुआ है. अब चीन ने भारत के खिलाफ विवाद सुलझाने के लिए एक पैनल बनाने के लिए वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन (WTO) से संपर्क किया है, जिससे ऑटोमोबाइल, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए नई दिल्ली की इंसेंटिव स्कीम को लेकर व्यापार विवाद बढ़ गया है. यह अनुरोध इस मुद्दे को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय बातचीत के फेल होने के बाद किया गया है.आपकी जानकारी के लिए बता दें बीजिंग ने पिछले साल अक्टूबर माह में पहली बार चिंता जताई थी, और आरोप लगाया था कि भारत की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं की शर्तें चीन सहित इम्पोर्टेड सामानों के साथ भेदभाव करती हैं.खास बात यह है कि यह चुनौती ऐसे समय में सामने आई है, जब चीनी ऑटोमोबाइल कंपनियां ज़्यादा प्रोडक्शन कैपेसिटी और देश में कड़ी कीमत की होड़ के बीच विदेशी बाज़ारों की तलाश कर रही हैं. भारत के तेज़ी से बढ़ते ऑटो और EV बाज़ार को चीनी मैन्युफैक्चरर्स एक बड़े मौके के तौर पर देख रहे हैं.चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन (CPCA) से मिली जानकारी के अनुसार, चीनी कंपनियों ने साल के पहले आठ महीनों में लगभग 2.01 मिलियन प्योर इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड गाड़ियों का एक्सपोर्ट किया, जो पिछले साल के मुकाबले 51 प्रतिशत ज़्यादा है. हालांकि, चीनी EV एक्सपोर्ट को कई इलाकों में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें यूरोपियन यूनियन भी शामिल है, जिसने चीन में बनी EVs पर 27 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया है.दोनों देशों के बीच बीते साल 25 नवंबर, 2025 और इस साल 6 जनवरी, 2026 को बातचीत हुई, लेकिन इससे कोई आपसी सहमति वाला समाधान नहीं निकल पाया. इसके बाद 16 जनवरी को एक कम्युनिकेशन में, चीन ने औपचारिक रूप से WTO की विवाद निपटान संस्था (DSB) से एक पैनल बनाने का अनुरोध किया और कहा कि इस मामले को जिनेवा में 27 जनवरी को होने वाली अगली मीटिंग के एजेंडे में शामिल किया जाए.