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मोतिहारी के सोनू सिंह की कहानी जज़्बे, मेहनत और कभी न हार मानने वाले हौसले की मिसाल है

News Pratyaksh | Updated : Sat 17th Jan 2026, 10:23 am
मोतिहारी के सोनू सिंह की कहानी जज़्बे, मेहनत और कभी न हार मानने वाले हौसले की मिसाल है. जन्म से ही उनकी एक आंख की रोशनी नहीं थी. वहीं 2004 में हाथ वाले पंखे से लगे झटके ने दूसरी आंख की रोशनी भी छीन ली. कई जगह इलाज कराया गया, दिल्ली एम्स में ऑपरेशन के बाद कुछ समय के लिए रोशनी लौटी, लेकिन गरीबी और खेतों में काम करने के दौरान लगी चोट के कारण वह रोशनी भी हमेशा के लिए चली गई.दृष्टिबाधित होने के बावजूद सोनू सिंह ने हार नहीं मानी.पढ़ाई को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और मोतिहारी से निकलकर दिल्ली पहुंचे. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के साथ ही हिंदी और संस्कृत में डबल एमए की डिग्री हासिल की. इसके बाद बीएड की पढ़ाई भी पूरी की और अपने लिए एक मजबूत करियर की नींव रखी. आज सोनू सिंह नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं. बैंकिंग के काम में वे मोबाइल और कंप्यूटर पर स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर की मदद लेते हैं और अपना काम करते हैं.नौकरी के साथ-साथ सोनू अंतरराष्ट्रीय स्तर के पैरा एथलीट भी हैं. ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने शॉट पुट खेलना शुरू किया और अब तक चार बार इंटरनेशनल चैंपियन रह चुके हैं. वे सात अलग-अलग देशों में मुकाबले खेल चुके हैं और दो बार वर्ल्ड चैंपियनशिप और तीन बार पारा एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.साल 2023 में आयोजित पहले खेलो इंडिया पैरा गेम्स में सोनू सिंह ने डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर बिहार का नाम रोशन किया. इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वे गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं. एथलेटिक्स के साथ-साथ सोनू सिंह गोलबॉल के भी मंजे हुए खिलाड़ी हैं. बिहार में पहली बार आयोजित नेशनल गोलबॉल चैंपियनशिप में बिहार टीम के वे कप्तान रह चुके हैं. पिछले साल से वे टीम की कमान संभाल रहे हैं. बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उनका चयन नेशनल कैंप के लिए भी हुआ था, लेकिन इंजरी के कारण वे उसमें शामिल नहीं हो सके. अब उनकी नजर 2026 में टोक्यो में होने वाले एशियन गेम्स पर है.