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कतर के प्रधानमंत्री ने रविवार को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से "दोहरे मानदंडों" को खारिज करने और इजराइल को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया. यह बात उन्होंने दोहा में हमास सदस्यों पर अभूतपूर्व इजराइली हमले के जवाब में बुलाई गई एक आपातकालीन शिखर बैठक की पूर्व संध्या

News Pratyaksh | Updated : Mon 15th Sep 2025, 11:26 am
कतर के प्रधानमंत्री ने रविवार को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से "दोहरे मानदंडों" को खारिज करने और इजराइल को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया. यह बात उन्होंने दोहा में हमास सदस्यों पर अभूतपूर्व इजराइली हमले के जवाब में बुलाई गई एक आपातकालीन शिखर बैठक की पूर्व संध्या पर कही.अमेरिका के एक सहयोगी द्वारा दूसरे देश की धरती पर किए गए इस घातक हमले ने आलोचनाओं की लहर पैदा कर दी. इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फटकार भी शामिल है, जिन्होंने समर्थन जताने के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो को इजराइल भेजा.सोमवार को अरब और इस्लामी नेताओं की आपातकालीन बैठक खाड़ी देशों के बीच एकता का एक स्पष्ट प्रदर्शन होगी और इजराइल पर और दबाव बनाने की कोशिश करेगी, जो पहले से ही गाजा में युद्ध और मानवीय संकट को समाप्त करने के लिए बढ़ती मांगों का सामना कर रहा है.कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने रविवार को एक तैयारी बैठक में कहा, "समय आ गया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय दोहरे मापदंड अपनाना बंद करे और इजराइल को उसके द्वारा किए गए सभी अपराधों के लिए दंडित करे." उन्होंने आगे कहा कि गाजा में इजराइल का "विनाश का युद्ध" सफल नहीं होगा."इजराइल को जारी रखने के लिए जो चीज प्रोत्साहित कर रही है... वह है उसकी चुप्पी, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की उसे जवाबदेह ठहराने में असमर्थता." सोमवार के शिखर सम्मेलन में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन के शामिल होने की उम्मीद है. फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास रविवार को दोहा पहुंचे.यह देखना बाकी है कि सऊदी अरब के वास्तविक शासक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस बैठक में शामिल होंगे या नहीं, हालांकि उन्होंने इस हफ़्ते की शुरुआत में पड़ोसी देशों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए कतर का दौरा किया था.तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने रविवार को अल जजीरा को बताया कि इज़राइल के व्यवहार का सवाल "अब सिर्फ़ फिलिस्तीन-इजराइल का मुद्दा नहीं रह गया है." उन्होंने कहा, "इस समय सबसे बड़ी समस्या इस क्षेत्र में इजराइली विस्तारवाद है. अरब और इस्लामी देशों को एक साथ आकर इस नई समस्या का समाधान निकालना होगा."हार्वर्ड के मिडिल ईस्ट इनिशिएटिव की फेलो एल्हम फाखरो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि खाड़ी देश "इस शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल वाशिंगटन से इजराइल पर लगाम लगाने का आह्वान करने के लिए करेंगे."न्होने आगे कहा, "वे इस आधार पर अमेरिका से और मजबूत सुरक्षा गारंटी की भी मांग करेंगे कि इजराइल की कार्रवाइयां मौजूदा आश्वासनों की अपर्याप्तता को उजागर करती हैं और एक सुरक्षा साझेदार के रूप में अमेरिका की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं."पेरिस के साइंसेज पो विश्वविद्यालय के मध्य पूर्व के व्याख्याता करीम बितार ने इस सम्मेलन को अरब और मुस्लिम नेताओं के लिए एक "लिटमस टेस्ट" बताया और कहा कि उनके कई समर्थक "पुरानी शैली की विज्ञप्तियों से तंग आ चुके हैं."उन्होंने कहा, "आज वे यही उम्मीद कर रहे हैं कि ये देश... न केवल इजराइल को, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका को भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण संकेत दें कि अब समय आ गया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इजराइल को यह खाली चेक देना बंद करे."क़तर इस क्षेत्र में सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे की मेज़बानी करता है, और इज़राइल-हमास युद्ध में संयुक्त राज्य अमेरिका और मिस्र के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण मध्यस्थता की भूमिका निभाता है. शेख मोहम्मद ने शुक्रवार को संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के साथ रात्रिभोज किया.कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी के अनुसार, सोमवार की बैठक में "कतर राज्य पर इज़राइली हमले पर एक मसौदा प्रस्ताव" पर विचार किया जाएगा.

