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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुद्रपुर में साल 2012 में 11 वर्षीय बच्चे का किडनैप करके परिजनों से फिरौती मांगने के बाद उसे मौत की घाट उतारने के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ती रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की

News Pratyaksh | Updated : Sat 06th Jun 2026, 12:34 pm
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुद्रपुर में साल 2012 में 11 वर्षीय बच्चे का किडनैप करके परिजनों से फिरौती मांगने के बाद उसे मौत की घाट उतारने के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ती रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने उसके खिलाफ कोई ठोस सबूतों न होने के कारण याचिका के विचाराधीन रहने तक अभियुक्त जगपाल को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं.
मामले के अनुसार जिला एवं सत्र न्यायाधीश रुद्रपुर ने संदीप शर्मा और जगपाल को 13 अगस्त 2015 को 11 वर्षीय बच्चे का अपहरण करने उसके बाद परिजनों से फिरौती मांगने फिर उसकी हत्या करने के जुर्म में आईपीसी की धारा 302, 364 अ के तहत आजीवन कारावास की सजा के साथ साथ 50-50 हजार रुपये का जुर्माने से दंडित किया था और धारा 201 के तहत 10-10 हजार का जुर्माना और तीन साल की सजा सुनवाई थी. बीते दिन इस मामले में जगपाल के द्वारा जमानत के लिए प्रार्थनापत्र पेश किया गया. जमानत प्रार्थनापत्र में उनके द्वारा कहा गया कि इस मामले के सह अभियुक्त संदीप शर्मा की जमानत आठ अगस्त 2024 को हो चुकी है.उसी के आधार पर उन्हें भी जमानत पर रिहा किया जाए. उनके खिलाफ सीडीआर की कॉल डिटेल के अलावा कोई ठोस सबूत नहीं है. वह 13 साल से जेल में बंद है. मृत बच्चे का डीएनए उसके माता पिता से मेल नहीं खाता है. सरकार की तरफ से जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्तों ने रुद्रपुर से 27 जुलाई 2012 को 11 वर्षीय बच्चे का अपहरण किया गया. परिजनों से फिरौती मांगी और बाद में उसकी हत्या मेरठ में कर दी. पुलिस ने मेरठ से उसका शव बरामद किया. घटना के ठीक 24 दिन बाद बच्चे की स्कूल की ड्रेस रुद्रपुर बस स्टैंड के पास मिली. बच्चा 27 जुलाई 2012 को गयाब हुआ था, 29 जुलाई को परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी. इसलिए सजा को बरकरार रखने के लिए पेश की गई सीडीआर की कॉल डिटेल ही काफी है. इसलिए इनकी जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाए