Jharkhand


अभी नहीं थमेगा झारखंड में बारिश का दौर :

News Pratyaksh | Updated : Fri 21st Mar 2025, 11:57 am
 झारखंड के सभी जिलों में मौसम का मिजाज बदल गया है. गुरुवार से ही तेज हवा के साथ वज्रपात, गर्जन, ओलावृष्टि और बारिश शुरू हो गयी. गढ़वा, पलामू, धनबाद में सुबह से ही बारिश होने लगी थी. जबकि दोपहर बाद हजारीबाग, देवघर, गिरिडीह, खूंटी, लोहरदगा, गुमला में बारिश शुरू हो गयी. मौसम विभाग का कहना है कि बारिश का दौर अभी 23 मार्च तक नहीं थमेगा. यानी कि कई जिलों में शुक्रवार को भी झमाझम बारिश होगी.रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक बंगाल की खाड़ी की नम हवा के साथ उत्तर भारत से आ रही हवा के कारण पूरे झारखंड सहित राज्य से सटे बिहार के आस-पास के जिले में बारिश शुरू हो गयी है. इस वजह से 21, 22 और 23 मार्च को भी कई इलाकों में बारिश होगी. राजधानी में शुक्रवार को भी कई इलाकों में तेज हवा, गर्जन के साथ बारिश और ओलावृष्टि के आसार हैं. इसके अलावा गुमला, सिमडेगा में भी बारिश की संभावना है. लातेहार, पलामू और गढ़वा के कई हिस्सों में वज्रपात के आसार हैं.मौसम में बदलाव के कारण सभी जिलों के अधिकतम तापमान में कमी आ गयी है. देवघर में 12 डिग्री सेल्सियस की कमी आयी है. जबकि रांची में 2.8 डिग्री सेल्सियस की कमी आयी है. 24 मार्च से मौसम सामान्य रहने की संभावना है. अभिषेक आनंद ने बताया कि यह बारिश न तो साइक्लोनिक है और न ही प्री नसून है. ऐसी स्थिति में जब- जब जहां बादल का निर्माण होगा, बारिश होगी

विभिन्न कारणों से हजारों महिलाओं के नाम भी लाभुक की सूची से हटा दिए गए :

News Pratyaksh | Updated : Fri 21st Mar 2025, 08:40 am
मंईयां सम्मान योजना की 3 किस्तें (7500 रुपए) एक साथ पाकर महिलाओं के चेहरे खिल उठे हैं. एक ओर 38 लाख महिलाएं खुशी से झूम रहीं हैं, तो बाकी महिलाएं मंईयां सम्मान का पैसा नहीं मिलने से निराश हैं. चिंतित भी हैं. पैसे अकाउंट में न आने की वजह जानने और समाधान पाने के लिए महिलाएं ब्लॉक के चक्कर काट रहीं हैं. विभिन्न कारणों से हजारों महिलाओं के नाम भी लाभुक की सूची से हटायें जा रहें है. ऐसे में आपकी एक छोटी से चूक आपको मिलने वाले 2500 रुपए से वंचित कर सकती है.विभाग ने 3 माह के 7500 रुपए डीबीटी के माध्यम से लाभुकों के खाते में भेज दिये हैं. बड़ी संख्या में ऐसी भी लाभुक हैं, जिन्होंने केवाईसी नहीं करवाया है, उनके अकाउंट में पैसे नहीं पहुंचे हैं. सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड का बैंक अकाउंट से लिंक होना भी जरूरी होता है. इसलिए बैंक जाकर पता कर लें कि आपका अकाउंट आधार से लिंक है या नहींमंईयां सम्मान योजना के लिए आये आवेदनों की विभिन्न जिलों में चरणबद्ध तरीके से सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है. सत्यापन के दौरान अगर किसी प्रकार की कोई त्रुटि मिलती है, तो उसे पेंडिंग लिस्ट में डाल दिया जा रहा है. वैसी महिलाओं के भी नाम इस लिस्ट से हटाये जा रहे हैं, जो इस योजना का लाभ पाने की योग्य नहीं हैं. अगर आप योजना का लाभ लेने के योग्य हैं और आपके आवेदन में भी कोई त्रुटि नहीं है, फिर भी आपका नाम लिस्ट से हटा दिया गया है, तो आप हेल्पलाइन नंबर (1800-890-0215) पर कॉल करके या प्रखंड कार्यालय में जाकर इसकी शिकायत कर सकतीं हैं. जांच के बाद अगर आपका दावा सही रहा, तो आपके बैंक अकाउंट में पैसे आने लगेंगे.