नेपाल में हाल में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान वहां की जेलों से भागे संदिग्धों में शामिल 70 लोगों को अब तक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर विभिन्न राज्यों से पकड़ा गया है, जिनमें एक बांग्लादेशी नागरिक और कुछ भारतीय भी शामिल हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जान

News Pratyaksh | Updated : Sat 13th Sep 2025, 09:05 am
नेपाल में हाल में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान वहां की जेलों से भागे संदिग्धों में शामिल 70 लोगों को अब तक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर विभिन्न राज्यों से पकड़ा गया है, जिनमें एक बांग्लादेशी नागरिक और कुछ भारतीय भी शामिल हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इन सभी लोगों को मुख्य रूप से सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और कुछ को नेपाल की सीमा से लगे राज्यों के पुलिस बलों द्वारा पकड़ा गया है। एसएसबी द्वारा पकड़े गए लोगों को संबंधित राज्यों की स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है।

हम जब भी ब्रह्मांड के बारे में सोचते हैं तो हमारे मन में कई बार ऐसा सवाल आता है कि क्या पृथ्वी के अलावा किसी भी अन्य ग्रह पर जीवन संभव है या कभी जीवन था

News Pratyaksh | Updated : Thu 11th Sep 2025, 09:31 am
हम जब भी ब्रह्मांड के बारे में सोचते हैं तो हमारे मन में कई बार ऐसा सवाल आता है कि क्या पृथ्वी के अलावा किसी भी अन्य ग्रह पर जीवन संभव है या कभी जीवन था. दुनिया भर के वैज्ञानिक कई सालों से इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में नासा को एक खोज की है, जो इस बात की ओर इशारा करती है कि शायद मंगल ग्रह पर भी कभी जीवन हुआ करता था. आइए हम आपको नासा की इस नई खोज की डिटेल्स बताते हैं.दरअसल, नासा के रोवर Perseverance ने इस सवाल का जवाब खोजने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है कि क्या मंगल ग्रह पर कभी जीवन था. नासा के इस रोवर ने मंगल ग्रह पर एक ऐसी चट्टान को ढूंढा है, जिसमें जीवन के पुराने संकेत या सबूत छिपे हो सकते हैं.नासा के परसेवेरेंस रोवर को जुलाई 2024 में मंगल ग्रह के “Bright Angel Formation” नाम के इलाके में यह चट्टान मिली थी. यह जगह एक पुरानी नदी की घाटी में हैं, जहां कभी बहुत तेजी से पानी बहा करता था. इस चट्टान का आकार लगभग 3 फीट लंबा और 2 फीट चौड़ा है. इसमें कुछ रंग-बिरंगे स्पॉट्स भी दिखाई दिए हैं, जो दिखने में चीता जैसी खाल (Leopard Spots) जैसे हैं. इन्हीं धब्बों में कुछ खास तरह के खनिज (minerals) भी पाए गए हैं. जैसे: विवियनाइट (Vivianite) – यह पृथ्वी पर दलदली इलाकों या सड़ी हुई चीज़ों के पास पाया जाता है. ग्रेगाइट (Greigite) – ग्रेगाइट को पृथ्वी पर कुछ खास तरह के बैक्टीरिया बनाते हैं. इन खनिजों का एक साथ पाया जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि मंगल ग्रह पर शायद कभी जीवन होगा या जीवन की कोई प्रक्रिया होगी.अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि नासा के रोवर को जो संकेत मिले हैं, क्या वो किसी ग्रह पर बिना जीवन के भी मिल सकते हैं. इसके बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सब कुछ गैर-जैविक (non-biological) प्रक्रियाओं से भी बन सकता है, जैसे तेज़ गर्मी या अम्लीय माहौल में इन चीजों का निर्माण हो सकता हैं. हालांकि, नासा को मंगल ग्रह के जिस इलाके ये सबूत मिले हैं, वहां किसी कठोर वातावरण के सबूत नहीं मिले हैं.इसका मतलब है कि अगर मंगल ग्रह के इन क्षेत्रों में कभी माइक्रोब्स थे, तो उन्होंने इन तत्वों का इस्तेमाल करके एनर्जी बनाई होगी. पृथ्वी पर भी माइक्रोब्स इसी प्रोसेस को फॉलो करते हैं. इसी कारण से वैज्ञानिक इन सबूतों को मंगल ग्रह पर जीवन होने का अभी तक का सबसे मजबूत संकेत मान रहे हैं.

