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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलमार्ग खोलने को लेकर ईरान को बड़ी चेतावनी दी थी. उन्होंने पावर प्लांट और पुलों को उड़ाने की धमकी दी थी. हालांकि की डेडलाइन से पहले दोनों देशों के बीच युद्ध विराम हो गया. आइए जानते हैं पावर प्लांट को उड़ाने क

News Pratyaksh | Updated : Wed 08th Apr 2026, 11:56 am

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलमार्ग खोलने को लेकर ईरान को बड़ी चेतावनी दी थी. उन्होंने पावर प्लांट और पुलों को उड़ाने की धमकी दी थी. हालांकि की डेडलाइन से पहले दोनों देशों के बीच युद्ध विराम हो गया. आइए जानते हैं पावर प्लांट को उड़ाने की धमकी के पीछे कौन सी ताकत थी. अमेरिका ने बिजली आपूर्ति को तबाह करने की नियत से एक हथियार बनाया है. इसे ग्रेफाइट बम या 'ब्लैकआउट बम' भी कहा जाता है.अमेरिकी आर्मी के पास ब्लैकआउट बम सीबीयू-94 वेपन सिस्टम है, जो खास सबम्यूनिशन बीएलयू-114/बी से बना है. इसका इस्तेमाल किसी संभावित दुश्मन के बिजली सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने के लिए किया जाता है. सबम्यूनिशन बीएलयू -114/बी का इस्तेमाल सिर्फ बिजली सप्लाई सुविधाओं पर ही किया जाता है. इसमें कोलेटरल डैमेज होने का खतरा बहुत कम होता है.ब्लैकआउट बमों प बात करते समय अक्सर सीबीयू -94/बी और बीएलयू -114/बी शब्दों के बीच कन्फ्यूजन होता है. मिलिट्री की भाषा में सीबीयू-94/बी (क्लस्टर बम यूनिट) 'डिलीवरी बस' का काम करता है.यह एक बड़ा क्लैम-शेल डिस्पेंसर है जो बी-2 या एफ-35 एयरक्राफ्ट से लटका होता है. यह खुद ब्लैकआउट का कारण नहीं बनता. इसका एकमात्र काम असली हथियार, 202 छोटे सब-म्यूनिशन जिन्हें बीएलयू-114/बी कैनिस्टर के नाम से जाना जाता है, ले जाना और उन्हें टारगेट एरिया के ऊपर हवा में छोड़ना है.