Health


पटना में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ा? 5 दिन में दो महिलाओं की रिपोर्ट पॉजिटिव

News Pratyaksh | Updated : Tue 18th Aug 2026, 12:41 pm
पटना में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ा? 5 दिन में दो महिलाओं की रिपोर्ट पॉजिटिव पटना: नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी NMCH के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की जांच में एक और महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। सोमवार को टॉक्सोप्लाज्मा लैब में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण के चार संदिग्ध मरीजों के नमूनों की जांच की गई। इनमें खुशरूपुर की 31 वर्षीय महिला की रिपोर्ट लेप्टोस्पायरोसिस IgM के लिए पॉजिटिव आई है। विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार के मुताबिक, महिला फिलहाल NMCH के औषधि विभाग में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है। खास बात यह है कि पांच दिनों के भीतर लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण का यह दूसरा पॉजिटिव मामला सामने आया है। इससे पहले 13 अगस्त को अगमकुआं निवासी 48 वर्षीय महिला की जांच रिपोर्ट भी लेप्टोस्पायरोसिस IgM के लिए पॉजिटिव मिली थी। वह भी अस्पताल के औषधि विभाग में भर्ती थी। बिहार में NMCH में जांच की सुविधा डॉ. संजय कुमार ने बताया कि बिहार के सरकारी अस्पतालों में फिलहाल NMCH में लेप्टोस्पायरोसिस की जांच की सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल को इस संक्रमण के लिए निगरानी केंद्र भी बनाया गया है। सरकारी अस्पताल में भर्ती किसी मरीज में लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण पाए जाने पर NMCH में उसकी निःशुल्क जांच कराई जा सकती है। चूहे और दूषित पानी से संक्रमण का खतरा लेप्टोस्पायरोसिस एक ऐसा संक्रमण है जो संक्रमित चूहों और अन्य पशुओं के मल-मूत्र, दूषित पानी या संक्रमित मिट्टी के संपर्क में आने से इंसानों तक पहुंच सकता है। बारिश और बाढ़ के दौरान इसका खतरा बढ़ सकता है। बाढ़ का पानी आबादी वाले इलाकों में पहुंचने पर जंगली चूहे सुरक्षित जगह की तलाश में घरों और शहरों की तरफ आ सकते हैं। ऐसे में लोगों को दूषित पानी और गंदे पानी के संपर्क से बचने और किसी भी संदिग्ध लक्षण की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।

धनबाद में बच्चों के इलाज की बड़ी पहल, 18 साल तक के बच्चों का मुफ्त इलाज और सर्जरी

News Pratyaksh | Updated : Wed 12th Aug 2026, 12:20 pm
धनबाद में बच्चों के इलाज की बड़ी पहल, 18 साल तक के बच्चों का मुफ्त इलाज और सर्जरी धनबाद: सदर अस्पताल में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ी पहल शुरू की गई है। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में जन्मजात बीमारी, हृदय, आंख, कान, हाथ-पैर और दांत से जुड़ी गंभीर समस्याओं का इलाज अब मुफ्त कराया जाएगा। इसके लिए सदर अस्पताल में 11 से 22 अगस्त तक विशेष RBSK जांच एवं उपचार शिविर लगाया गया है। जिन बच्चों का इलाज सदर अस्पताल में संभव नहीं होगा, उन्हें जरूरत के अनुसार बाहर के अस्पतालों में मुफ्त सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 700 बच्चों की हो चुकी है स्क्रीनिंग पिछले तीन से चार महीनों में जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब 700 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। अब इन बच्चों को उनकी बीमारी के आधार पर चरणबद्ध तरीके से उपचार और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की सुविधा दी जाएगी। मॉड्यूलर आयुष्मान वार्ड समेत कई सुविधाओं की शुरुआत बुधवार को धनबाद सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया गया। उपायुक्त आदित्य रंजन और उप विकास आयुक्त सनी राज ने मॉड्यूलर आयुष्मान वार्ड, पार्किंग शेड और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के विशेष जांच शिविर का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद अधिकारियों ने अस्पताल का निरीक्षण किया और रजिस्ट्रेशन काउंटर समेत मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। जन्मजात बीमारी से लेकर हृदय और आंखों की समस्या का इलाज RBSK कैंप के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में गंभीर बीमारियों की पहचान कर उन्हें इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। जन्मजात बीमारी, हृदय रोग, आंख, कान, हाथ-पैर और दांत से जुड़ी समस्याओं के इलाज के साथ जरूरत पड़ने पर सर्जरी भी मुफ्त कराई जाएगी।

गढ़चिरौली: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में एक दर्दनाक हादसे में सांप के काटने से तीन छात्राओं की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य छात्राओं का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना धनोरा तालुका के जपतलाई स्थित आवासीय आश्रम स्क

News Pratyaksh | Updated : Mon 10th Aug 2026, 12:34 pm
गढ़चिरौली: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में एक दर्दनाक हादसे में सांप के काटने से तीन छात्राओं की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य छात्राओं का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना धनोरा तालुका के जपतलाई स्थित आवासीय आश्रम स्कूल की है। जानकारी के मुताबिक, छात्राएं रात में खाना खाने के बाद स्कूल के आवासीय परिसर में सो गई थीं। रात करीब 2 से 2:30 बजे के बीच कुछ छात्राओं के सांप के काटने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद स्कूल प्रशासन ने तत्काल घायल छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया। इलाज के दौरान कक्षा 6 की दीपिका लकड़ा और कक्षा 8 की सुष्मिता मंडल की धनोरा अस्पताल में मौत हो गई। वहीं कक्षा 2 की अनु कोरेटी, जिनका गढ़चिरौली जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था, उन्होंने भी दम तोड़ दिया। वहीं कक्षा 5 की दीपिका मडावी, कक्षा 6 की कविता किरंगा और कक्षा 8 की समृद्धि सुरेश नैतम का गढ़चिरौली जिला अस्पताल में इलाज जारी है। इनमें समृद्धि नैतम की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद स्कूल प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच की जा रही है और घटना के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है।

रांची सदर अस्पताल की बड़ी सफलता: जटिल स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर का सफल ऑपरेशन, महिला को मिली नई जिंदगी

News Pratyaksh | Updated : Wed 29th Jul 2026, 01:11 pm
रांची सदर अस्पताल की बड़ी सफलता: जटिल स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर का सफल ऑपरेशन, महिला को मिली नई जिंदगी रांची: राजधानी रांची सदर अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग ने एक बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर से पीड़ित 57 वर्षीय महिला को नई जिंदगी दी है। मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद की रहने वाली बिंदु देवी पिछले तीन वर्षों से इस गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। ट्यूमर के कारण उनके दोनों हाथों की ताकत लगभग खत्म हो गई थी, जबकि धीरे-धीरे पैरों में भी कमजोरी बढ़ रही थी। हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि वह लंबे समय से बिस्तर पर रहने को मजबूर थीं। तीन साल तक बड़े अस्पतालों के चक्कर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश कुमार सिंह ने बताया कि परिजनों ने बेहतर इलाज की उम्मीद में मरीज को बीएचयू, वाराणसी, पटना के कई बड़े अस्पतालों और एजीपीजीआई तक दिखाया। इलाज पर 7 से 8 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं मिल सका, क्योंकि ट्यूमर की स्थिति बेहद जटिल थी। रांची सदर अस्पताल में मिली नई उम्मीद कई अस्पतालों से निराश होने के बाद बिंदु देवी को रांची सदर अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया, जहां न्यूरोसर्जन डॉ. विकास कुमार और उनकी टीम ने जांच के बाद इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन का निर्णय लिया। डॉ. विकास कुमार ने बताया कि ट्यूमर सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड के अंदर स्थित था, इसलिए ऑपरेशन के दौरान स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान पहुंचने का गंभीर खतरा था। विशेषज्ञता और अत्यधिक सावधानी के साथ यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई। ऑपरेशन के बाद तेजी से सुधार सर्जरी के दो से तीन दिन बाद ही मरीज के हाथों और पैरों में धीरे-धीरे ताकत लौटने लगी। फिलहाल बिंदु देवी की स्थिति में काफी सुधार है और वह अपने दोनों हाथों को पूरी तरह उठा पा रही हैं। परिजनों ने इसे उनके लिए "नई जिंदगी" मिलने जैसा बताया। इस सफल ऑपरेशन में एनेस्थीसिया टीम की भी अहम भूमिका रही, जिसमें डॉ. ज्योतिका, रमीज, सोहेल, संजू, अमन और पूनम सहित अन्य चिकित्सा कर्मियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है,

News Pratyaksh | Updated : Sat 13th Sep 2025, 10:59 am
नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसमें दवा निर्माताओं और मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि जिन दवाओं पर हाल ही में GST दर में कटौती हुई है, उनके अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में तुरंत बदलाव किया जाए. इस कदम का उद्देश्य है कि टैक्स में कटौती का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे और उन्हें दवाओं पर कम खर्च करना पड़े.NPPA के अनुसार, जब सरकार किसी दवा पर GST या अन्य टैक्स घटाती है, तो उस दवा की MRP को उसी अनुपात में घटाना अनिवार्य होगा. इससे दवाओं की कीमतों में वास्तविक कमी आएगी और उपभोक्ता तुरंत इसका लाभ उठा सकेंगे. इस आदेश के तहत, कंपनियों को केवल संशोधित प्राइस लिस्ट जारी करके रिटेलर्स और राज्य नियंत्रकों तक पहुंचाना होगा. NPPA ने स्पष्ट किया है कि पहले से तैयार और स्टॉक में रखी गई दवाओं का रीलेबलिंग, रीस्टिकरिंग या रीकॉल अनिवार्य नहीं है. यह कदम स्वैच्छिक आधार पर किया जा सकता है, बशर्ते कंपनियां आदेश में तय शर्तों का पालन करें.विशेष रूप से, हाल ही में GST दरों में बदलाव के कारण दवाओं की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है. उदाहरण के तौर पर, कुछ दवाओं पर GST दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है, जबकि कुछ जीवनरक्षक दवाओं पर 5% से शून्य प्रतिशत GST लागू किया गया है. इस कटौती से मरीजों और आम उपभोक्ताओं को सीधे आर्थिक राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें अब दवाओं पर पहले की तुलना में कम खर्च करना होगा.NPPA ने यह भी स्पष्ट किया है कि कंपनियों को महंगी रि-लेबलिंग या स्टिकरिंग की आवश्यकता नहीं होगी. बस संशोधित प्राइस लिस्ट जारी करना पर्याप्त होगा, जिससे कानूनी अनुपालन भी सुनिश्चित होगा और कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा.विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम फार्मास्यूटिकल सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने और दवाओं को आम जनता के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है. इससे उपभोक्ताओं के लिए जीवन रक्षक दवाओं की पहुंच आसान होगी और वे आर्थिक रूप से भी लाभान्वित होंगे. स आदेश के बाद, बाजार में दवाओं की कीमतों में वास्तविक गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे मरीजों के लिए इलाज सस्ता और किफायती होगा. NPPA का यह निर्णय उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और यह दवाओं की उपलब्धता तथा कीमतों में संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.कुल मिलाकर, NPPA का यह आदेश उपभोक्ताओं को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने, टैक्स में कटौती का सीधा लाभ देने और फार्मास्यूटिकल उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.