बिहार में होलिका दहन को लेकर बीते कुछ दिनों से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई
News Pratyaksh | Updated : Mon 02nd Mar 2026, 11:59 am
बिहार में होलिका दहन को लेकर बीते कुछ दिनों से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन अब तस्वीर साफ हो गई है. पटना के ज्योतिषाचार्य पंडित राजन उपाध्याय ने बताया कि बनारस से प्रकाशित ऋषिकेश पंचांग के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च की रात्रि में किया जाएगा. उन्होंने बताया कि होलिका दहन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और इस बार यही तिथि 2 मार्च की रात में बन रही है. ऐसे में परंपरा और शास्त्रों के अनुसार उसी रात होलिका दहन करना शुभ माना जाएगा.ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार होलिका दहन का अति शुभ मुहूर्त 2 मार्च की रात्रि 12:50 बजे से लेकर 2:02 बजे तक रहेगा. शास्त्रों में कहा गया है कि होलिका दहन पूर्णिमा तिथि और भद्रारहित समय में करना श्रेष्ठ होता है. इस बार 2 मार्च की रात पूर्णिमा तिथि के साथ पूंछ की भद्रा का योग बन रहा है, जिसे शास्त्रों में दोषरहित माना गया है. इसलिए 2 मार्च की रात में किया गया होलिका दहन शास्त्र सम्मत और फलदायी होगा.पंडित राजन उपाध्याय ने बताया कि होलिका दहन के दिन विशेष उपाय भी किए जाते हैं. अगर कोई व्यक्ति नकारात्मक ऊर्जा से परेशान है या उसके कार्यों में बार-बार बाधा आ रही है, तो वह उजाला बताशा, पान का पत्ता, सुपारी और लौंग हाथ की मुट्ठी में लेकर उसे सिर पर सात बार एंटी क्लॉकवाइज घुमाकर जलती हुई होलिका में डाल सकता है. ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव और विघ्न बाधा दूर होने की मान्यता है. वहीं नौकरीपेशा लोगों के लिए बताया गया कि यदि नौकरी से जुड़ी परेशानी चल रही हो, तो जायफल, 16 पीस कमलगट्टा और एक लौंग को सात बार एंटी क्लॉकवाइज सिर पर घुमाकर होलिका में अर्पित करना लाभकारी माना गया है.पंडित राजन उपाध्याय ने यह भी स्पष्ट किया कि घड़ी के समय के अनुसार 12 बजे के बाद तारीख बदलकर 3 मार्च हो जाती है, लेकिन पंचांग के अनुसार नई तिथि सूर्योदय के बाद ही मानी जाती है. इस कारण पंचांग की दृष्टि से यह समय अभी भी 2 मार्च की पूर्णिमा तिथि में ही आता है. उन्होंने बताया