आजकल दुनियाभर में कंप्यूटिंग की मांग तेज़ी से बढ़ रही है. ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड सर्विसेज़ और ऑनलाइन एजुकेशन जैसी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भारी-भरकम डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं, जिनमें नए सर्वर लगाए जाते हैं. इन सर्वर्स और डेटा सेंटर्स को बनाने के लिए एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है, जिसमें पर्यावरण पर पड़ने वाला बोझ. नए हार्डवेयर बनाने में ज़बरदस्त मात्रा में ऊर्जा, पानी और कच्चा माल शामिल है.इसी समस्या का एक अनोखा समाधान ढूंढा गया है. गूगल और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो के रिसर्चर्स ने इस बड़ी प्रॉब्लम का एक सॉल्यूशन ढूंढा है. उनका आइडिया है कि पुराने और बेकार पड़े स्मार्टफोन को एक साथ जोड़कर लो-कॉस्ट कंप्यूटिंग क्लस्टर तैयार करेंगे. आइए हम आपको इस आइडिया के बारे में विस्तार से बताते हैं.हमने से ज्यादातर लोग हर तीन-चार साल में अपना फोन बदल लेते हैं. पुराना फोन किसी दराज में बंद पड़ा रहता है या फिर कबाड़ में चला जाता है. हालांकि, कई लोग इस बात को नहीं जानते कि पुराने फोन का मदरबोर्ड कई सालों तक काम करने में सक्षम होता है. उसमें लगा प्रोसेसर, मेमोरी और स्टोरेज, ये सब मिलकर एक ठीक-ठाक कंप्यूटर की तरह काम कर सकते हैं. रिसर्चर्स का कहना है कि एक आधुनिक स्मार्टफोन के परफॉर्मेंस कोर की सिंगल-थ्रेडेड परफॉर्मेंस कई मामलों में आधुनिक मल्टीकोर सर्वर से भी बेहतर होती है.
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