कटिहार सदर अस्पताल का आईसीयू वर्षों से बंद है : किसी भी विकसित देश और प्रगतिशील राज्य की रीढ़ उसकी स्वास्थ्य व्यवस्था होती है. सरकारें योजनाएं बनाती हैं, करोड़ों का बजट जारी होता है, चमचमाती इमारतें खड़ी की जाती हैं और फीते काटकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब इन दावों की हकीकत जमीन पर उतरती है, तो वे अक्सर प्रशासनिक उदासीनता और बदहाली का शिकार होकर दम तोड़ देती है.बिहार के कटिहार सदर अस्पताल का आईसीयू आज इसी कड़वी हकीकत का सबसे जीता-जागता और दर्दनाक उदाहरण बन चुका है. साल 2011 में जब इस हाई-टेक यूनिट का उद्घाटन हुआ था, तब इसे सीमांचल और कटिहार के लाखों गरीब मरीजों के लिए एक 'संजीवनी' के रूप में देखा गया था. उम्मीद थी कि अब गंभीर मरीजों को इलाज के लिए सिलीगुड़ी, पूर्णिया या पटना की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी.कटिहार सदर अस्पताल का आईसीयू अब स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का ऐसा प्रतीक बन गया है, जिसे देखकर लगता है कि इलाज की जरूरत मरीजों से ज्यादा खुद आईसीयू को है. करोड़ों रुपये की लागत से बना भवन, महंगी मशीनें और बड़े बड़े दावे- सब कुछ मौजूद है, बस मरीजों के इलाज की सुविधा गायब है.
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