जामताड़ा में मौसम का मिजाज बदला :

News Pratyaksh | Updated : Thu 20th Mar 2025, 05:44 am
जामताड़ा में मौसम का मिजाज बदला : यहां जामताड़ा में अचानक मौसम ने करवट ली है, सुबह से ही गरज के साथ हल्की बारिश हो रही है. सुहाने मौसम के साथ वातावरण भी ठंडा हो गया है. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है देश के अन्य भागों में इसका असर देखने को मिल रहा है. मगर झारखंड में मौसम सुहाना हो गया है.जामताड़ा के मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है. रात तक मौसम जो सूखा था और गर्मी थी, सुबह होते ही अचानक मौसम का मिजाज बदल गया. सुबह से ही गरज के साथ हल्की बारिश भी शुरू हो गई. सुबह-सुबह मॉर्निंग वॉक करने वाले, स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को परेशानी जरूर उठानी पड़ी. लेकिन मौसम के मिजाज बदलने से वातावरण सुहाना हो गया और जो तेज धूप थी उससे लोगों को राहत मिली.मार्च के महीने में ही तापमान काफी बढ़ गया और तेज धूप से धरती भी तपने लगी थी. अधिक गर्मी से लोगों को काफी परेशानी भी हो रही थी कि अचानक मौसम के मिजाज बदलने से वातावरण में नमी आई है. बताया जाता है कि जामताड़ा का अधिकतम तापमान 35 डिग्री चला गया था जो कि लोगों के लिये चिंता का विषय था, फिलहाल मौसम में आई तबदीली से लोग काफी राहत महसूस कर रहे हैं.

हजारीबाग को क्यों हासिल है मिनी अयोध्या का दर्जा :

News Pratyaksh | Updated : Wed 19th Mar 2025, 12:42 pm
हजारीबाग को क्यों हासिल है मिनी अयोध्या का दर्जा : वैसे तो रामनवमी देश में एक साथ मनाई जाती है लेकिन हजारीबाग की रामनवमी का आगाज एक महीने पहले से शुरू हो जाता है. इसकी समृद्धता और भव्यता के कारण इस रामनवमी को इंटरनेशनल रामनवमी के भी नाम से जाना जाता है. होली के बाद से ही रामनवमी रंग में रंगने लगा है. हजारीबाग रामनवमी का इतिहास 100 सालों से अधिक पुराना है. होली के बाद आने वाले पहले मंगलवार को मंगला जुलूस निकालने की परंपरा रही है.मंगल को जन्मे, मंगल ही करते, मंगलमय हनुमान इसी मंगल कामना के साथ हजारीबाग शहर समेत जिलेभर में मंगलवार की देर शाम रामनवमी का पहला मंगला जुलूस गाजेबाजे के साथ निकाला गया. मंगला जुलूस के साथ ही हजारीबाग में रामनवमी महापर्व का आगाज भी हो गया. लगभग 1 दर्जन से अधिक विभिन्न अखाड़ों का जुलूस सड़कों पर निकला, जो अलग अलग मार्गो से होते हुए महावीर स्थान पर पहुंचा. जिसके बाद मंदिरों में पूजा अर्चना की गई. इस दौरान राम भक्तों का जन सैलाब सड़कों पर देखने को मिला. शक्ति प्रदर्शन करते हुए राम भक्त नाचते गाते सड़कों पर दिखे, इस दौरान जुलूस के दौरान सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे.स्थानीय युवा रुद्र राज बताते हैं कि होली के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार से ही मंगला जुलूस निकालने की परंपरा रही है. साल 1955 से मंगला जुलूस हजारीबाग में निकाला जाता रहा है. रामनवमी तक प्रत्येक मंगलवार को विभिन्न अखाड़े पूरे उत्साह के साथ मंगला जुलूस निकालते हैं. सिर्फ शहरी नहीं हजारीबाग जिले के ग्रामीण इलाकों में भी मंगलवार को मंगला जुलूस निकालने कि परंपरा रही है.मंगला जुलूस की भव्यता देखने लायक होती है. शहर के दर्जनों अखाड़े और हजारों राम भक्त सड़कों पर राम उत्सव की तैयारी मनाने के लिए निकलते हैं. अखाड़े के विशाल वाल्मीकि भी कहते हैं कि हजारीबाग की एक पहचान इसके रामनवमी से है. नई पीढ़ी के लोग भी इसे जुड़ रहे हैं. उन्होंने लोगों से भी अपील की थी रामनवमी में राम भक्तों को नशा मुक्ति रामनवमी मानना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की है रामनवमी जुलूस को राजकीय महोत्सव का भी दर्जा दिया जाए, रामनवमी के दिन राम भक्तों पर पुष्प वर्षा भी की जाती है.हजारीबाग की रामनवमी आस्था, परंपरा और भव्यता का प्रतीक है. मंगला जुलूस के साथ इसकी शुरुआत होती है, जो भक्तों के उत्साह को बढ़ाता है. यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक एकता का भी संदेश देता है. जैसे-जैसे रामनवमी निकट आता है, भक्ति और उल्लास चरम पर पहुंच जाता है.

