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कनाडा के मरीनलैंड में बची हुई 30 कैद बेलुगा के पास इंतज़ार करने के अलावा कुछ नहीं है। कहा जाता है कि यह पहले दिवालिया हो चुका टूरिस्ट स्पॉट विज़िटर्स के लिए बंद है, इसलिए व्हेल अपने खराब होते तालाबों के चारों ओर चक्कर लगा रही हैं, जबकि पार्क के मालिक -- ज

News Pratyaksh | Updated : Wed 26th Nov 2025, 11:35 am
कनाडा के मरीनलैंड में बची हुई 30 कैद बेलुगा के पास इंतज़ार करने के अलावा कुछ नहीं है। कहा जाता है कि यह पहले दिवालिया हो चुका टूरिस्ट स्पॉट विज़िटर्स के लिए बंद है, इसलिए व्हेल अपने खराब होते तालाबों के चारों ओर चक्कर लगा रही हैं, जबकि पार्क के मालिक -- जिन्होंने बेलुगा को यूथेनाइज़ करने की चौंकाने वाली धमकी दी थी -- सरकार से इस बात पर बहस कर रहे हैं कि आगे क्या होगा। मशहूर नियाग्रा फॉल्स के पास मरीनलैंड कभी एक फायदेमंद थीम पार्क था. इसका कैची जिंगल, जो "एवरीवन लव्स मरीनलैंड" टैगलाइन पर आधारित है, कैनेडियन टेलीविजन पर एक मेन इवेंट था.लेकिन यह पार्क सालों से विवादों में घिरा रहा है, और इस महीने की शुरुआत में एक विजिट के दौरान इसके डरावने खाली रास्ते बाहर से दिखाई दे रहे थे.कैनेडियन प्रेस के एक टैली के अनुसार, 2019 से, मरीनलैंड में 19 बेलुगा सहित 20 जानवरों की मौत हो चुकी है.पार्क ने कहा है कि सभी मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं, लेकिन ओंटारियो प्रांत के एनिमल वेलफेयर अधिकारी पांच साल से मरीनलैंड की जांच कर रहे हैं और पार्क के वॉटर सिस्टम को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. कैद में पली-बढ़ी होने के कारण, व्हेल शायद जंगल में जिंदा नहीं रह पाएंगी.मरीनलैंड को लगा कि उसके पास पिछले महीने एक सॉल्यूशन है, जब उसने बेलुगा को चीन के चिमेलोंग ओशन किंगडम थीम पार्क में एक्सपोर्ट करने की योजना की घोषणा की.कनाडा की फेडरल सरकार ने उस आइडिया को रोक दिया, और उस सॉल्यूशन को खारिज कर दिया, जिसके बारे में उसने कहा कि यह व्हेल का शोषण जारी रखता है.इस मामले को और बढ़ाते हुए, मरीनलैंड ने घोषणा की कि वह "पूरी तरह से कर्ज़ में डूबा हुआ है और व्हेल की ठीक से देखभाल करने के लिए उसके पास तेजी से रिसोर्स खत्म हो रहे हैं."एक बयान में कहा गया, "इस समय हमारे पास सिर्फ़ दो ऑप्शन हैं, या तो व्हेल को दूसरी जगह ले जाना या फिर यूथेनेशिया के खतरनाक फैसले का सामना करना."मैरिनलैंड ने AFP की अगले कदमों के बारे में कमेंट के लिए बार-बार की रिक्वेस्ट को मना कर दिया है. मैरिनलैंड के एक पुराने ट्रेनर और अब व्हिसलब्लोअर फिल डेमर्स ने पार्क में कथित गलत कामों को डॉक्यूमेंट करने का काम किया है. उन्होंने AFP को बताया कि यूथेनेशिया की धमकी "असली नहीं है."उन्होंने कहा, "यह गैर-कानूनी है. कोई भी कभी भी ऐसे घिनौने काम में हिस्सा नहीं लेगा." डेमर्स ने जोर देकर कहा कि पार्क सिर्फ़ मुनाफे के लिए है, और व्हेल को बेचना चाहता है. फिर भी, उन्होंने कहा कि बेलुगा को दूसरे पार्क में ले जाने का मैरिनलैंड का प्लान, जिसमें शायद चीन का पार्क भी शामिल हो, ही एकमात्र सही ऑप्शन था.

