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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक आज सोमवार से शुरू हो गई है. वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच, विशेषज्ञों का मानना है

News Pratyaksh | Updated : Mon 06th Apr 2026, 11:56 am

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक आज सोमवार से शुरू हो गई है. वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और 'यथास्थिति' बनाए रखेगा.इस बैठक का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं. मार्च के दौरान आए इस ऊर्जा संकट ने भारत के लिए 'आयातित मुद्रास्फीति' का खतरा बढ़ा दिया है. विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि आरबीआई ने दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 0.25% की कटौती कर इसे 5.25% पर लाया था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अब और कटौती की गुंजाइश खत्म होती दिख रही है.बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार, "आरबीआई से फिलहाल किसी तत्काल नकदी प्रबंधन या मुद्रा हस्तक्षेप की उम्मीद नहीं है, क्योंकि बैंक जरूरत पड़ने पर पहले से ही कदम उठा रहा है." वहीं, एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक 'ऑपरेशन ट्विस्ट' जैसे उपकरणों का उपयोग कर सकता है ताकि सरकारी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित किया जा सके और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनी रहे.एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने चेतावनी दी है कि रुपया कमजोर होकर प्रति डॉलर 95 के स्तर को छू रहा है, जिससे भारत इस संकट से अछूता नहीं है. यदि महंगाई दर आरबीआई के ऊपरी संतोषजनक स्तर (6 प्रतिशत) को पार करती है, तो भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता