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भारतीय अर्थव्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां तकनीक और उपभोग मिलकर एक नया इतिहास रचने जा रहे हैं. हाल ही में जारी 'Winning Codes for Retail 2035' रिपोर्ट ने रिटेल जगत में खलबली मचा दी है.

News Pratyaksh | Updated : Wed 18th Feb 2026, 12:34 pm
भारतीय अर्थव्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां तकनीक और उपभोग मिलकर एक नया इतिहास रचने जा रहे हैं. हाल ही में जारी 'Winning Codes for Retail 2035' रिपोर्ट ने रिटेल जगत में खलबली मचा दी है. बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) और रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) द्वारा तैयार इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रिटेल बाजार साल 2035 तक ₹210 से ₹215 ट्रिलियन (लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर) के विशाल स्तर तक पहुंच जाएगा.अब तक हम ई-कॉमर्स और एम-कॉमर्स (मोबाइल कॉमर्स) की बात करते थे, लेकिन अब दुनिया 'एजेंटिक कॉमर्स' की ओर बढ़ रही है. 2035 तक, एक औसत भारतीय ग्राहक को खुद ऐप या वेबसाइट पर जाकर उत्पाद खोजने की जरूरत नहीं होगी.
आपके पास अपना एक व्यक्तिगत AI एजेंट (एक डिजिटल सहायक) होगा, जिसे आपकी पसंद, नापसंद, बजट और घर की जरूरतों का पूरा डेटा होगा. उदाहरण के लिए, अगर आपके घर में दूध खत्म होने वाला है या आपकी पसंदीदा शर्ट पुरानी हो गई है, तो आपका AI एजेंट खुद ही बाजार में उपलब्ध सर्वोत्तम विकल्पों की तुलना करेगा और आपके लिए सबसे किफायती व बेहतरीन डील फाइनल कर देगा. यह तकनीक 'ब्रांड वफादारी' की परिभाषा बदल देगी, क्योंकि AI भावनाओं के बजाय डेटा और परफॉर्मेंस के आधार पर निर्णय लेगा.
लेकिन इस रिपोर्ट की सबसे चौंकाने वाली बात बाजार का आकार नहीं, बल्कि खरीदारी का बदलता तरीका है. रिपोर्ट का दावा है कि भविष्य में खरीदारी 'इंसान' नहीं, बल्कि उनके 'AI एजेंट्स' करेंगे.