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बिहार में कैमूर में दहड़ेंगे बाघ !

News Pratyaksh | Updated : Thu 28th Sep 2023, 03:56 pm
बिहार में कैमूर में दहड़ेंगे बाघ ! बिहार के पश्चिम चंपारण वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के बाद अब कैमूर वन्यजीव अभयारण्य बनने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की कुछ आपत्तियों के बाद बिहार सरकार फिर से प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है। बताया जाता है कि सब कुछ सही रहा तो इसी साल के अंत में इस अभयारण्य को मान्यता मिल जाएगी। इस अभयारण्य में बाघों के रहने के लिए 450 वर्ग किलोमीटर जंगल को चिह्नित किया गया है। जबकि, पहले 900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चिह्नित था। इसके साथ ही 1,050 वर्ग किमी में बफर जोन बनाया जाएगा। वर्तमान में कैमूर के वन क्षेत्रों में भालू, तेंदुआ, हिरण सहित कई जानवरों की मौजूदगी बताई जाती है। इसके अलावा यहां विभिन्न प्रकार के प्रवासी पक्षी भी आते रहते हैं। कैमूर वन क्षेत्र काफी बड़ा है और इसकी सीमा झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जंगलों से मिलती है। ऐसी स्थिति में टाइगर रिजर्व जुड़े होने से यहां बाघों का आना-जाना लगा रहता है। #newspratyaksh #bihar #tiger  

क्रिकेट में भारत की बेटियों ने जीता स्वर्ण, फाइनल में श्रीलंका को 19 रनों से हराया!

News Pratyaksh | Updated : Mon 25th Sep 2023, 01:01 pm
क्रिकेट में भारत की बेटियों ने जीता स्वर्ण, फाइनल में श्रीलंका को 19 रनों से हराया: एशियन गेम्स के फाइनल मुकाबले में भारतीय महिला टीम ने श्रीलंका को 19 रन से हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया है. एशियन गेम्स में शूटिंग के बाद भारत को यह दूसरा गोल्ड मेडल मिला है. बता दें कि पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय महिला ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 116 रन बनाए थे, जिसके बाद श्रीलंका को 117 रनों का टारगेट मिला था. श्रीलंकाई महिला टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 97 रन ही बना सकी. भारतीय टीम 19 रन से मैच जीतने में सफल रही. स्मृति मंधाना और जेमिमा रोड्रिग्स ने मैच में क्रमशः 46 और 42 रन बनाए जबकि टिटास साधु ने तीन विकेट लेकर भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने की कहानी लिखी. पहली बार भारतीय महिला टीम ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने का कमाल कर दिखाया है. इससे पहले श्रीलंका के खिलाफ टॉस जीतकर भारतीय महिला टीम ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था. भारतीय महिला टीम XI: स्मृति मंधाना, शैफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, देविका वैद्य, अमनजोत कौर, पूजा वस्त्राकर, तितास साधु, राजेश्वरी गायकवाड़ श्रीलंका महिला टीम XI: चमारी अथापथु (कप्तान), अनुष्का संजीवनी (विकेटकीपर), विशमी गुणरत्ने, नीलाक्षी डी सिल्वा, हासिनी परेरा, ओशादी रणसिंघे, इनोका रणवीरा, कविशा दिलहारी, उदेशिका प्रबोधनी, सुगंधिका कुमारी, इनोशी प्रियदर्शनी #newspratyaksh #womencricket #gold #victory

करमा पूजा का रहस्य! कुंवारी लड़कियां ही उठाती हैं जावा, इसके पीछे है गूढ़ रहस्य!