बेंगलुरु में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से केरल के दो नर्सिंग स्टूडेंट्स की दर्दनाक मौत हो गई:

News Pratyaksh | Updated : Mon 24th Nov 2025, 11:32 am
बेंगलुरु में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से केरल के दो नर्सिंग स्टूडेंट्स की दर्दनाक मौत हो गई: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के चिक्काबनवारा रेलवे स्टेशन के पास वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से केरल के दो नर्सिंग स्टूडेंट्स की मौत हो गई.पुलिस ने बताया कि रविवार शाम को बेंगलुरु के चिक्काबनवारा रेलवे स्टेशन के पास वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से केरल के दो नर्सिंग स्टूडेंट्स की मौत हो गई.स्टूडेंट जस्टिन जोसेफ (21) और स्टेरिन एल्ज़ा साजी (19) की ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई. चिक्काबनवारा पुलिस ने इस बारे में केस दर्ज कर लिया है और मरने वालों के माता-पिता को इसकी जानकारी दे दी है.दोनों केरल के पट्टनमथिट्टा के रहने वाले थे और बेंगलुरु के सप्तगिरी नर्सिंग कॉलेज में B.Sc नर्सिंग के दूसरे सेमेस्टर में पढ़ रहे थे. रविवार शाम को चिक्काबनवारा स्टेशन के पास ट्रैक पार करते समय सुपरफास्ट वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन ने उन्हें टक्कर मार दी. इस वजह से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई.पुलिस ने मौके पर जाकर बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है. मरने वालों की डिटेल्स वेरिफाई करने के बाद उनके माता-पिता को इसकी जानकारी दे दी गई है.पुलिस ने बताया कि चश्मदीदों ने बताया कि यह हादसा तब हुआ जब स्टूडेंट्स ने तेज स्पीड से आ रही ट्रेन के आने पर ट्रैक पार करने की कोशिश की, और वे ट्रैक से हट नहीं पाए.

भारतीय नौसेना में आज स्वदेशी जल युद्धक पोत INS माहे शामिल होने जा रहा है. आर्मी चीफ उपेन्द्र द्विवेदी के हाथों इसकी कमिशनिंग होगी. यह पहला मौका है, जब आर्मी चीफ के हाथों नौसेना के युद्धपोत की कमीशनिंग की जा रही है.INS माहे को समंदर का ‘Silent Hunter’ कहा

News Pratyaksh | Updated : Mon 24th Nov 2025, 11:28 am
भारतीय नौसेना में आज स्वदेशी जल युद्धक पोत INS माहे शामिल होने जा रहा है. आर्मी चीफ उपेन्द्र द्विवेदी के हाथों इसकी कमिशनिंग होगी. यह पहला मौका है, जब आर्मी चीफ के हाथों नौसेना के युद्धपोत की कमीशनिंग की जा रही है.INS माहे को समंदर का ‘Silent Hunter’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निशाना बनाने में बेहद सक्षम है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करता है. तेज गति, उन्नत सेंसर, आधुनिक हथियार और दुश्मन के जलीय लक्ष्यों पर सटीक प्रहार- INS माहे तटीय सुरक्षा को एक नई धार देगा.

म्यांमार में चल रहे साइबर गुलामी रैकेट से भारतीय नागरिकों को छुड़ाने की कार्रवाई लगातार जारी है