खनन क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर हो सकते हैं गम्भीर बीमारी के शिकार

News Pratyaksh | Updated : Wed 19th Mar 2025, 11:08 am
 जिले में दर्जनों पत्थर खदानें और क्रशर संचालित हैं. इन खदानों में काम करने वाले मजदूर पत्थर के डस्ट के कारण गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं. इसके लिए जरूरी है कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें. इसी के मद्देनजर मंगलवार को दुमका में खान सुरक्षा महानिदेशालय की ओर से स्वास्थ्य सह जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया.खान सुरक्षा निदेशक, धनबाद साजेश कुमार, उपनिदेशक मिथलेश कुमार और दुमका उपायुक्त आंजनेयुलु दोड्डे की उपस्थित में जिले में चल रहे पत्थर खदानों में कार्यरत श्रमिकों के लिए एक स्वास्थ्य सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उपायुक्त ने कहा कि दुमका जिले में स्टोन चिप्स का कारोबार इकलौता उद्योग है. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है, ताकि इस क्षेत्र से मजदूरों के पलायन को कम किया जा सके.उन्होंने कहा कि प्राय: यह देखा जाता है कि खनन क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर पूरी एहतियात नहीं बरती जाती है. जिस वजह से श्रमिक बीमार हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या खनन क्षेत्र में धूल से होती है. धूल के कारण श्रमिकों को सिलिकोसिस, बहरापन, फेफड़े में इनफैक्शन की समस्या होती है. आप इससे बचाव से संबंधित सभी मापदंडों का पालन करें. उन्होंने कहा कि किसी भी श्रमिक को खान कार्यों में लगाने से पूर्व उसकी मेडिकल जांच करवा लें ताकि यह मालूम हो कि वह पहले से किसी बीमारी में ग्रसित तो नहीं है. अगर ऐसा है तो उससे डस्ट फ्री क्षेत्र में ही कार्य करवाएं.इसी क्रम में खान सुरक्षा निदेशक मध्य अंचल, धनबाद सागेश कुमार ने जांच शिविर में उपस्थित लोगों को महत्वपूर्ण बातों से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि अब तक झारखंड में लगभग 50 सिलिकोसिस के मरीज मिल चुके हैं. हमें इस बीमारी को फैलने से रोकने का कार्य करना है. इसके लिए खनन क्षेत्र में पानी के छिड़काव की व्यवसाय रखें. पूरे खनन क्षेत्र में पानी के छिड़काव मात्र से ही 80% डस्ट को रोका जा सकता है. कैप, मास्क का उपयोग अवश्य करें.दुमका के सिविल सर्जन डाॅ बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि दुमका के गोपीकांदर और शिकारीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र के माइंस एरिया में लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति काफी खराब है. यह डस्ट की वजह से होता है. डस्ट में कार्य कर रहे लोगों को खांसी होना, छाती भारी होना, कान से सुनाई कम देना जैसी कई बीमारियां होती हैं. खनन कार्य में श्रमिकों को फुल बॉडी कवर करवा कर ही काम कराएं. सिविल सर्जन ने कहा कि प्रति तीन महीने में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे और सभी श्रमिकों एवं ग्रामीणों का स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी.