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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आज जम्मू-कश्मीर विधानसभा में दैनिक विधायी कार्यों के अलावा किराया प्राधिकरण की स्थापना के लिए एक विधेयक पेश कर सकते हैं.

News Pratyaksh | Updated : Thu 30th Oct 2025, 11:39 am
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आज जम्मू-कश्मीर विधानसभा में दैनिक विधायी कार्यों के अलावा किराया प्राधिकरण की स्थापना के लिए एक विधेयक पेश कर सकते हैं. इस विधेयक का उद्देश्य परिसरों के किराये को विनियमित करने और मकान मालिकों व किरायेदारों के हितों की रक्षा के लिए किराया प्राधिकरण की स्थापना करना है. इसका उद्देश्य विवादों के त्वरित समाधान हेतु न्याय-निर्णय तंत्र प्रदान करना है.ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर स्थित विधान सभा परिसर में शरदकालीन सत्र का आज पांचवां दिन है. यह विधेयक ऐसे पेश किए जाएंगे जब भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र शासित प्रदेश में आगामी उपचुनावों से पहले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई.यह घटनाक्रम तब हुआ जब मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की. इसका एक अस्थायी परिसर मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में संचालित होगा, जहाँ 11 नवंबर को उपचुनाव होने हैं.

जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधानसभा में अपने विधेयक में केंद्र शासित प्रदेश में महिलाओं के रात में काम करने पर लगे प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है

News Pratyaksh | Updated : Wed 29th Oct 2025, 11:23 am
जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधानसभा में अपने विधेयक में केंद्र शासित प्रदेश में महिलाओं के रात में काम करने पर लगे प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 में मौजूदा कानून पर कोई टिप्पणी न किए जाने के बाद, आज चल रहे विधानसभा सत्र के लिए निर्धारित आधिकारिक कार्यसूची में दुकानों और प्रतिष्ठानों में श्रमिकों के रोजगार के लिए दुकानें और प्रतिष्ठान सहित तीन सरकारी विधेयक प्रस्तावित हैं.उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी द्वारा पेश किए जाने वाले इस विधेयक में पिछले कानून के कुछ प्रावधानों को हटाकर उनमें संशोधन किया गया है. इसमें रात के समय महिलाओं के काम करने पर प्रतिबंध भी शामिल है. इसमें कहा गया है कि प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं क्योंकि महिलाएं अपनी इच्छा और सहमति से रात के समय भी काम कर सकती हैं.इस विधेयक में दुकानों के खुलने और बंद होने के समय पर लगे प्रतिबंध को भी हटाने का प्रस्ताव है. इसमें अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के मानकों के अनुसार काम के घंटे निर्धारित करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री जावीद अहमद डार जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, 1989 में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश करेंगे.

महागठबंधन (इंडिया) का मुख्य एजेंडा

News Pratyaksh | Updated : Wed 29th Oct 2025, 11:19 am
महागठबंधन (इंडिया) का मुख्य एजेंडा 1. हर परिवार को एक सरकारी नौकरी: गठबंधन की सरकार बनने पर 20 दिन के भीतर कानून बनाकर 20 महीने के भीतर हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया है. 2. फ्री बिजली: हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का संकल्प. 3. महिलाओं के लिए 'माई-बहिन मान योजना': हर महिला को सालाना 30,000 रुपये सहायता, महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण और बेटी-माई योजनाओं का ऐलान. 4. आरक्षण की सीमा: 50% आरक्षण की सीमा को खत्म करने, वक्फ कानून को निरस्त करने, और सच्चर कमेटी की सिफारिशें लागू करने की घोषणा. 5. जीविका दीदियों का स्थायीकरण: जीविका समूह की महिलाओं को नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा, मानदेय में वृद्धि.​ 6. शिक्षा: 8वीं से 12वीं तक के छात्रों को टैबलेट, 70 किलोमीटर के दायरे में विश्वविद्यालय खोलने का वादा. 7. ओल्ड पेंशन स्कीम का पुनर्स्थापन: पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करने का वादा. 8. भूमिहीन परिवारों को जमीन: भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल जमीन देने का वादा.​ 9. कानून व्यवस्था: अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, पुलिस अधिकारियों के निश्चित कार्यकाल. NDA का मुख्य एजेंडा (बीजेपी-जेडीयू) 1. रोजगार और इंडस्ट्रियल विकास: अगले 5 वर्षों में एक करोड़ नौकरियां देने, नए औद्योगिक कॉरिडोर (विशेषकर रक्षा उपकरण निर्माण) का वादा. 2.Make in Bihar: AI और सेमीकंडक्टर निर्माण क्लस्टर, भारी उद्योगों की स्थापना, निवेश को बढ़ावा देना, बिहार के उद्यमियों को प्रोत्साहन. 3.शिक्षा और स्वास्थ्य: शिक्षा-स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना. 4.महिला सुरक्षा और कल्याण: महिलाओं के लिए नई योजनाएं, स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना. 5.इन्फ्रास्ट्रक्चर: सड़क, बिजली, पानी, सिंचाई समेत आधारभूत संरचनाओं का विस्तार. 6.कानून-व्यवस्था और सुशासन: आर्थिक सुधार, पारदर्शिता, अपराध पर नियंत्रण, और प्रशासनिक सुधार. 7.उद्योग एवं कृषि: बड़े पैमाने पर उद्योग लगाने, कृषि क्षेत्र में नवाचार करने का वादा. दोनों गठबंधनों के एजेंडा में रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, शिक्षा, औद्योगिक विकास और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है, मगर दृष्टिकोण एवं योजनाओं में अंतर है—महागठबंधन "हर परिवार को नौकरी और सहकारी कल्याण" की बात, जबकि NDA "बड़े औद्योगिक निवेश, सुशासन और सभी वर्गों के विकास" पर जोर दे रहा है.

