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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 6 फरवरी 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार

News Pratyaksh | Updated : Sat 14th Feb 2026, 12:51 pm
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 6 फरवरी 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में 6.711 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इस कमी के बाद देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 717.064 अरब डॉलर रह गया है.गौरतलब है कि इससे ठीक पिछले सप्ताह भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.361 अरब डॉलर की जबरदस्त बढ़त के साथ 723.774 अरब डॉलर के अपने अब तक के उच्चतम स्तर (All-time high) पर पहुंच गया था. एक ही सप्ताह के भीतर भंडार में आई यह गिरावट बाजार विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है.केंद्रीय बैंक द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस गिरावट का सबसे प्रमुख कारण स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) के मूल्य में आई कमी है. समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान भारत के स्वर्ण भंडार का मूल्य 14.208 अरब डॉलर घटकर 123.476 अरब डॉलर रह गया. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिसंपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन के कारण यह बड़ा बदलाव देखने को मिला है.आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में यह उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में बदलाव और विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की स्थिति को संभालने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा किए गए हस्तक्षेपों के कारण हो सकता है. भारी गिरावट के बावजूद, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी वैश्विक स्तर पर बेहद मजबूत स्थिति में बना हुआ है, जो देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षा प्रदान करता है.

भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता काफी उथल-पुथल भरा रहा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंताओं और कमजोर विदेशी संकेतों के चलते भारतीय बाजारों ने करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की. इस गिरावट का सबसे बड़ा असर IT सेक्टर पर देखने को

News Pratyaksh | Updated : Sat 14th Feb 2026, 12:46 pm
भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता काफी उथल-पुथल भरा रहा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंताओं और कमजोर विदेशी संकेतों के चलते भारतीय बाजारों ने करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की. इस गिरावट का सबसे बड़ा असर IT सेक्टर पर देखने को मिला, जो AI के बढ़ते प्रभाव के कारण भविष्य की चुनौतियों से डरा हुआ है.शुक्रवार को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बाजार में भारी बिकवाली हुई. सेंसेक्स (Sensex) 1,048 अंक या 1.25 प्रतिशत लुढ़ककर 82,626 के स्तर पर बंद हुआ. पूरे सप्ताह के आधार पर इसमें 1.14 प्रतिशत की गिरावट आई. वहीं, निफ्टी (Nifty) शुक्रवार को 1.30 प्रतिशत गिरकर 25,471 पर आ गया, जबकि साप्ताहिक आधार पर इसमें 0.87 प्रतिशत की कमी देखी गई.बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी शेयर बाजार (वॉल स्ट्रीट) में AI से जुड़ी चिंताओं के कारण आई बिकवाली है. निवेशकों को डर है कि AI की तेजी से होती प्रगति भारतीय IT कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को नुकसान पहुँचा सकती है. निफ्टी IT इंडेक्स इस हफ्ते 10 महीने के निचले स्तर तक पहुँच गया. हालांकि, अंत में कुछ खरीदारी से इसमें सुधार हुआ, लेकिन भविष्य में कमाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

बुधवार, 4 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव भरा कारोबार रहा, लेकिन अंत में यह मामूली बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा. आईटी शेयरों में भारी बिकवाली के बावजूद ऑटो और तेल एवं गैस शेयरों में आई खरीदारी ने बाजार को संभाला.बीएसई सेंसेक्स (BSE Sens

News Pratyaksh | Updated : Wed 04th Feb 2026, 01:23 pm
बुधवार, 4 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव भरा कारोबार रहा, लेकिन अंत में यह मामूली बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा. आईटी शेयरों में भारी बिकवाली के बावजूद ऑटो और तेल एवं गैस शेयरों में आई खरीदारी ने बाजार को संभाला.बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex): आज 78.56 अंक (0.09%) की बढ़त के साथ 83,817.69 पर बंद हुआ. एनएसई निफ्टी (NSE Nifty 50): 48.45 अंक (0.19%) की मजबूती के साथ 25,776 के स्तर पर रहा. वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपये में आज कमजोरी देखी गई. यह 9 पैसे गिरकर 90.41 प्रति डॉलर पर बंद हुआ          

कोटक महिंद्रा के निलेश शाह ने रखीं 3 बड़ी उम्मीदें; इंफ्रा निवेश और गोल्ड मोनेटाइजेशन पर जोर

