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राजधानी पटना इन दिनों धूल की गंभीर समस्या से जूझ रही है। शहर के विभिन्न हिस्सों में चल रहे निर्माण कार्यों के दौरान निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं होने से हवा में धूल कणों का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड

News Pratyaksh | Updated : Thu 09th Apr 2026, 12:29 pm
राजधानी पटना इन दिनों धूल की गंभीर समस्या से जूझ रही है। शहर के विभिन्न हिस्सों में चल रहे निर्माण कार्यों के दौरान निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं होने से हवा में धूल कणों का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वायु प्रदूषण से स्थिति गंभीर हो सकती है। शहर में सड़क, नाला, भवन और अन्य आधारभूत संरचना से जुड़ी परियोजनाएं एक साथ चल रही हैं। इन निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए तय नियम जैसे ग्रीन नेट लगाना, नियमित पानी का छिड़काव, मलबे को ढंककर रखना का पालन अधिकांश जगहों पर नहीं हो रहा है।नतीजतन, तेज हवा के साथ धूल के गुबार आसपास के इलाकों में फैल रहे हैं। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी निर्माण स्थल पर धूल उड़ने से रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम करना अनिवार्य है। इसके बावजूद जिम्मेदार एजेंसियां इन नियमों को नजरअंदाज कर रही हैं।राजधानी की हवा को शुद्ध बनाने व धूलकणों से मुक्ति दिलाने के लिए नगर निगम वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त 30.39 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।इसी वर्ष स्वीकृति के बाद इस राशि के उपयोग के लिए पांच मुख्य क्षेत्रों को चिह्नित किया गया। मुख्य रूप से शहर की सड़कों को धूल मुक्त करना, हरियाली बढ़ाना व श्मशान घाटों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित किया जाएगा।