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सिस्टेमैटिक्स के अनुसार, Q4 में राजस्व 12% बढ़ेगा, लेकिन अमेरिकी दवाओं के गिरते मुनाफे और बढ़ती लागत से कुल लाभ 14% तक घट सकता : भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) मिली-जुली रहने वाली है. दिग्गज ब्रोकरेज फर्म 'सिस

News Pratyaksh | Updated : Wed 15th Apr 2026, 12:44 pm

सिस्टेमैटिक्स के अनुसार, Q4 में राजस्व 12% बढ़ेगा, लेकिन अमेरिकी दवाओं के गिरते मुनाफे और बढ़ती लागत से कुल लाभ 14% तक घट सकता : भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) मिली-जुली रहने वाली है. दिग्गज ब्रोकरेज फर्म 'सिस्टेमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान हेल्थकेयर कंपनियों के राजस्व में एक अंकों की सम्मानजनक वृद्धि देखी जा सकती है, लेकिन मार्जिन और शुद्ध लाभ के मोर्चे पर भारी दबाव रहने की आशंका है.इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका में कैंसर की दवा 'रेवलिमिड' के जेनरिक संस्करण (gRevlimid) की एक्सक्लूसिविटी का खत्म होना है. अब तक यह दवा कई भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए ऊंचे मार्जिन और मोटी कमाई का जरिया थी. अब इस 'जेनरिक क्लिफ' की वजह से बड़ी निर्यातक कंपनियों के लिए बेस रिसेट हो रहा है, जिससे उनके कुल लाभ पर सीधा असर पड़ रहा है.एपीआई (API) निर्माता कंपनियां कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत का बोझ अब फॉर्मूलेशन बनाने वाली कंपनियों पर डाल रही हैं. फॉर्मूलेशन कंपनियां भी भविष्य की अनिश्चितता और आपूर्ति में रुकावट के डर से अपने पास इन्वेंट्री (स्टॉक) बढ़ा रही हैं. यह रणनीति उन्हें भविष्य के संकट से तो बचा सकती है, लेकिन फिलहाल उनकी कार्यशील पूंजी पर दबाव डाल रही है.