News Pratyaksh | Updated : Thu 29th Jan 2026, 11:13 am
कोटक महिंद्रा के निलेश शाह ने रखीं 3 बड़ी उम्मीदें; इंफ्रा निवेश और गोल्ड मोनेटाइजेशन पर जोर नई दिल्ली: कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के एमडी निलेश शाह ने आगामी केंद्रीय बजट 2026 को लेकर सरकार के सामने तीन मुख्य प्राथमिकताएं रखी हैं, जिन्हें बाजार भी सकारात्मक रूप से देखेगा.शाह के अनुसार, सरकार को सबसे पहले इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाना चाहिए. इस निवेश को फंड करने के लिए, उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार केवल टैक्स पर निर्भर न रहे, बल्कि एसेट मोनेटाइजेशन और रणनीतिक विनिवेश जैसे नए स्रोतों से राजस्व जुटाए. उनकी तीसरी और सबसे अनूठी उम्मीद गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम है. शाह ने कहा कि लोगों की तिजोरियों में पड़े बेकार सोने-चांदी को बाजार में लाने के लिए 'आउट-ऑफ-द-बॉक्स' सोच अपनानी चाहिए. अगर सरकार इन तीनों बिंदुओं—इंफ्रा निवेश, राजस्व के नए स्रोत और राजकोषीय अनुशासन—पर मजबूती से आगे बढ़ती है, तो बाजार इस बजट का जोरदार स्वागत करेगा.

भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में 29 जनवरी का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है

News Pratyaksh | Updated : Thu 29th Jan 2026, 11:07 am
भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में 29 जनवरी का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है. वैश्विक अस्थिरता और निवेशकों की भारी लिवाली के चलते आज सोने और चांदी की कीमतों ने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. वायदा बाजार में चांदी की कीमत पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई है, जबकि सोने ने भी 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का नया ऑल-टाइम हाई छुआ है.मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी के मार्च कॉन्ट्रैक्ट में जबरदस्त तेजी देखी गई. भाव 22,090 रुपये या लगभग 5.73 प्रतिशत की छलांग लगाकर 4,07,456 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया. विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की औद्योगिक मांग में आई अचानक तेजी ने इसे सोने के मुकाबले अधिक आकर्षक बना दिया है.इस वर्ष अब तक चांदी की कीमतों में 60% से अधिक की अविश्वसनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि सोना लगभग 27% महंगा हुआ है. याद रहे कि 2025 में भी सोने ने 64% का शानदार रिटर्न दिया था. मौजूदा स्थिति को देखते हुए जानकारों का कहना है कि सुरक्षित निवेश की मांग अभी और बढ़ सकती है.

भारत और चीन के बीच व्यापार विवाद बढ़ा, बीजिंग ने WTO में नई दिल्ली की EV नीतियों को दी चुनौती :

News Pratyaksh | Updated : Tue 20th Jan 2026, 12:30 pm
भारत और चीन के बीच व्यापार विवाद बढ़ा, बीजिंग ने WTO में नई दिल्ली की EV नीतियों को दी चुनौती : ऑटोमोबाइल, बैटरी और EVs की इंसेंटिव स्कीम को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद बना हुआ है. अब चीन ने भारत के खिलाफ विवाद सुलझाने के लिए एक पैनल बनाने के लिए वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन (WTO) से संपर्क किया है, जिससे ऑटोमोबाइल, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए नई दिल्ली की इंसेंटिव स्कीम को लेकर व्यापार विवाद बढ़ गया है. यह अनुरोध इस मुद्दे को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय बातचीत के फेल होने के बाद किया गया है.आपकी जानकारी के लिए बता दें बीजिंग ने पिछले साल अक्टूबर माह में पहली बार चिंता जताई थी, और आरोप लगाया था कि भारत की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं की शर्तें चीन सहित इम्पोर्टेड सामानों के साथ भेदभाव करती हैं.खास बात यह है कि यह चुनौती ऐसे समय में सामने आई है, जब चीनी ऑटोमोबाइल कंपनियां ज़्यादा प्रोडक्शन कैपेसिटी और देश में कड़ी कीमत की होड़ के बीच विदेशी बाज़ारों की तलाश कर रही हैं. भारत के तेज़ी से बढ़ते ऑटो और EV बाज़ार को चीनी मैन्युफैक्चरर्स एक बड़े मौके के तौर पर देख रहे हैं.चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन (CPCA) से मिली जानकारी के अनुसार, चीनी कंपनियों ने साल के पहले आठ महीनों में लगभग 2.01 मिलियन प्योर इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड गाड़ियों का एक्सपोर्ट किया, जो पिछले साल के मुकाबले 51 प्रतिशत ज़्यादा है. हालांकि, चीनी EV एक्सपोर्ट को कई इलाकों में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें यूरोपियन यूनियन भी शामिल है, जिसने चीन में बनी EVs पर 27 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया है.दोनों देशों के बीच बीते साल 25 नवंबर, 2025 और इस साल 6 जनवरी, 2026 को बातचीत हुई, लेकिन इससे कोई आपसी सहमति वाला समाधान नहीं निकल पाया. इसके बाद 16 जनवरी को एक कम्युनिकेशन में, चीन ने औपचारिक रूप से WTO की विवाद निपटान संस्था (DSB) से एक पैनल बनाने का अनुरोध किया और कहा कि इस मामले को जिनेवा में 27 जनवरी को होने वाली अगली मीटिंग के एजेंडे में शामिल किया जाए.
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