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मंगलवार को आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के तीन उम्मीदवारों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘‘दबाव’’ में अपने नामांकन वापस ले लिए।

News Pratyaksh | Updated : Wed 22nd Oct 2025, 12:46 pm
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मंगलवार को आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के तीन उम्मीदवारों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘‘दबाव’’ में अपने नामांकन वापस ले लिए। पटना के शेखपुरा हाउस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में किशोर ने यह दावा भी किया कि सत्ता पक्ष राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) चुनाव हारने के डर से विपक्षी उम्मीदवारों को मैदान से हटने के लिए धमका रहा है। उन्होंने कहा, “जनसुराज को वोटकटवा बताने वाली भाजपा को असल में डर लग रहा है। भाजपा को महागठबंधन से नहीं, बल्कि जनसुराज से डर लग रहा है। इसका उदाहरण यह है कि पिछले चार दिनों में हमारे तीन घोषित उम्मीदवारों को नामांकन करने नहीं दिया गया।” किशोर का कहना था, ‘‘लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। देश में इस तरह की कोई मिसाल नहीं रही है।’’ उन्होंने निर्वाचन आयोग से उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। किशोर ने बताया कि जिन उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लिया है, वे दानापुर, ब्रह्मपुर और गोपालगंज सीटों से मैदान में थे। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ‘सूरत मॉडल’ को दोहराने की कोशिश कर रही है, जहां उनके उम्मीदवार को निर्विरोध जीत मिली थी क्योंकि बाकी सभी प्रत्याशियों को नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया गया था। भाजपा यह नहीं समझ पा रही है कि देशभर के मतदाताओं ने इसके लिए उसे सबक सिखाया और पिछली लोकसभा चुनाव में उसे केवल 240 सीटें मिलीं, जबकि वह 400 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रही थी।’

तेजस्वी ने महिला उम्मीदवार को माला पहनाने की घटना के बाद नीतीश के ‘स्वास्थ्य’ पर उठाए सवाल

News Pratyaksh | Updated : Wed 22nd Oct 2025, 12:25 pm
तेजस्वी ने महिला उम्मीदवार को माला पहनाने की घटना के बाद नीतीश के ‘स्वास्थ्य’ पर उठाए सवाल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को एक चुनावी सभा के दौरान महिला उम्मीदवार को माला पहनाने पर जोर देकर और रोकने की कोशिश करने वाले अपने करीबी सहयोगी को डांटकर अपने स्वास्थ्य को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार ने अपने विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर विधानसभा क्षेत्र से की। इस दौरान वह स्थानीय जद(यू) प्रत्याशी अजय कुशवाहा का नाम गलत उच्चारित करने और औराई सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार रमा निषाद के नाम के आगे ‘‘श्री’’ जोड़ देने पर भी चर्चा में रहे। मुख्यमंत्री (75) ने अपने संबोधन में कहा कि यदि जनता राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को जिताने का वादा करती है, तो वे इसे सुनिश्चित जीत का प्रतीक मानकर उम्मीदवारों को माला पहनाना चाहेंगे।सभा के दौरान जैसे ही कुमार माला लेकर भाजपा उम्मीदवार रमा निषाद की ओर बढ़े, निषाद असहज दिखीं। हिंदू परंपरा में सामान्य तौर पर किसी महिला को पति के अलावा अन्य किसी पुरुष द्वारा माला पहनाने का चलन नहीं है। राजनीतिक कार्यक्रमों में पुरुषों को माला पहनाने और महिलाओं को हाथ में माला सौंपने की परंपरा रही है। उल्लेखनीय है कि रमा निषाद, मुजफ्फरपुर के पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी हैं। स्थिति को संभालने के लिए जद(यू) के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी संजय कुमार झा ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए नीतीश कुमार का हाथ थामने की कोशिश की। लेकिन जब उन्हें लगा कि मुख्यमंत्री उनकी बात से नाराज हैं, तो उन्होंने पीछे हटते हुए स्थिति को उनके ऊपर छोड़ दिया। इसके बाद कुमार ने झा की ओर मुड़कर कहा, ‘‘तुम भी अजीब आदमी हो,’’ और फिर रमा निषाद के गले में माला डाल दी।
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