News Pratyaksh | Updated : Mon 24th Nov 2025, 11:27 am
म्यांमार में चल रहे साइबर गुलामी रैकेट से भारतीय नागरिकों को छुड़ाने की कार्रवाई लगातार जारी है. हाल ही में म्यांमार आर्मी ने वहां फंसे 360 भारतीयों को मुक्त कराया जिनमें बिहार के 6 युवक भी शामिल थे. ये सभी मयवादी के के.के. पार्क से छुड़ाए गए. म्यांमार आर्मी ने इन्हें सुरक्षित थाईलैंड भेजा जहां से 18 नवंबर को इन सभी को दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया. दिल्ली पहुंचने के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOW) की टीम ने बिहार के युवकों को अपने संरक्षण में लिया और पूछताछ के बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया. इसी समूह में शामिल था गया जिले के डेल्हा निवासी धर्मेंद्र कुमार. पुणे की कंपनियों में काम कर चुके धर्मेंद्र का रोजगार छूट गया था और नई नौकरी की तलाश उन्हें धोखेबाज एजेंटों के जाल में खींच ले गई.धर्मेंद्र बताते हैं-मुझे यकीन नहीं था कि मैं जिंदा बचकर आ पाऊंगा. इंडियन एंबेसी और म्यांमार आर्मी ने हमें मौत से खींचकर बाहर निकाला. उनकी कहानी झकझोर देने वाली है. नौकरी के नाम पर विदेश जाने का सपना कैसे मिनटों में किडनैपिंग, हथियारबंद गिरोह और साइबर गुलामी में बदल गया. धर्मेंद्र बताते हैं कि एक दोस्त ने उन्हें मुजफ्फरपुर निवासी शुभम कुमार से संपर्क करवाया. शुभम ने थाईलैंड में चाइनीज कंपनी में हाई पैकेज जॉब का लालच दिया. ऑनलाइन और वीडियो कॉल के माध्यम से कई इंटरव्यू हुए. अंतिम इंटरव्यू के लिए थाईलैंड बुलाया गया. 19 अक्टूबर को टिकट बना-पटना से कोलकाता और फिर बैंकॉक.20 अक्टूबर को बैंकॉक एयरपोर्ट पर एक ड्राइवर मिला, जिसने धर्मेंद्र को एक फाइव-स्टार होटल में छोड़ा. वहां फिर इंटरव्यू हुआ और सब कुछ प्रोफेशनल और असली लगता रहा. लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने धर्मेंद्र की जिंदगी उलट दी. दूसरा ड्राइवर एक चमचमाती कार लेकर आया. धर्मेंद्र को लगा कि अब जॉब मिलने वाला है. कार पहाड़ी रास्तों पर पहुंची, फिर उबड़-खाबड़ इलाके में. अचानक कई हथियारबंद लोग घिर आए और गन प्वाइंट पर किडनैप कर लिया गया.धर्मेंद्र को और 4-5 युवकों को कई घंटे पैदल पहाड़ी रास्ते से ले जाया गया. कई विदेशी दिखने वाले बाइकर रास्ते पर तैनात थे. उन्हें एक गेस्ट हाउस में तीन दिन तक बंद कर दिया गया. बाद में पता चला- वे म्यांमार में घुस चुके थे. यहां उनका असली मकसद सामने आया- उन्हें साइबर गुलामी के लिए अगली जगह ‘बेचा’ जाना था.तीसरे दिन अचानक म्यांमार आर्मी और पुलिस की बड़ी कार्रवाई हुई. धर्मेंद्र और अन्य युवकों को वहां से सुरक्षित निकाल लिया गया. धर्मेंद्र बताते हैं- छापा पड़ने पर हमें लगा कि शायद गोलियां चलेंगी, लेकिन वही हमारी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट था. आर्मी ने हमें बचा लिया. छापेमारी के दौरान पुलिस ने वहां पहले से फंसे हुए कई विदेशी नागरिकों-फिलीपींस, नेपाल, बांग्लादेश सहित सभी को भी मुक्त कराया.सभी भारतीयों को पहले म्यांमार में सुरक्षित कैंप में रखा गया. इंडियन एंबेसी के सहयोग से उन्हें थाईलैंड भेजा गया. वहां से 18 नवंबर को दिल्ली एयरलिफ्ट किया गया. आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने सभी 6 बिहारी युवकों को पटना लाकर जांच की और परिवारों को सौंप दिया. धर्मेंद्र बताते हैं- अगर देर होती तो हमें दूसरी साइबर कंपनियों को बेच दिया जाता. वहां जो होता वह सोचकर भी डर लगता है.

रूस ने शुक्रवार तड़के कीव पर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया. इसमें 6 लोगों की मौत हो गई. इस हमले में अपार्टमेंट की इमारतों में बड़े-बड़े छेद हो गए और आग लग गई

