झारखंड में लाल आतंक अब पूरी तरह खत्म होने के कगार पर है. झारखंड पुलिस के आधिकारिक आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं कि पिछले पांच सालों में नक्सल कांडों की संख्या लगातार घट रही है. नक्सल मामलों की कम होती रिपोर्टिंग यह स्पष्ट संकेत देती है कि झारखंड से लाल आतंक का साया मिटने के करीब पहुंच गया है.झारखंड में नक्सलवाद की जड़ें कैसे खोखली हो रही हैं, इसकी शुरुआत 2026 के शुरुआती आंकड़ों से करते हैं. झारखंड पुलिस की वेबसाइट पर फिलहाल जनवरी 2026 तक के सभी अपराधों के आंकड़े उपलब्ध हैं. इनमें नक्सल कांडों पर फोकस करते हुए देखें तो जनवरी 2026 में पूरे महीने के दौरान राज्य के 24 जिलों में मात्र पांच नक्सल कांड थानों में दर्ज हुए. इनमें चतरा में तीन और पश्चिम सिंहभूम में दो कांड शामिल हैं. यानी 24 जिलों में से सिर्फ दो जिलों में नक्सल कांड दर्ज हुए. ये पांच मामले भी ज्यादातर नक्सलियों के साथ हुए एनकाउंटर से जुड़े हैं, जिनमें बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए थे.दिसंबर 2025 में पूरे राज्य में मात्र 11 नक्सल कांड दर्ज हुए. इनमें रांची में एक, चतरा में छह, खूंटी में दो और पश्चिम सिंहभूम में दो कांड शामिल थे. नवंबर 2025 में पूरे झारखंड में मात्र आठ नक्सल कांड दर्ज हुए, जिनमें रांची में दो, चतरा में एक, लोहरदगा में एक, पश्चिम सिंहभूम में एक और लातेहार में तीन केस थे. इनमें से अधिकांश मामले नक्सलियों की गिरफ्तारी और एनकाउंटर से संबंधित थे.