News Pratyaksh


भारत का गिग वर्किंग सेक्टर अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. जॉब प्लेटफॉर्म 'फाउंडिट' की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, गिग इकोनॉमी अब केवल कम कौशल वाले और अधिक संख्या वाले कामों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक विशेषज्ञता और क्षमता आधारित इकोसिस्टम म

News Pratyaksh | Updated : Wed 15th Apr 2026, 12:42 pm

भारत का गिग वर्किंग सेक्टर अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. जॉब प्लेटफॉर्म 'फाउंडिट' की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, गिग इकोनॉमी अब केवल कम कौशल वाले और अधिक संख्या वाले कामों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक विशेषज्ञता और क्षमता आधारित इकोसिस्टम में बदल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब कंपनियों का ध्यान हाई-स्किल रिमोट भूमिकाओं और टियर-2 शहरों के टैलेंट की तरफ तेजी से बढ़ रहा है.रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारत में व्हाइट-कॉलर गिग नौकरियों की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है. वित्त वर्ष 2025 (FY25) में यह संख्या 68 लाख थी, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 82.3 लाख हो गई है. अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 तक यह आंकड़ा 1.02 करोड़ (10.2 मिलियन) को पार कर जाएगा. अब 'प्रोजेक्ट-बेस्ड हायरिंग' यानी किसी खास प्रोजेक्ट के लिए विशेषज्ञों को नियुक्त करना कंपनियों के लिए एक सामान्य मॉडल बन चुका है.