उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी के लिए चर्चित रही राज ठाकरे की राजनीति को मुंबई के मतदाताओं ने सिरे से खारिज कर दिया. बीएमसी चुनाव में बिहार के कई नेताओं ने न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि निर्णायक जीत हासिल कर यह संदेश दिया कि मुंबई अब सबकी है. इस चुनाव में भाजपा और शिंदे शिवसेना गठबंधन को जो मजबूती मिली, उसमें प्रवासी मतदाताओं की भूमिका अहम रही. मुंबई के बीएमसी चुनाव में प्रवासी समुदाय खासकर बिहार के मिथिलांचल नेताओं का दबदबा साफ दिखा. बीएमसी यानी बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के 227 वार्डों की लड़ाई में जहां महाराष्ट्र की राजनीति के चेहरे जैसे राज ठाकरे की पार्टी MNS अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई, वहीं बिहार और उत्तर भारत से आए नेताओं ने बड़ी जीत दर्ज की. इस चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगियों ने भी प्रमुख भूमिका निभाई, जिससे पारंपरिक शिवसेना-मीडिया कथन से अलग राजनीतिक रुख देखने को मिला है।कांदिवली पूर्व के वार्ड 23 से भाजपा के शिव कुमार झा ने भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की और तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक पूरी की. उन्होंने करीब 5,400 मतों से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को हराया जो इस क्षेत्र में उनके मजबूत प्रभाव को दिखाता है. यह जीत सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि प्रवासी मतदाता शक्ति की पहचान के रूप में देखी जा रही है. छोटे से अंधराठाढ़ी ब्लॉक के गंगद्वार गांव से मुंबई तक अपनी राजनीतिक पहचान बनाने वाले शिव कुमार झा आज उत्तर भारतीय व मैथिल समुदाय के सशक्त चेहरे बने हैं. स्थानीय मतदाताओं की भारी

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