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जिलों में अवैध तरीके से वेतन निकासी मामले की जांच कर रही सीआइडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) अब एक-एक कर घोटाले की परत-दर-परत खोल रही है। तकनीकी साक्ष्य व दस्तावेज के हर पन्ने को पलट रही है।जिलों में जालसाजी मामले में महाले
News Pratyaksh | Updated : Thu 30th Apr 2026, 11:41 am
जिलों में अवैध तरीके से वेतन निकासी मामले की जांच कर रही सीआइडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) अब एक-एक कर घोटाले की परत-दर-परत खोल रही है। तकनीकी साक्ष्य व दस्तावेज के हर पन्ने को पलट रही है।जिलों में जालसाजी मामले में महालेखाकार कार्यालय की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। घोटाला वर्षों से चल रहा था। कई बार आडिट भी हुए होंगे, लेकिन महालेखाकार कार्यालय अब तक गड़बड़ी क्यों नहीं पकड़ सका।पूर्व के आडिट की बात छोड़ें, ताजा मामला इसी वर्ष फरवरी महीने की है। महालेखाकार कार्यालय की एक टीम बोकारो में आडिट करने गई थी। टीम में एक महिला सदस्य भी थी, जिसने गड़बड़ी पकड़ी थी, इसके बावजूद टीम ने बोकारो एसपी कार्यालय को आडिट में क्लीन चिट दे दी थी।टीम रांची पहुंची और क्लीन चिट दिए जाने के बावजूद टीम की उस महिला सदस्य ने बोकारो में वित्तीय अनियमितता की शिकायत अपने वरीय पदाधिकारी से कर दी। उस महिला सदस्य की बदौलत ही इस मामले का भंडाफोड़ हुआ और अब एक-एक कर अन्य जिलों में भी भ्रष्टाचार व घोटाले उजागर होते जा रहे हैं।अवैध वेतन निकासी मामले में पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा के मुफ्फसिल थाने में 26 अप्रैल को कांड संख्या 69/2026 में दर्ज प्राथमिकी को टेकओवर करते हुए सीआईडी थाना रांची में कांड संख्या 07/2026 के तहत केस री-रजिस्टर्ड किया गया है।अवैध वेतन निकासी मामले में सीआइडी थाना रांची में यह तीसरा केस है। इससे पहले सीआइडी ने बोकारो स्टील सिटी थाना व हजारीबाग के लोहसिंघना थाने में दर्ज दो प्राथमिकियों को टेकओवर करते हुए केस री-रजिस्टर्ड किया था। चाईबासा के कोषागार पदाधिकारी सुमित कुमार के बयान पर यह प्राथमिकी दर्ज की गई है।उन्होंने अपनी शिकायत में बताया है कि प्रधान महालेखाकार कार्यालय ने डेटा की समीक्षा के क्रम में चाईबासा जिला कोषागार के अंतर्गत एसपी चाईबासा के डीडीओ कोड के माध्यम से कुछ बैंक खाता में मल्टीपल पेयी बनाकर वित्तीय कुछ वर्षों से 26 लाख 21 हजार 717 रुपये का अवैध लेन-देन पाया था।और इसकी विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आदेश दिया था। इसके लिए चाईबासा डीसी ने एक सात सदस्यीय जांच दल बनाया। जांच दल ने महालेखाकार कार्यालय की रिपोर्ट का सत्यापन किया था। जांच दल ने पाया था कि प्रथम दृष्ट्या एसपी पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा के लेखा शाखा में पदस्थापित सिपाही देवनारायण मुर्मू की संलिप्तता पाई गई है।उसने सरकारी दस्तावेज में छेड़छाड़ कर कंप्यूटर के माध्यम से डेटा में छेड़छाड़ कर धोखाधड़ी के उद्देश्य से सरकारी राशि का गबन व अवैध निकासी की है। उसने पद का दुरुपयोग कर विभिन्न खाता धारकों की मिलीभगत से साजिश के तहत धोखाधड़ी की है।