ओरेकल के शानदार तिमाही नतीजों के बाद दुनिया के सबसे अमीर इंसान बने :

News Pratyaksh | Updated : Thu 11th Sep 2025, 07:55 am
  दुनिया के अरबपतियों की रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. लंबे समय तक दुनिया के नंबर-1 अमीर रहे एलन मस्क अब पीछे रह गए हैं और ओरेकल कॉर्पोरेशन के को-फाउंडर लैरी एलिसन दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. 81 साल के टेक टॉयकून एलिसन की संपत्ति में एक ही दिन में 101 अरब डॉलर का जबरदस्त उछाल आया, जिससे उनकी कुल नेटवर्थ 393 अरब डॉलर तक पहुँच गई. वहीं, एलन मस्क की नेटवर्थ इस समय 385 अरब डॉलर दर्ज की गई.इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण ओरेकल के तिमाही नतीजे हैं. कंपनी ने अपनी तिमाही रिपोर्ट में शानदार प्रदर्शन दर्ज किया और इसके शेयरों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली. नतीजों के बाद लैरी एलिसन की नेटवर्थ में भारी बढ़ोतरी हुई, जिससे उन्होंने ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स में टॉप पोजिशन हासिल कर ली.ओरेकल के शेयरों में इस साल अब तक 45% से ज्यादा की तेजी आ चुकी है. बुधवार को शेयर में 41% का उछाल आया और इसका भाव 328.33 डॉलर तक पहुंच गया. इससे पहले कारोबारी दिन एलिसन का शेयर 241.63 डॉलर पर बंद हुआ था. बुधवार को यह शेयर 319.19 डॉलर पर खुला और तेजी पकड़ते हुए 345.72 डॉलर तक पहुँच गया. इस तेजी ने एलिसन को दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति के तौर पर स्थापित कर दिया.एलन मस्क, जो टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ हैं, पहली बार 2021 में दुनिया के नंबर-1 अमीर बने थे. इसके बाद उनका स्थान कुछ समय के लिए अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस और एलवीएमएच के चेयरमैन बर्नार्ड अरनॉल्ट के हाथों गया. पिछले साल फिर संपत्ति में उछाल के कारण मस्क नंबर-1 पायदान पर लौटे थे. लेकिन इस साल टेस्ला के शेयरों में 13% तक गिरावट के कारण उनकी नेटवर्थ पर असर पड़ा और वे दूसरे स्थान पर आ गए.81 वर्षीय लैरी एलिसन इस उम्र में भी ओरेकल के चेयरमैन और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर के रूप में काम कर रहे हैं. उनकी अधिकांश संपत्ति उनकी कंपनी से होने वाली कमाई और स्टॉक्स से आती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि एलिसन की बढ़ती संपत्ति और मस्क की गिरती नेटवर्थ ने अरबपतियों की लिस्ट में नया संतुलन बना दिया है.ओरेकल के शेयर की तेजी और कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है. विश्लेषक मानते हैं कि भविष्य में अरबपतियों की रैंकिंग में और बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि टेक उद्योग में संपत्ति में तेजी से बदलाव संभव है. इस ऐतिहासिक बदलाव ने यह साबित कर दिया कि अरबपतियों की दुनिया में स्थिति कभी भी पलट सकती है और नई कंपनियों के प्रदर्शन से बड़े बदलाव संभव हैं.

भारत के पड़ोसी देश नेपाल के हालात बेहद खराब हैं. पिछले दो दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शन काफी उग्र हो गए हैं

News Pratyaksh | Updated : Wed 10th Sep 2025, 10:18 am
भारत के पड़ोसी देश नेपाल के हालात बेहद खराब हैं. पिछले दो दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शन काफी उग्र हो गए हैं. राजधानी काठमांडू की सड़कों पर छात्र नेपाल की सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन कर रहे हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक प्रदर्शन में हथियार बंद लोग भी देखे गए हैं. यहां प्रदर्शन अब हिंसक भी होने लगे हैं. इससे पहले मंगलवार को देश के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पद से इस्तीफा दे दिया. वहीं, सरकार के अन्य मंत्रियों ने भी इस्तीफा देने में अपनी भलाई समझी. इसके साथ-साथ सभी मंत्री और नेता देश छोड़कर बाहर जाने की फिराक में हैं. वहीं, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने केपी शर्मा ओली सरकार के कई मंत्रियों को जमकर पीटा. छात्रों ने नेपाली संसद और पूर्व प्रधानमंत्री के घर को भी आग लगा दिया.नेपाल में हालात को देखते हुए उत्तर प्रदेश के महाराजगंज के सोनौली में भारत-नेपाल सीमा पर फंसे भारतीय नागरिकों को एसएसबी की मदद से भारत वापस लाया जा रहा है. नेपाली नागरिकों को मेडिकल इमरजेंसी या अन्य किसी भी आपात स्थिति में पूरी जांच के बाद भारत में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है.

नेपाल में ओली सरकार के खिलाफ हो रहे उग्र प्रदर्शन के कारण अररिया जिले से सटे नेपाल बॉर्डर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

News Pratyaksh | Updated : Tue 09th Sep 2025, 09:13 am
नेपाल में ओली सरकार के खिलाफ हो रहे उग्र प्रदर्शन के कारण अररिया जिले से सटे नेपाल बॉर्डर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. बॉर्डर पर सुरक्षा बल अलर्ट हैं और नेपाल से भारत में प्रवेश करने वालें लोगों पर कड़ी नजर रखी जा रही है. गौरतलब है कि अररिया जिले से नेपाल की खुली सीमा लगभग 85 किलोमीटर है. नेपाल बॉर्डर से सटे अररिया के घुरना थाना, बसमतिया, फुलकाहा, जोगबनी, कुआड़ी और सिकटी थाना क्षेत्र में अलर्ट किया गया है.बता दें कि नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में राजधानी काठमांडू और कुछ अन्य इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. इसी बीच 19 लोगों की मौत हो चुकी है. साथ ही मौजूदा हालात को लेकर नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.काठमांडू में कर्फ्यू का आदेश जारी कर दिया गया है. जिससे चार जिलों में किसी के भी प्रवेश, सभा, जुलूस, प्रदर्शन पर रोक रहेगी. भारी संख्या में सेना को सड़कों पर उतारा गया है, ताकि हिंसा को बंद किया जा सके.बता दें कि बिहार के सात जिलों का बॉर्डर सील किया गया है. जिसमें पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया, सुपौल, पूर्वी चंपारण और किशनगंज शामिल है. एसएसबी 56वीं और एसएसबी 52वीं द्वारा भी खुली सीमा पर नजर रखी जा रही है.
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