News Pratyaksh | Updated : Sat 15th Nov 2025, 11:51 am
रूस ने शुक्रवार तड़के कीव पर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया. इसमें 6 लोगों की मौत हो गई. इस हमले में अपार्टमेंट की इमारतों में बड़े-बड़े छेद हो गए और आग लग गई. विस्फोटों की आवाज पूरे शहर में गूंज उठी और रात का आसमान जगमगा उठा.यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि एक गर्भवती महिला समेत कम से कम 35 लोग घायल हुए हैं. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने रात के हमले में कम से कम 430 ड्रोन और 18 मिसाइलों का इस्तेमाल किया.शुक्रवार का हवाई हमला, जिसमें दक्षिण में ओडेसा और उत्तर-पूर्व में खार्किव को भी निशाना बनाया गया था. ये हमला राजधानी कीव पर लक्षित था, जहां जेलेंस्की के अनुसार, ड्रोन और मिसाइलों ने ऊंची इमारतों वाले अपार्टमेंट ब्लॉकों को तहस-नहस कर दिया.उन्होंने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में कहा, "यह लोगों और नागरिकों को यथासंभव नुकसान पहुंचाने के लिए एक विशेष रूप से सुनियोजित हमला था." मास्को ने नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने से इनकार किया है. रूसी रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि उसने यूक्रेन के "सैन्य-औद्योगिक और ऊर्जा प्रतिष्ठानों" पर रात भर हमला किया. यूक्रेनी अधिकारियों ने इन दावों का मजाक उड़ाया और घरों और सार्वजनिक भवनों को बार-बार नुकसान पहुंचाया.यह हमला लगभग तीन हफ़्तों में कीव पर सबसे बड़ा हमला था. कड़ाके की ठंड के महीनों से पहले, हाल के रूसी हवाई हमलों का लक्ष्य देश भर में बिजली के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना रहा है. जेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेन ने हमले को नाकाम करने के लिए अपनी अमेरिकी निर्मित पैट्रियट वायु रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल किया और 14 मिसाइलों को मार गिराया. यूक्रेनी नेता ने विदेशी समर्थकों से और अधिक उन्नत प्रणालियां भेजने की अपील की है.रूस ने लगभग चार साल पहले अपने पड़ोसी देश यूक्रेन पर हुए व्यापक आक्रमण के बाद से उसके खिलाफ एक विनाशकारी हवाई अभियान चलाया है. इस साल लड़ाई रोकने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले राजनयिक प्रयास अब तक निष्फल रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा सुधारों पर अपने प्रशासन के आक्रामक प्रयासों पर अपना रुख नरम करते हुए अमेरिकी कार्यबल में महत्वपूर्ण पदों को भरने के लिए विशिष्ट

News Pratyaksh | Updated : Wed 12th Nov 2025, 12:03 pm
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा सुधारों पर अपने प्रशासन के आक्रामक प्रयासों पर अपना रुख नरम करते हुए अमेरिकी कार्यबल में महत्वपूर्ण पदों को भरने के लिए विशिष्ट विदेशी प्रतिभाओं को लाने की आवश्यकता को स्वीकार किया है.मंगलवार (स्थानीय समय) को फॉक्स न्यूज की होस्ट लॉरा इंग्राहम के साथ एक साक्षात्कार के दौरान, ट्रंप ने कुशल अप्रवासी श्रमिकों के मूल्य का बचाव करते हुए तर्क दिया कि अमेरिका लंबे समय से बेरोजगार अमेरिकियों को बिना व्यापक प्रशिक्षण के विनिर्माण और रक्षा क्षेत्र में जटिल भूमिकाओं के लिए पुनर्नियोजित नहीं कर सकता.अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि हालांकि वह अमेरिकी श्रमिकों के वेतन में वृद्धि का समर्थन करते हैं, फिर भी अमेरिका को अपनी औद्योगिक और तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए "इस प्रतिभा को लाना" होगा.जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या एच-1बी वीजा सुधार उनके प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकता होगी, तो उन्होंने कहा, "मैं सहमत हूं, लेकिन आपको भी इस प्रतिभा को लाना होगा."सितंबर की शुरुआत में, ट्रंप ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए. जिससे एच-1बी वीजा याचिका में बड़े बदलाव की शुरुआत हुई. घोषणापत्र के अनुसार, अब नए एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगेगा, जो लगभग 1,500 अमेरिकी डॉलर के पिछले स्तर से काफी अधिक है.अमेरिकी विदेश विभाग ने बाद में स्पष्ट किया कि नई शुल्क आवश्यकता केवल उन व्यक्तियों या कंपनियों पर लागू होगी, जो 21 सितंबर के बाद नई H-1B याचिकाएं दाखिल करेंगे या H-1B लॉटरी में प्रवेश करेंगे.मौजूदा वीजाधारकों और उस तिथि से पहले जमा की गई याचिकाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इस घोषणा के तहत, समय सीमा के बाद दायर की गई हर नई H-1B वीजा याचिका के साथ 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना होगा. इसमें 2026 लॉटरी में प्रवेश के लिए जमा की गई याचिकाएं भी शामिल हैं.
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