News Pratyaksh | Updated : Fri 22nd Sep 2023, 12:00 am
करमा पूजा का रहस्य! कुंवारी लड़कियां ही उठाती हैं जावा, इसके पीछे है गूढ़ रहस्य! करमा पूजा में डाली उठाने का कार्य कन्याएं ही करती हैं| इसके पीछे भी एक गूढ़ रहस्य निहित है| कन्याएं धरती का ही रूप मानी जाती हैं| बीज धारण करने की क्षमता धरती में होती है और वैसे ही सृष्टि को आगे बढ़ाने का सामर्थ्य नारी में है| महान प्रकृति पर्व 'करमा' में प्रधान रूप से चार महत्वपूर्ण और अनिवार्य तत्त्व हैं- जावा डाली, करम डाइर, अनगिनत जावा गीत और करमा-धरमा की धर्मकथा| समस्त पर्व में इन तत्त्वों की अपनी अपनी महत्ता है| जावा डाली इस पर्व के विदित है| जावा डाली झारखंड की बहनों द्वारा विधि विधान से नदी के बालू में एक उथरी टोकरी में सघन रूप से बुने गए बीजों के अंकुरण और प्रारंभिक पल्लवन का नाम है| कर् माएकादशी के नौ दिन, सात दिन या पांच दिन पूर्व जावा डाली के उठाने की प्रक्रिया होती है| इस महानतम पर्व के इस प्राण तत्त्व में गहरा दर्शन समाहित है| कन्याएं ही क्यों उठाती हैंडाली? वस्तुतः जावा डाली के द्वारा हम बीजों की पूजा करते हैं| बीज, सृष्टि का आधार हैं| जैव जगत की निरंतरता के लिए बीज की अनिवार्यता है| इसी परम सत्य को जावा डाली के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है| इस पर्व में डाली उठाने का कार्य कन्याएं ही करती हैं| इसके पीछे भी एक गूढ़गू रहस्य निहित है| कन्याएं धरतीस्वरूपा हैं| बीज धारण करनेकी क्षमता धरती में होती हैऔर इसी तरह सृष्टि को आगे बढ़ाने का सामर्थ्य नारी में है| इस परम सत्य को सांकेतिक तौर पर कन्याओं को बताया जाता है| जावा डाली इसी सत्य का प्रतीक है| अप्पकी जानकारी के लिए, जावा डाली में अधिकतम नौ प्रकार के बीजों के वपण का विधान है, और नौ सबसे बड़ी मूल संख्या होने के कारण पूर्णता का द्योतक है| अर्थात जावा डाली में समस्त बीजों की अभ्यर्थना की जाती है| बीजों में निहित शक्ति और उसकी महिमा का वंदन किया जाता है. करम पर्वका पहला गीत “इति- इति जावा किया-किया जावा...सेहो रेजावा एक पाता सइ रे..” बीज की महत्ता को निरूपित करता है| जानिए करमा-धरमा की कहानी! इस पर्वका दूसरा अनिवार्य तत्व है करम डाइर|उपवास की रात अखरा में 'करम' वृक्ष की डाली को स्थापित किया जाता है| इसका मतलब होता है की, भाइयों को, अर्थात्पुरुष वर्ग को अपने कर्मों दायित्वों के प्रति गड़े करम डाल की तरह अडिग रहना, जीवन के कर्मों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहना| उपवास की रात को करम अखरा में वाचन-श्रवण की जाने वाली 'करमा-धरमा' की लोक कथा इस महान पर्व की धर्मकथा है| इसमें निहित संदेश शाश्वत जीवन-दर्शन से युक्त है| इसमें बताया गया है कि मानव जीवन में कर्म के साथ धर्म का समन्वय आवश्यक है| केवल कर्म से हम भौतिक परिणाम तो पा सकते हैं, पर कर्मों को यदि नीति और आदर्श से हीन कर दें तो उसकी कोई महत्ता नहीं रह जाती है| धर्महीन व्यक्ति की उपयोगिता नष्ट हो जाती है, उसका जीवन विकृत-विद्रूपद्रू हो जाता है| कथा में करम गोसाईं के रूठ कर 'सात समुंदर टापुपार' चले जाने का प्रसंग भी हमें धर्म विहीन जीवन में खुशियों के रूठ जाने की प्रतीकात्मक सीख देता है| #newspratyaksh #KarmaPuja  
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